राहुल गांधी को बड़ी राहत, SC ने रद्द किया सावरकर से जुड़ा मानहानि का केस

राहुल गांधी को बड़ी राहत, SC ने रद्द किया सावरकर से जुड़ा मानहानि का केस
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ़ आपराधिक मानहानि का केस और लखनऊ मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन रद्द कर दिया। यह कार्रवाई हिंदुत्व विचारक वी.डी. सावरकर पर उनकी टिप्पणियों को लेकर की गई थी। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उन पर मुकदमा चलाने के लिए ज़रूरी मंज़ूरी नहीं दी थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने आदेश दिया, उत्तर प्रदेश राज्य (प्रतिवादी) द्वारा दाखिल हलफनामे में आरोपी/अपीलकर्ता पर मुकदमा चलाने के लिए मंज़ूरी दिए जाने का कोई ज़िक्र नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए, मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश और शिकायत को रद्द किया जाता है। लखनऊ कोर्ट ने वकील नृपेंद्र पांडे की निजी शिकायत के बाद गांधी को समन भेजा था। पांडे का आरोप था कि 2022 में महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता ने सावरकर को “अंग्रेज़ों का नौकर” कहा था और दावा किया था कि उन्हें अंग्रेज़ों से पेंशन मिलती थी। गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने 4 अप्रैल, 2024 को उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट गए।

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25 अप्रैल को उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनकी टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने गांधी से कहा आप आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करते… और चेतावनी दी कि अगर उन्होंने ऐसे बयान दोहराए तो उनके खिलाफ़ स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की जाएगी। क्या आपके क्लाइंट को पता है कि महात्मा गांधी भी वायसराय को संबोधित करते समय ‘आपका वफादार सेवक’ शब्द का इस्तेमाल करते थे? क्या आपके क्लाइंट को पता है कि उनकी दादी, जब वे प्रधानमंत्री थीं, तब उन्होंने भी उस सज्जन (सावरकर) की तारीफ़ करते हुए एक पत्र भेजा था? जस्टिस दत्ता ने गांधी की ओर से पेश हुए सीनियर वकील ए एम सिंघवी से  कहा कि जब आपको इतिहास पता हो, तो आप आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं करते। आप ऐसी टिप्पणी क्यों करते हैं?

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जज ने उनसे भविष्य में ऐसे बयान न देने को भी कहा। “उन्हें आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों के बारे में गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए। क्या आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों के साथ आप ऐसा ही बर्ताव करते हैं? कोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगा दी और कहा कि मंज़ूरी (sanction) के मुद्दे पर उनका कानूनी पक्ष मज़बूत है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस दत्ता ने राज्य के वकील से पूछा, “मंज़ूरी कहाँ है?…आपको कानून का पालन करना होगा।

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