राजस्थान में करीब 80 दिनों तक असमान और कमजोर बारिश की पारी खेलने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून आखिरकार पश्चिमी राजस्थान के हिस्सों से विदाई की राह पर निकल पड़ा है। मानसून की इस अधिकारिक विदाई के बीच मौसम विभाग (IMD) ने रविवार को प्रदेश के मौसम का मिज़ाज बदला रहने और कई इलाकों में ‘संडे मूड’ के तहत तेज बारिश होने की संभावना जताई है। मौसम केंद्र जयपुर ने बांसवाड़ा, बारां, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूंबर और उदयपुर जिलों में मेघगर्जन और वज्रपात के साथ मध्यम से भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।
विदाई के आखिरी दौर में पहुंचे मानसून ने पिछले 24 घंटों में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के हाड़ौती और वागड़ अंचल में मूसलाधार बारिश कराई है, जिससे नदियां उफान पर हैं और कई प्रमुख बांधों के गेट खोलकर पानी की निकासी करनी पड़ रही है।
बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के नए सिस्टम और मानसून ट्रफ रेखा के असर से पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के जिलों में बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं। बीते 1 दिन के आंकड़ों पर नजर डालें तो बांसवाड़ा के घाटोल में 8 इंच, प्रतापगढ़ के पीपलखूंट में 7 इंच और झालावाड़ के मनोहरथाना में 5.15 इंच सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई है।
इस भारी आवक के कारण झालावाड़ जिले में स्थित परवन बांध के कैचमेंट एरिया में जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिसके बाद जल संसाधन विभाग को शनिवार को बांध के 4 गेट खोलकर 31,600 क्यूसेक पानी की निकासी करनी पड़ी। इसके अलावा चंवली बांध पर 5 सेंटीमीटर की चादर चल रही है और छापी बांध के भी 2 गेट खोल दिए गए हैं।
8 जिलों में आज बारिश का यलो अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को राज्य के दक्षिणी और पूर्वी भागों में बारिश का दौर जारी रहेगा। जिन 8 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है, वहां के लोगों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है:
वागड़ अंचल: बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में गर्जन के साथ तेज बारिश की संभावना है।
हाड़ौती अंचल: झालावाड़ और बारां जिलों में नदी-नालों के पास रहने वाले लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।
मेवाड़ व आसपास: उदयपुर, राजसमंद, सलूंबर और प्रतापगढ़ जिलों में हल्की से मध्यम दर्ज की बारिश और बिजली कड़कने के आसार हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इन इलाकों में जलभराव और निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति बन सकती है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
80 दिन बाद मानसून की विदाई शुरू
राजस्थान में इस साल मानसून ने 2 जुलाई को प्रवेश किया था, जो सामान्य तारीख से करीब एक सप्ताह की देरी से पहुंचा था।
कमजोर रहा मानसून सीजन: इस बार राजस्थान में मानसून का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। प्रदेश में अब तक औसतन 346.01 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 412.75 मिमी बारिश होनी चाहिए थी।
18.5 प्रतिशत कम बरसे बादल: सीजन की सामान्य औसत बारिश 424.71 मिमी की तुलना में प्रदेश में बारिश का आंकड़ा करीब 18.5 प्रतिशत कम रहा है।
विदाई की सामान्य तारीख निकली आगे: मानसून की सामान्य वापसी 17 से 25 सितंबर के बीच शुरू होती है। इस बार देश भर से मानसून की पूरी तरह विदाई 15 अक्टूबर तक होने का अनुमान जताया गया है।
उफान पर नदियां, परवन-छापी बांध के गेट खोले
हाड़ौती अंचल के झालावाड़ जिले में मूसलाधार बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ है। मनोहरथाना और पनवाड़ कस्बे में हुई आधे घंटे की झमाझम बारिश से सड़कें जलमग्न हो गईं।
परवन बांध के कैचमेंट एरिया में लगातार पानी की आवक होने पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए शनिवार सुबह गेट खोले। प्रशासन ने बांध के निचले इलाकों और नदी के बहाव क्षेत्र में बसे गांवों के लिए अलर्ट जारी किया है। छापी बांध की भराव क्षमता पूरी होने पर उसके भी 2 गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है।
17 सालों में सबसे कमजोर मानसून
केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इस वर्ष मानसून का वितरण काफी असमान और कमजोर दर्ज किया गया है। देश भर में मानसून ने 3 दिन की देरी से 4 जून को केरल तट पर दस्तक दी थी और 9 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लिया था। 108 दिनों की अवधि में देश में कुल औसत बारिश का कोटा 15 प्रतिशत कम रहा है।
देश में सामान्य औसत 817.2 मिमी की तुलना में केवल 695.6 मिमी बारिश ही दर्ज हो सकी है। हालांकि, अगले 3 से 4 दिनों में पंजाब, सौराष्ट्र-कच्छ और राजस्थान के बाकी बचे हिस्सों से भी मानसून की वापसी के लिए स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

