राजस्थान के रंग में रंगे गणपति बप्पा, ऊंट पर सवार राजस्थानी रूप ने मोहा मन

राजस्थान के रंग में रंगे गणपति बप्पा, ऊंट पर सवार राजस्थानी रूप ने मोहा मन

ऊंट पर विराजमान बप्पा, पीछे रेगिस्तान की झांकी
मिट्टी से तैयार की गई गणपति प्रतिमा को कलाकार विशाल बैली ने आकार दिया है। गणपति के सिर पर पचरंगी साफा, गले में माला और लॉकेट तथा हाथों में बाजूबंद नजर आ रहे हैं। राजस्थानी धोती पहने बप्पा के हाथों में फूल, त्रिशूल, भाला और माला दिखाई दे रहे हैं। प्रतिमा के पीछे राजस्थान के ग्रामीण जीवन और रेगिस्तान को दर्शाती झांकी तैयार की गई है। इसमें सिर पर घड़े लेकर पानी भरने जाती महिलाएं और रेगिस्तान में चलते ऊंटों के दृश्य बनाए गए हैं। इसके पास करीब 18 इंच की ऋद्धि-सिद्धि गणपति प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

अलग-अलग सांस्कृतिक थीम से जुड़ रहे लोग
कांग्रेस नेता प्रकाश बुरबुरे ने कहा कि सोरबदमठ गली में गणेशोत्सव की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। अलग-अलग सांस्कृतिक थीम के जरिए उत्सव को नया रूप देना और लोगों को जोडऩा सकारात्मक पहल है।

45 साल की परंपरा में पहली बार राजस्थान थीम
श्री गजानन्द युवक मंडल के अध्यक्ष विनोद बुरबुरे ने बताया कि सोरबदमठ गली में पिछले 45 वर्षों से गणपति की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस बार पहली बार राजस्थान आधारित प्रतिमा तैयार की गई है। क्षेत्र में राजस्थान मूल के कई व्यापारी और परिवार रहते हैं, इसलिए उनकी संस्कृति और परंपरा को इस बार थीम का हिस्सा बनाया गया।

ग्रामीण जीवन का दृश्य राजस्थान की याद दिला रहा
राजस्थान मूल के कारोबारी बीरबल विश्नोई ने बताया कि गणपति को राजस्थानी साफे और वेशभूषा में ऊंट पर विराजमान देखना विशेष अनुभव है। प्रतिमा के पीछे रेगिस्तान और ग्रामीण जीवन का दृश्य राजस्थान की याद दिला रहा है।

राजस्थान की संस्कृति को सुंदर तरीके से दिखाया
राजस्थान मूल के कारोबारी किशोर पटेल गोलिया चौधरियान ने कहा कि गणपति प्रतिमा में साफा, धोती, ऊंट और रेगिस्तान की झांकी के जरिए राजस्थान की संस्कृति को बहुत सुंदर तरीके से दिखाया गया है। इससे यहां रहने वाले राजस्थानी परिवारों में भी उत्साह है।

पिछले साल कुंभ मेले की थीम, दो साल पहले रामलला
मंडल की ओर से हर वर्ष अलग-अलग कांसेप्ट पर गणपति प्रतिमा स्थापित की जाती है। पिछले वर्ष कुंभ मेले की थीम पर शिव अवतार को दर्शाया गया था, जबकि दो वर्ष पहले रामलला की प्रतिमा तैयार की गई थी। 14 सितंबर को गणपति प्रतिमा की स्थापना की गई। 25 सितंबर को विसर्जन किया जाएगा। उत्सव के दौरान प्रतिदिन पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण किया जा रहा है। सत्यनारायण कथा सहित अन्य धार्मिक आयोजन भी होंगे। स्थानीय व्यापारी अनील मेहरवाडे, राघवेन्द्र हनमसागर, ब्रह्मदेव जैन, सतीश देवड़ा, छोटूसिंह राठौड़, हितेश राठौड़, हरचंद देवासी, रमेश पटेल, चतराराम देवासी, रामदेव जैन, सुनील पटेल, रमेश देवासी, तगाराम देवासी और समर्थ नागमुले समेत अन्य व्यापारियों ने बताया कि प्रतिदिन श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *