राजगढ़ में ‘मांस गलाने’ वाले संक्रमण की दस्तक:40 से ज्यादा मरीज, रोज 1-2 नए केस; एक का पंजा कटा, कई की चमड़ी-मांस निकालना पड़ा

राजगढ़ में ‘मांस गलाने’ वाले संक्रमण की दस्तक:40 से ज्यादा मरीज, रोज 1-2 नए केस; एक का पंजा कटा, कई की चमड़ी-मांस निकालना पड़ा

राजगढ़ जिला अस्पताल में इन दिनों सेल्यूलाइटिस संक्रमण के मरीज लगातार पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अब तक 40 से ज्यादा मरीज इस बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज कराने अस्पताल आ चुके हैं। रोजाना 1 से 2 नए मरीज सामने आ रहे हैं। कुछ मामलों में संक्रमण इतना बढ़ गया कि प्रभावित हिस्से की खराब त्वचा और मांस निकालना पड़ा। ब्यावरा के एक मरीज का संक्रमण बढ़ने पर पैर का पूरा पंजा काटना पड़ा। जिला अस्पताल के हड्डी रोग सर्जन डॉ. अभिषेक सिलोदिया के मुताबिक, यह संक्रमण त्वचा और उसके नीचे के ऊतकों में फैलता है। इसकी शुरुआत कई बार मामूली चोट, कट, खुजली या सूजन से होती है। शुरुआत में इसे सामान्य चोट समझकर नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन संक्रमण बढ़ने पर स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। मामूली चोट से शुरू होकर गंभीर हो रहा संक्रमण सेल्यूलाइटिस में शुरुआत प्रभावित हिस्से पर लालपन, सूजन और दर्द से होती है। इसके बाद अंदर पकाव और मवाद बनने लगता है। संक्रमण बढ़ने पर त्वचा का रंग बदल सकता है और ऊतक खराब होने लगते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ मरीजों में संक्रमण इतनी तेजी से बढ़ता है कि कुछ ही घंटों में प्रभावित हिस्से की स्थिति बदल जाती है। गंभीर मामलों में खराब हो चुके ऊतक को निकालना पड़ता है। संक्रमण नियंत्रित नहीं होने पर अंग को बचाना भी मुश्किल हो सकता है। गिट्टी चुभी, धीरे-धीरे पैर ने काम करना बंद किया ब्यावरा निवासी मनोज पालीवाल (51) के पैर में गिट्टी चुभने से यह समस्या शुरू हुई थी। परिवार के मुताबिक शुरुआत में चोट मामूली लग रही थी। बाद में पैर में सूजन बढ़ती गई और घाव से मवाद व खून निकलने लगा। धीरे-धीरे पैर का रंग लाल से नीला और फिर काला-हरा होने लगा। संक्रमण बढ़ने के बाद पैर के प्रभावित हिस्से में गंभीर नुकसान हो गया। जब मनोज को राजगढ़ जिला अस्पताल लाया गया, तब संक्रमण काफी फैल चुका था। संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकने के लिए डॉक्टरों को पैर का पूरा पंजा काटना पड़ा। फिलहाल उनका इलाज जिला अस्पताल में जारी है और उनके भाई दिलीप पालीवाल उनकी देखभाल कर रहे हैं। दीवार से टकराया हाथ, अंदर बन गया संक्रमण मोर पीपली निवासी इंदु सिंह (50) का हाथ करीब आठ दिन पहले दीवार से टकराया था। चोट के बाद कोहनी के नीचे सूजन आई। कुछ समय बाद हाथ की त्वचा लाल होने लगी और अंदर पकाव बढ़ गया। अस्पताल पहुंचने पर जांच में सेल्यूलाइटिस संक्रमण सामने आया। प्रभावित हिस्से में चीरा लगाने पर अंदर से बदबूदार पानी निकला। फिलहाल अस्पताल में उनका उपचार और ड्रेसिंग चल रही है। गिरने के बाद हाथ की खराब त्वचा निकालनी पड़ी शेलापानी निवासी देवकरण वर्मा कुछ दिन पहले फिसलकर गिर गए थे। हाथ में चोट लगने के बाद सूजन आई। इसके बाद संक्रमण बढ़ता गया। स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टरों को हाथ की खराब हो चुकी त्वचा निकालनी पड़ी। अब संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए उनका उपचार और नियमित ड्रेसिंग की जा रही है। बाथरूम में गिरने के बाद पैर काला-नीला पड़ा पाटक्या निवासी 70 वर्षीय डूंगर सिंह बाथरूम में फिसलकर गिर गए थे। पैर में चोट लगने के बाद सूजन आई, लेकिन धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ता गया। पैर का रंग काला-नीला पड़ गया और घाव से पानी निकलने लगा। परिजन के मुताबिक, घाव से तेज बदबू आने लगी थी। पहले स्थानीय स्तर पर उपचार कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उन्हें राजगढ़ जिला अस्पताल लाया गया। यहां खराब हो चुकी त्वचा निकालकर रोज ड्रेसिंग की जा रही है। खुजली से घाव बना, फिर संक्रमण फैल गया मालीपुर निवासी करण सिंह सौंधिया (65) के पैर में शुरुआत में तेज खुजली हुई थी। लगातार खुजली करने से त्वचा पर घाव बन गया। बाद में उसी स्थान पर संक्रमण फैल गया और उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इन मरीजों के मामलों में शुरुआती वजह अलग-अलग रही, लेकिन संक्रमण बढ़ने के बाद सभी को गंभीर उपचार की जरूरत पड़ी। डॉक्टर बोले- लालपन और सूजन को नजरअंदाज न करें डॉ. अभिषेक सिलोदिया के मुताबिक, सेल्यूलाइटिस बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। चोट, कट, घाव या त्वचा में बनी किसी दरार के जरिए बैक्टीरिया अंदर पहुंच सकता है। शुरुआत में प्रभावित हिस्से पर लालपन, सूजन और दर्द दिखाई देता है। इसके बाद पकाव और मवाद बनने लगता है। संक्रमण बढ़ने पर बदबूदार पानी निकल सकता है और त्वचा के नीचे के ऊतक खराब होने लगते हैं। डॉक्टर के अनुसार कुछ मरीजों में संक्रमण की रफ्तार काफी तेज होती है। सामान्य तौर पर कुछ दिनों में स्थिति गंभीर रूप ले सकती है, खासकर जब शुरुआती लक्षणों के बावजूद उपचार नहीं लिया जाता। डायबिटीज और कमजोरी वाले मरीजों में ज्यादा खतरा डॉ. सिलोदिया के अनुसार डायबिटीज, बीपी और कमजोरी वाले मरीजों में संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे मरीजों में संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे उपचार भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। स्थानीय स्तर पर इस तरह के संक्रमण को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है, लेकिन चिकित्सकीय रूप से इसे सेल्यूलाइटिस कहा जाता है। उपचार में एंटीबायोटिक से लेकर खराब ऊतक निकालने तक की जरूरत मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर एंटीबायोटिक, इंजेक्शन और दर्द की दवाएं देते हैं। संक्रमित हिस्से की नियमित ड्रेसिंग की जाती है। जहां ऊतक या मांस खराब हो चुका होता है, उसे निकालना पड़ता है। संक्रमण की स्थिति का पता लगाने के लिए सीबीसी, सीआरपी सहित जरूरी रक्त जांच भी कराई जाती हैं। गंभीर मामलों में संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं डॉक्टरों के मुताबिक चोट या खुजली के बाद अगर प्रभावित हिस्से में सूजन लगातार बढ़ रही हो, लालपन फैल रहा हो, दर्द बढ़ रहा हो, मवाद या पानी निकल रहा हो, बदबू आने लगे या त्वचा का रंग बदलने लगे, तो इसे सामान्य चोट समझकर नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। घर पर घाव को दबाने, काटने या बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लगाने से बचना चाहिए। रोज सामने आ रहे नए मरीज राजगढ़ जिला अस्पताल में 40 से ज्यादा मरीजों का इलाज सेल्यूलाइटिस के लिए किया जा चुका है और फिलहाल रोजाना 1-2 नए मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों के मामलों से साफ है कि कई बार संक्रमण की शुरुआत मामूली चोट या खुजली से हुई, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर हो गई। ब्यावरा के मनोज पालीवाल का मामला इसका गंभीर उदाहरण है, जहां संक्रमण बढ़ने के बाद उनका पंजा काटना पड़ा। डॉक्टरों की सलाह है कि चोट, कट, सूजन या त्वचा में संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर समय रहते उपचार लिया जाए।

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