यूरोप में कारोबार पर नियमों का भारी बोझ, Piyush Goyal ने The Hague में जताई चिंता

यूरोप में कारोबार पर नियमों का भारी बोझ, Piyush Goyal ने The Hague में जताई चिंता

(राजेश राय)
हेग, 26 अक्टूबर वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को यूरोप द्वारा व्यवसायों पर बढ़ते नियामकीय बोझ को लेकर चिंता जताई, जबकि नीदरलैंड के व्यापार मंत्री सोर्ड सोर्ड्समा ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) की कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबीएएम) एक जरूरी उपाय है। गोयल ने कहा कि यूरोप व्यवसायों पर विनियामक बोझ बढ़ा रहा है, जबकि उद्योग जगत को सरल प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत नियमों को सरल बनाकर कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहा है।

उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, दुर्भाग्य से, आपको इस मामले में हमसे एक-दो सबक सीखने की जरूरत है। वाणिज्य मंत्री ने आगे कहा, ‘‘चूंकि यूरोप व्यवसायों पर विनियामक बोझ बढ़ा रहा है, मैं आपको बता दूं कि जब भी मैं यह बात कहता हूं, तो मैं आपके देशों की कंपनियों का चहेता बन जाता हूं… ऐसे कई अवसर आए हैं जब मैंने यूरोपीय आयोग के स्तर पर और कई यूरोपीय देशों में भारी विनियामक अतिरिक्त बोझ के बारे में बात की है।’’
मंत्री यहां भारत-नीदरलैंड व्यवसायी मंच को संबोधित कर रहे थे। वह दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर यहां आए हैं।

नीदरलैंड यूरोपीय संघ (ईयू) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है, जिसके साथ भारत ने एक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है। इसके दिसंबर में हस्ताक्षरित होने और अगले साल मार्च-अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। गोयल ने कहा, दुनिया अधिक स्वतंत्रता चाहती है… कारोबारी दुनिया कम अनुपालन, सरल प्रक्रियाओं, सरल कार्यप्रणाली और कम कागजी कार्रवाई चाहती है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में सरकार हमेशा कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए उद्योग जगत से सुझाव मांगती है। भारत ने कई मौकों पर सीबीएएम और वनों की कटाई जैसे कई यूरोपीय संघ के नियमों पर चिंता जताई है। इस मौके पर नीदरलैंड के व्यापार मंत्री सोर्ड सोर्ड्समा ने कहा कि उन्हें सीबीएएम के किसी भी नए समझौते की उम्मीद नहीं है, और उन्होंने इसे एक आवश्यक उपाय बताया।

उन्होंने हालांकि कहा कि नीदरलैंड छोटे और मझोले उद्यमों (एमएमई) को नियमों को समझने और अनुपालन को आसान बनाने में मदद कर रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या यूरोपीय संघ (ईयू) सीबीएएम पर पुनर्विचार करेगा क्योंकि इससे आयात महंगा हो जाएगा, उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मुझे नहीं लगता कि सीबीएएम पर कोई नया समझौता होगा क्योंकि हम इसे यह सुनिश्चित करने के लिए एक जरूरी उपाय के रूप में देखते हैं कि हम उन लक्ष्यों पर टिके रहें जिन पर पूरी दुनिया ने सहमति जताई है, यानी पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्य। उन्होंने पत्रकारों से कहा, हम मानते हैं कि न केवल हमें बल्कि पूरी दुनिया को इन लक्ष्यों का पालन करना चाहिए।

ईयू का सीबीएएम लोहा और इस्पात, एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक, बिजली और हाइड्रोजन सहित कुछ कार्बन-सघन वस्तुओं के आयात पर कार्बन कर लगाने के लिए तैयार किया गया है। भारतीय वाणिज्य मंत्री ने 22-27 अक्टूबर तक अपने छह दिवसीय दौरे के दौरान जर्मनी और नीदरलैंड का दौरा किया। वह 100 सदस्यीय व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे।

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