यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) के बीच हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। दोनों पक्षों की तरफ से लगातार एक-दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं। तनाव बढ़ता जा रहा है और हमलों की वजह से दोनों पक्षों को नुकसान हो रहा है। इसी बीच ईरान (Iran) के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान (Masoud Pezeshkian) ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
“यमन में जो हो रहा है उसमें ईरान का नहीं है हाथ”
ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि यमन में जो कुछ भी हो रहा है उसमें ईरान का हाथ नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी अन्याय का शिकार है, ईरान उसके साथ एकजुटता से खड़ा है।
मदद का दिया प्रस्ताव
पेज़ेशकियान ने यह भी कहा कि हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब को बातचीत के ज़रिए मतभेदों को दूर करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने दोनों पक्षों के बीच विवाद को खत्म करने में ईरान की तरफ से मदद का भी प्रस्ताव दिया।
“एक भाई को अपने भाई से नहीं लड़ना चाहिए”
ईरानी राष्ट्रपति ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान युद्ध भड़काने वाला नहीं बनेगा। इस टिप्पणी से पेज़ेशकियान ने उन देशों पर भी निशाना साधा हो युद्ध भड़काने का काम करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एक भाई (हूती) को अपने ही भाई (सऊदी अरब) से नहीं लड़ना चाहिए। पेज़ेशकियान ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि दोनों पक्ष मुस्लिम हैं और ईरानी राष्ट्रपति कई बार मुस्लिम एकता की बात कह चुके हैं।
हूतियों और सऊदी अरब के बीच विवाद की क्या है वजह?
यमन में संघर्ष 2014 के आखिर में तब शुरू हुआ जब हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। हूतियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ यमन की सेना को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है। हालांकि इसके बावजूद ईरान हूतियों और सऊदी अरब के बीच जंग का समर्थन नहीं करता।


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