RSS Chief Mohan Bhagwat during Independence day:देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर जहां प्रधानमंत्री ने ध्वजारोहण किया, वहीं RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में झंडा फहराया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए हम सबको अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी। देश को एक ऐसा राष्ट्र बनाना है, जो पूरी मानवता के लिए सार्थक योगदान दे।
संघ प्रमुख ने कहा, ‘हमारा राष्ट्र स्वतंत्र हो गया, यह स्वतंत्र रहेगा, लेकिन हमें इस राष्ट्र को सुखी, संपन्न और सुरक्षित बनाना है। भारत को विश्व में योगदान देने वाला राष्ट्र बनाना है। ऐसे में हमारे सामने बहुत चुनौतियां हैं, जिनका हमें सामना करना है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘कई उल्टे विचार वाले लोग भी हैं, लेकिन हमें मूल सिद्धांतों से जुड़े रहते हुए इन चुनौतियों का सामना करना होगा और भारत को विश्व गुरु बनाना होगा। हमारा कर्तव्य है कि हम भारत को एक ऐसा देश बनाएं, जो पूरी मानवता को सार्थक योगदान दे।’
‘त्याग और बलिदान का गौरव हमारे मन में है’
मोहन भागवत ने कहा, ‘स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए गौरव और उत्सव का विषय है। 1857 से गिनेंगे तो लगातार 90 वर्ष अनेक प्रकार का त्याग-बलिदान देकर हमारे पूर्वजों ने स्वतंत्रता की प्राप्ति की। उस त्याग और बलिदान का गौरव हमारे मन में है। लेकिन इसके साथ यह भान मन में होना चाहिए कि इतना त्याग-परिश्रम करके स्वतंत्रता हमको मिली है, उस स्वतंत्रता को कायम रखना है और जैसा सावरकर जी ने कहा है – ‘जे जे उत्तम, उदात्त, उन्नत, महन्मधुर ते ते। स्वतंत्रते भगवती, सर्व तव सहचारी होते’, तो स्वतंत्रता का परिणाम जो-जो उत्तम, उदात्त, उन्नत, महन्मधुर है, वह सब कुछ हमारे देश में अवतीर्ण हो। इसकी आवश्यकता पूर्ण करने का दायित्व भी हमारा बनता है।’
‘युवाओं को नहीं संभाला तो वे बोझ बन जाएंगे’
मोहन भागवत ने युवाओं को डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसांख्यिकीय लाभांश) बताते हुए कहा कि यदि उन्हें सही ढंग से संभाला गया तो हमें फायदा होगा, वरना वे समाज के लिए बोझ बन जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि देश में अलग-अलग विचार होना लोकतंत्र की पहचान है। कभी-कभी विरोध ज़रूरी भी होता है। जनता के हित से जुड़े सवाल हैं, तो उन्हें मज़बूती के साथ उठाया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा करते समय अपनी ज़िम्मेदारियों का भी ध्यान रखना चाहिए।


