Sonu Nigam interview: सोनू निगम ने म्यूजिक इंडस्ट्री में ऑटो-ट्यून के बढ़ते इस्तेमाल पर खुलकर बात की है। उन्होंने माना कि वो भी अपने कुछ गानों में इस टेक्नोलॉजी की मदद लेते हैं। हालांकि, सिंगर का कहना है कि ऑटो-ट्यून का इस्तेमाल किसी ऐसे व्यक्ति की आवाज को ठीक करने के लिए नहीं होना चाहिए, जो असल में गा ही नहीं सकता।
ऑटो-ट्यून के यूज पर सोनू निगम का बयान
कोमल नाहटा की ‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ में बातचीत के दौरान सोनू निगम ने बताया कि ऑटो-ट्यून ने म्यूजिक रिकॉर्डिंग और प्रोडक्शन का तरीका काफी बदल दिया है। वो इस टेक्नोलॉजी की आलोचना करने के बजाय इसे आधुनिक म्यूजिक मेकिंग का हिस्सा मानते हैं। इस पर सोनू ने कहा कि ऑटो-ट्यून को लेकर लोग भले ही बहुत कुछ कहते हों, लेकिन उनके मुताबिक इस तकनीक से म्यूजिक इंडस्ट्री में कुछ अच्छे बदलाव भी आए हैं।
उन्होंने खुद के गानों का उदाहरण देते हुए माना, “मैं अपने कुछ गानों में ऑटो-ट्यून इस्तेमाल करता हूं।” उनके मुताबिक आज की रिकॉर्डिंग पहले के मुकाबले काफी ज्यादा डिजिटल और कंट्रोल में हो गई है।
लाइव रिकॉर्डिंग और आज के डिजिटल म्यूजिक में डिफरेंस
सोनू निगम ने पुराने दौर की रिकॉर्डिंग को याद करते हुए बताया कि पहले सिंगर्स लाइव ऑर्केस्ट्रा और म्यूजिशियंस के साथ रिकॉर्ड करते थे। उस समय सारंगी और स्ट्रिंग्स जैसे इंस्ट्रूमेंट्स लाइव बजते थे, इसलिए हर चीज बिल्कुल एक जैसी और परफेक्ट नहीं होती थी। अब ज्यादातर चीजें डिजिटल तरीके से तैयार की जाती हैं। ऐसे में वोकल को भी म्यूजिक के बाकी हिस्सों के साथ बिल्कुल सटीक तरीके से फिट करना पड़ता है।
बता दें, सोनू निगम के मुताबिक, यही वजह है कि आज पिच-करेक्शन जैसे टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा है। हालांकि, उनका मानना है कि इनका काम पहले से अच्छी परफॉर्मेंस को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि किसी कमजोर गायकी को छिपाना।
‘आप 99% देते हैं, ऑटो-ट्यून से 100% तक ले आते हैं’
सोनू निगम ने ऑटो-ट्यून के यूज को लेकर अपनी सीमा भी साफ कर दी। उन्होंने कहा कि अगर कोई सिंगर अपनी तरफ से अच्छी परफॉर्मेंस देता है, तो टेक्नोलॉजी उसमें मामूली सुधार कर सकती है। साथ ही, उन्होंने इसी बात को समझाते हुए कहा, “आप अपना 99% देते हैं और ऑटो-ट्यून से इसे 100% तक ले आते हैं”, लेकिन उनका कहना है कि ऐसे व्यक्ति की आवाज को ठीक करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जो गा ही नहीं सकता। हालांकि, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि एक्टर्स को ऑटो-ट्यून की मदद लेने की वजह से प्रोफेशनल प्लेबैक सिंगर्स की जगह नहीं लेनी चाहिए।
सोनू ने बदली हुई म्यूजिक इंडस्ट्री पर रखी बात
सोनू की ये बातचीत ऐसे दौर में सामने आई है जब म्यूजिक प्रोडक्शन पहले के मुकाबले काफी ज्यादा डिजिटल हो चुका है। लाइव म्यूजिशियन और ऑर्केस्ट्रा से लेकर डिजिटल प्रोडक्शन और पिच-करेक्शन तक, रिकॉर्डिंग का तरीका काफी बदल गया है।
‘गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज’ में सोनू निगम ने इसी बदलाव, अपनी रिकॉर्डिंग प्रक्रिया और ऑटो-ट्यून जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर विस्तार से अपनी राय रखी।


