दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 12 अक्टूबर को राजधानी के अलग-अलग कॉलेजों की महिला छात्र प्रतिनिधियों के साथ महिलाओं की सुरक्षा, कैंपस की सुरक्षा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री जन सेवा सदन में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताओं और सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दिल्ली की बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के आस-पास कम रोशनी वाली जगहों को लेकर जताई गई चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, CM गुप्ता ने दिल्ली भर में लगभग एक लाख स्मार्ट स्ट्रीटलाइट लगाने की घोषणा की। इन्हें इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से जोड़ा जाएगा और इनका रखरखाव एक सालाना मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के तहत किया जाएगा, जिसमें खराब लाइटों की तुरंत मरम्मत की शर्त होगी। उन्होंने कहा कि कॉलेज परिसर के आस-पास जहां भी स्ट्रीटलाइट की ज़रूरत होगी, वहां स्थानीय एजेंसियों और कॉलेज प्रशासन के साथ मिलकर ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे।
शिकायतों के तुरंत समाधान के लिए, उन्होंने एक एक्टिव कम्युनिकेशन चैनल बनाने का आदेश दिया, जिसमें एक डेडिकेटेड WhatsApp ग्रुप भी शामिल होगा जो स्टूडेंट प्रतिनिधियों को सीधे एडमिनिस्ट्रेटिव और पुलिस अधिकारियों से जोड़ेगा। उन्होंने छात्रों को मुश्किल हालात में इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर 112 का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी। इस मीटिंग में लेडी श्रीराम (LSR) कॉलेज, गार्गी कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज (JMC), मैत्रेयी कॉलेज, अदिति महाविद्यालय, भारती कॉलेज और जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज जैसे इंस्टीट्यूशन के स्टूडेंट प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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छात्रों ने कई सुझाव दिए, जिनमें संवेदनशील जगहों का पूरी तरह से सुरक्षा ऑडिट करना, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाना, मुखर्जी नगर और सिरी फोर्ट रोड जैसे छात्र केंद्रों पर नियमित गश्त करना और आसानी से उपलब्ध ‘पिंक बूथ’ खोलना शामिल था। उन्होंने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सुधार की भी मांग की, खासकर ऑफ-कैंपस कॉलेजों के लिए बेहतर दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) और ‘यूनिवर्सिटी स्पेशल’ बस कनेक्टिविटी, तय जगहों पर नियमित स्टॉप, रेगुलेटेड ई-रिक्शा सर्विस और पेइंग गेस्ट आवासों के आसपास बेहतर सुरक्षा की मांग की। छात्रों ने ऐसे सुरक्षा उपायों के महत्व पर ज़ोर दिया जिनसे छात्राएं बिना किसी पाबंदी वाले कर्फ्यू के आज़ादी से घूम सकें और गतिविधियों में हिस्सा ले सकें।

