रतलाम। सफर लंबा था, लेकिन हौसला उससे भी बड़ा। एक तरफ गोद में एक माह का बच्चा, दूसरी तरफ गांव की जिम्मेदारियां…। अडवानिया की सरपंच जमुना मईडा जब गांव के काम के लिए भोपाल पहुंचीं तो उनके साथ उनका नन्हा बच्चा भी था। यह तस्वीर उनके उस समर्पण की कहानी कहती है, जिसमें उन्होंने नौकरी से ज्यादा गांव की सेवा को प्राथमिकता दी।
सैलाना विकासखंड की ग्राम पंचायत अडवानिया में कभी पेयजल के लिए ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ती थी। नल-जल योजना थी, लेकिन नलकूप की मोटर बार-बार जलने से व्यवस्था ठप हो जाती थी। महिलाओं को पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी।
300 घरों में पानी पहुंचाया, 100 रुपए जलकर भी लिया
सरपंच बनने के बाद जमुना ने तय किया कि गांव की इस समस्या को अब यूं ही नहीं रहने देंगी। उन्होंने दो नई मोटरें लगवाईं, पाइपलाइन की मरम्मत कराई और नल-जल योजना को दोबारा व्यवस्थित करवाया। नतीजा यह रहा कि आज 300 से अधिक घरों तक नल से पानी पहुंच रहा है। योजना के संचालन और रखरखाव के लिए प्रत्येक परिवार से 100 रुपए जलकर भी लिया जाता है। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की अध्यक्ष के रूप में जमुना इसकी व्यवस्था पर लगातार नजर रखती हैं।
गांव के लिए छोड़ दी नौकरी
जमुना ने विज्ञान विषय से 12वीं तक पढ़ाई की और इसके बाद नर्सिंग तथा बीएड किया। नर्सिंग में नौकरी मिली तो करियर बनाने का मौका भी था, लेकिन गांव के लोगों के आग्रह और पंचायत की जिम्मेदारी को देखते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ दी। अब परिवार, बच्चों और खेती के साथ पंचायत का काम संभाल रही हैं। सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने से लेकर अधिकारियों से मिलने तक वे खुद सक्रिय रहती हैं।
जरूरत पद बड़े की नहीं जिम्मेदारी उठाने की
अडवानिया को सिर्फ पानी की समस्या से मुक्त करना ही उनका लक्ष्य नहीं है। वे जल संरक्षण, वृक्षारोपण, बाल विवाह रोकने और बेटियों की शिक्षा के लिए भी ग्रामीणों को जागरूक कर रही हैं। जमुना का कहना है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े पद या बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती जरूरत होती है तो बस जिम्मेदारी उठाने और उसे निभाने के हौसले की।
जमुना की पहल, गांव का बदलाव
नल-जल योजना- 300 से अधिक घरों तक पानी
नई मोटरें- 2 मोटर लगवाकर व्यवस्था सुधारी
जलकर- प्रति परिवार 100 रुपए
नौकरी- गांव की सेवा के लिए छोड़ी
अभियान-जल संरक्षण, वृक्षारोपण, बाल विवाह रोकना और बेटियों की शिक्षा

