Maharashtra Auto-Taxi Driver Marathi Language Rule: समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की बुनियादी जानकारी को अनिवार्य बनाने वाले नियम पर सवाल उठाए थे। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक और शिवसेना नेता संजय निरुपम ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। मंत्री सरनाइक ने कहा कि महाराष्ट्र ने दशकों से उत्तर भारतीयों को रोज़गार और सम्मान दिया है, इसलिए उत्तर प्रदेश चुनावों को ध्यान में रखकर इस मुद्दे पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
अखिलेश यादव को मंत्री सरनाईक का जवाब
अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए महराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप बाबूराव सरनाइक ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में दखल देने के बजाय अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश की राजनीति और वहां होने वाले आगामी चुनावों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र हमेशा से संस्कृति, पहचान और सम्मान को प्राथमिकता देने वाला राज्य रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले 40 से 50 वर्षों में, जब उत्तर भारत के युवाओं को पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिल पाए, तो महाराष्ट्र ने उन्हें अपनाया और नौकरी दी, साथ ही उन्हें भाइयों जैसा सम्मान दिया।
मंत्री सरनाइक ने आगे कहा कि महायुति सरकार रोजगार देने वाली सरकार है, न कि रोजगार छीनने वाली। अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और उनके पिता दोनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन अपने कार्यकाल के दौरान स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त नौकरियां पैदा करने में विफल रहे, जिससे कई लोगों को महाराष्ट्र पलायन करना पड़ा।
मराठी सीखने के लिए ड्राइवरों को दिया गया पर्याप्त समय -मंत्री
मंत्री सरनाईक ने बताया कि राज्य भर में 180 स्थानों पर लगभग 1,600 से 1,800 ड्राइवरों को मराठी भाषा का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे यात्रियों के साथ बुनियादी जानकारी का आदान-प्रदान कर सकें। सरकार का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ड्राइवर महाराष्ट्र की पहचान और संस्कृति का सम्मान करें। ड्राइवरों को भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है, लेकिन जो लोग जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
हम जिंदा हैं, अपनी चिंता करें अखिलेश: संजय निरुपम
वहीं, शिवसेना नेता संजय निरुपम ने अखिलेश यादव के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “अखिलेश यादव जी को मैं समझाना चाहूंगा कि मुंबई में जो उत्तर भारतीय और यूपी-बिहार के लोग रहते हैं, उनके साथ जुड़कर के हम खुद दिन-रात काम करते हैं। हम अभी जिंदा हैं, हम मरे नहीं हैं। आपको अगर चिंता करनी है तो यूपी में जो आपके लोग रहते हैं उनकी चिंता करिए। यहां के लोगों की चिंता हम करते हैं और इनके लिए हमेशा लड़ाई लड़ते हैं और इनको न्याय भी दिलाते हैं।
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के कानूनी प्रावधानों का जिक्र करते हुए संजय निरुपम ने बताया कि इस पुराने कानून के तहत, पब्लिक ट्रांसपोर्ट लाइसेंस और परमिट पाने के लिए स्थानीय भाषा की जानकारी होना जरूरी है। यह नियम देश के दूसरे राज्यों में भी लागू है, जिनमें तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम शामिल हैं। इसलिए, इस नियम को ठीक से लागू करने की महाराष्ट्र सरकार की कोशिशों को असंवैधानिक या गैर-कानूनी बताना पूरी तरह गलत और गुमराह करने वाला है।
अखिलेश यादव ने क्या कहा था?
इससे पहले, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा बयान जारी कर महाराष्ट्र सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया था। अखिलेश यादव ने कहा था कि भले ही हर राज्य की मातृभाषा सम्मान के लायक है, लेकिन देश की एकता में दरार डालने के लिए भाषा का राजनीतिकरण करना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाषा की जानकारी की अनिवार्य शर्त के आधार पर किसी को देश में कहीं भी कारोबार करने के संवैधानिक अधिकार से कैसे वंचित किया जा सकता है।
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि रोजगार देने में नाकाम रहने के बाद, सरकार उन गरीब ऑटो-रिक्शा चालकों को निशाना बना रही है जो ईमानदारी से अपनी आजीविका कमाते हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की सीखने की क्षमता अलग-अलग होती है और अगर ड्राइवर मानसिक तनाव में गाड़ी चलाते हैं, तो यह सभी के लिए खतरनाक हो सकता है।

