राजद नेता और सांसद सुधाकर सिंह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग के भीतर अहम फैसलों पर सामने आ रहे मतभेद अब सिर्फ सवाल नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। सांसद सुधाकर सिंह ने बताया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार अहम फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनके मुताबिक, ये आपत्तियां स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी आंकड़ों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों से जुड़ी हैं। ”पारदर्शिता के साथ स्थिति साफ होनी चाहिए” निर्वाचन आयोग ने SIR को लेकर आधिकारिक आदेश और मतदाता सेवाओं की व्यवस्था जारी की है। सुधाकर सिंह ने कहा कि जब चुनाव आयोग के भीतर ही फैसलों को लेकर बार-बार मतभेद सामने आ रहे हैं, तो देश के सामने पारदर्शिता के साथ स्थिति साफ होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अहम फैसलों के पीछे क्या व्यवस्था और प्रक्रिया काम कर रही है। साफ और ठोस जवाब मिलना चाहिए – सांसद उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनावी प्रक्रिया किसी बंद कमरे का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही। सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवालों का गोलमोल नहीं, बल्कि साफ और ठोस जवाब मिलना चाहिए। राजद नेता और सांसद सुधाकर सिंह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग के भीतर अहम फैसलों पर सामने आ रहे मतभेद अब सिर्फ सवाल नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। सांसद सुधाकर सिंह ने बताया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार अहम फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनके मुताबिक, ये आपत्तियां स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी आंकड़ों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों से जुड़ी हैं। ”पारदर्शिता के साथ स्थिति साफ होनी चाहिए” निर्वाचन आयोग ने SIR को लेकर आधिकारिक आदेश और मतदाता सेवाओं की व्यवस्था जारी की है। सुधाकर सिंह ने कहा कि जब चुनाव आयोग के भीतर ही फैसलों को लेकर बार-बार मतभेद सामने आ रहे हैं, तो देश के सामने पारदर्शिता के साथ स्थिति साफ होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अहम फैसलों के पीछे क्या व्यवस्था और प्रक्रिया काम कर रही है। साफ और ठोस जवाब मिलना चाहिए – सांसद उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनावी प्रक्रिया किसी बंद कमरे का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही। सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवालों का गोलमोल नहीं, बल्कि साफ और ठोस जवाब मिलना चाहिए।

