टीबी मरीजों को समय पर दवा खिलाने, उनका फॉलोअप कराने और परिवार के सदस्यों की जांच कराने के लिए घर-घर पहुंच रहे डॉट्स प्रोवाइडर्स खुद आर्थिक संकट में हैं। किसी को 10 महीने से मानदेय नहीं मिला है तो कोई मार्च 2025 से भुगतान का इंतजार कर रहा है। हर बार पूछने पर बजट नहीं होने का हवाला देकर जल्द भुगतान का आश्वासन दिया जा रहा है। अब स्थिति यह है कि किसी को बच्चों की फीस भरने में परेशानी हो रही है तो किसी के लिए घर का किराया और रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कई डॉट्स प्रोवाइडर्स उधार लेकर परिवार चला रहे हैं। अपने घर का खर्च नहीं चला पा रहे डॉट्स प्रोवाइडर्स टीबी मरीजों के इलाज की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मरीजों के घर जाकर समय पर दवा देते हैं, फॉलोअप टेस्ट करवाते हैं, परिवार के सदस्यों की जांच करवाते हैं और मरीजों की आभा आईडी सहित जरूरी जानकारी अपडेट करते हैं। इसके बावजूद उन्हें लंबे समय से मानदेय नहीं मिला है। कोलार सीएससी से जुड़ी पुष्पा सिंह बघेल ने बताया कि वे 2023 से डॉट्स प्रोवाइडर के रूप में काम कर रही हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने यह काम शुरू किया था। उनका कहना है कि मार्च 2025 से अब तक भुगतान नहीं मिला है। पुष्पा ने कहा कि बार-बार पूछने पर यही जवाब मिलता है कि “बजट नहीं है, भुगतान आ जाएगा। बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहे, उधार लेकर घर चला रहे एक महिला डॉट्स प्रोवाइडर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मरीजों की जांच और दवा का काम समय पर करने के बावजूद मानदेय समय पर नहीं मिल रहा। इसका सीधा असर परिवार पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों की फीस तक भरना मुश्किल हो गया है और घर का खर्च चलाने के लिए लोगों से उधार लेना पड़ रहा है। स्टूडेंट बोली- किराया, पढ़ाई और खर्च संभालना मुश्किल अशोका गार्डन क्षेत्र के पंजाबी बाग डिस्पेंसरी से जुड़ी डॉट्स प्रोवाइडर दिव्या पिछले करीब एक साल से यह काम कर रही हैं। वे छात्रा भी हैं। उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पढ़ाई के साथ डॉट्स प्रोवाइडर का काम शुरू किया था, लेकिन पिछले करीब एक साल से भुगतान नहीं मिला। दिव्या के मुताबिक भोपाल जैसे शहर में किराए पर कमरा लेकर पढ़ाई करना, रोजमर्रा का खर्च चलाना और इसके साथ मरीजों के घर जाकर सेवा देना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि यदि मानदेय समय पर मिलता तो आर्थिक स्थिति संभालने में मदद मिलती। गर्मी-बारिश में सेवा जारी, भुगतान के लिए इंतजार डॉट्स प्रोवाइडर्स का कहना है कि भुगतान नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने मरीजों की सेवा बंद नहीं की। गर्मी और बारिश में वे घर-घर जाकर मरीजों को दवा पहुंचाते हैं और फॉलोअप कराते हैं। मरीज अस्पताल नहीं आ सकता तो उसके घर से बलगम का नमूना लेकर जांच के लिए जमा कराने जैसे काम भी करते हैं। डॉट्स प्रोवाइडर्स ने 3 अगस्त 2026 को राज्य क्षय अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश को पत्र देकर लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान की मांग की है। पत्र में 10 से 11 महीने की प्रोत्साहन राशि लंबित होने की बात कही गई है।


