भोपाल जिला न्यायालय में 1.50 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग:सरकारी गवाहों के पेश न होने से अटके 18 हजार मामले

भोपाल जिला न्यायालय में 1.50 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग:सरकारी गवाहों के पेश न होने से अटके 18 हजार मामले

150 बार से ज्यादा तारीखें दी जा चुकीं, बार-बार समन और वारंट जारी होने के बाद भी अधिकारी कोर्ट नहीं आ रहे, अभियोजन के लिए चुनौती, कुछ केस 32 साल तक पुराने भोपाल जिला न्यायालय में 1.50 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। 20302 मामले सिर्फ गवाहों के पेश न होने की वजह से अटके हुए हैं। इनमें 90% यानी करीब 18 हजार केसों में सरकारी गवाह (पुलिस अधिकारी, डॉक्टर, फॉरेंसिक विशेषज्ञ) ​पेश नहीं हो रहे हैं। 1994 से लेकर अब तक के कई मामले सिर्फ गवाही पूरी न होने की वजह से धूल फांक रहे हैं। बार-बार समन और वारंट जारी होने के बावजूद अधिकारी कोर्ट से नदारद रहते हैं। इसका सीधा असर आम फरियादियों पर पड़ रहा है। सालों-साल चक्कर काटने के बाद भी उन्हें सिर्फ अगली तारीख मिलती है। जानकारों का कहना है कि जब तक सरकारी गवाहों की जवाबदेही तय नहीं होगी और कड़े नियम नहीं बनेंगे, पेंडेंसी का बोझ कम नहीं होगा। ये है वजह : किसी का ट्रांसफर हो जाता है तो कोई रिटायर हो जाता है, पते बदल जाते हैं
समन/नोटिस की तामील न होना, पता बदल जाना।
सरकारी कर्मचारी का ट्रांसफर/रिटायरमेंट होने से उसे पेश करना मुश्किल हो जाता है।
सरकारी कर्मचारी दूसरी जगह तैनात होने के कारण तारीख पर नहीं आ पाता।
दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं होने से भी गवाही टल सकती है। कई बार गवाह जान-बूझकर भी बचते हैं, क्योंकि पुराने मामले उन्हें ठीक से याद नहीं होते। लंबित केस केस 1 : 32 साल से अटका मामला
1994 में भोपाल में दर्ज हुआ धोखाधड़ी का मामला सरकारी गवाह के बयान न होने से पेंडिंग है। इसमें अशरफ हुसैन, अनिल कुमार और देवेंद्र जैन आरोपी बनाए गए थे। इस केस में अभी तक डेढ़ सौ से ज्यादा बार तारीख दी जा चुकी है। अशरफ और अनिल के खिलाफ 2006 में सीबीआई ने भी केस दर्ज किया। यह केस भी सरकारी गवाही न होने से पेंडिंग है। केस 2 : 100 से ज्यादा बार सुनवाई
ऐसा ही एक धोखाधड़ी का मामला वर्ष 2005 से लंबित है। 21 साल पुराने इस केस में अब तक 100 से अधिक बार सुनवाई हो चुकी है, लेकिन सरकारी गवाह के पेश नहीं होने के कारण मामले में फैसला नहीं हो सका। लंबा समय बीतने के बाद भी प्रकरण का निराकरण नहीं होने से इसकी सुनवाई और गवाह की पेशी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी कराएं, जुर्माना कर सकते हैं
कई सरकारी गवाहों का अन्य जगह ट्रांसफर हो जाता है, जिसके चलते वो उपस्थित नहीं हो पाते हैं। कोर्ट को इन गवाहों की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराना चाहिए। जो गवाह जान-बूझकर कोर्ट में गवाही के लिए पेश नहीं हो रहे हैं। उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जुर्माना लगाया जा सकता है। -दीपक अग्रवाल, रिटायर्ड जस्टिस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *