भारत से नदी जल बंटवारे पर बातचीत चाहता है बांग्लादेश, बोला- कूटनीति से सुलझेगा मुद्दा

भारत से नदी जल बंटवारे पर बातचीत चाहता है बांग्लादेश, बोला- कूटनीति से सुलझेगा मुद्दा

Bangladesh: भारत और बांग्लादेश के बीच साझा नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर एक बार फिर बातचीत की उम्मीद जगी है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि उनका देश भारत के साथ चर्चा और कूटनीति के जरिए जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों का समाधान चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि इन मामलों में अंतरराष्ट्रीय कानून की भूमिका को भी ध्यान में रखा जाएगा। दोनों देशों के बीच 54 साझा नदियां हैं, जबकि गंगा नदी के पानी के बंटवारे को लेकर 30 साल की संधि है, जिसकी अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है।

कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून का देंगे हवाला

बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अपने देश के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग (JRC) के माध्यम से भारत के साथ बैठकों के दौर को आगे बढ़ाना चाहता है। कबीर को उम्मीद है कि भारतीय पक्ष उनकी चिंताओं को ध्यान से सुनेगा और दोनों देशों की जनता की इच्छाओं के अनुरूप ही वार्ता का अगला चरण शुरू होगा।

54 साझा नदियां, लेकिन संधि केवल एक पर

भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां बहती हैं, जो दोनों देशों के कृषि, पर्यावरण और जनजीवन से सीधे तौर पर जुड़ी हैं। हालांकि, इनमें से केवल गंगा नदी के पानी के बंटवारे को लेकर ही 30 साल का औपचारिक समझौता अस्तित्व में है। दिसंबर 2026 में इस संधि की समय-सीमा पूरी होने के कारण अब या तो इसे आगे बढ़ाने या फिर एक नया ढांचा तैयार करने की जरूरत है।

भारत का रुख, ‘जन-केंद्रित और सकारात्मक सोच’

बांग्लादेश की इस उम्मीद से ठीक पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अपना रुख साफ किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत अपने पड़ोसी देश के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्यवादी संबंध बनाए रखने का समर्थक है। भारत का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य मकसद दोनों तरफ की जनता को सीधा आर्थिक और व्यावहारिक फायदा पहुंचाना है। गंगा जल संधि के नवीनीकरण को लेकर तकनीकी स्तर की वार्ताएं लगातार जारी हैं और संयुक्त नदी आयोग के जरिए सभी मुद्दों को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

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