दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को जब हॉस्ट्ल डेज की बिल्डिंग भरभराकर गिरी, उस वक्त अपने रूम में मौजूद छात्रों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ सेकेंड पहले तक छात्र अपने कमरों में थे, वे अचानक कई टन मलबे के नीचे दब गए। इसी मलबे में नितेश छिब और नीरज बावा भी फंसे थे। 19 साल के नितेश की जान लेंटर और मलबे के बीच बने एक छोटे से गैप ने बचाई। उसका चेहरा खाली जगह में आ गया था, इसलिए वह सांस ले पा रहा था और मदद के लिए आवाज भी लगा पा रहा था। दूसरी तरफ कुछ दूरी पर नीरज भी मलबे में फंसा था। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और कई गंभीर चोटें थीं। बिल्डिंग गिरने के वक्त नितेश और नीरज के साथ क्या हुआ था और मलबे में फंसने के बाद 3 से 4 घंटे कैसे बीते…दोनों की आपबीती उनके चचेरे भाई रोहित छिब से हुई बातचीत पर आधारित है। रोहित ने दैनिक भास्कर को जैसा बताया, हम उसी आधार पर पूरी घटना बता रहे हैं। नितेश ने नीरज से पूछा- भाई पानी की आवाज आ रही है क्या हॉस्टल गिरने के कुछ मिनट पहले नितेश और नीरज दूसरी मंजिल पर अपने-अपने कमरे में थे। नितेश रविवार को दोपहर 12:30 बजे खाना खाने के बाद अपने कमरे में आया था। तभी दीवारों की तरफ से पानी जैसी आवाज आने लगी। कुछ देर बाद आवाज तेज होने लगी। नितेश ने पास वाले कमरे में रहने वाले नीरज से पूछा कि क्या उसे भी पानी की आवाज सुनाई दे रही है। नीरज ने भी हां में जवाब दिया। इसके महज 2 सेकेंड बाद ही पूरी बिल्डिंग भरभराकर गिर गई। नितेश के मुताबिक, “मैं मलबे के नीचे फंस गया था। मेरे ऊपर लेंटर जैसा भारी मलबा गिरा था। मलबे और लेंटर के बीच एक गैप बन गया था। उसमें मेरा चेहरा फंस गया। इस वजह से मैं सांस ले पा रहा था। बोल भी पा रहा था। मेरे पैर मलबे में फंसे थे।” नीरज को आवाज दी तो बोला- ‘मुझे बहुत दर्द हो रहा है’ नितेश ने इसके बाद अपने दोस्त नीरज बावा को आवाज लगाई। नीरज ने जवाब दिया- “मुझे दर्द हो रहा है।” नितेश के मुताबिक, नीरज जिस जगह फंसा था, वहां मलबा ज्यादा था और धूल भी भरी हुई थी। उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी।” नितेश ने बताया, “मैंने मलबे के अंदर से लगातार मदद के लिए आवाज लगानी शुरू कर दी। कुछ देर बाद रेस्क्यू टीम मलबे के ऊपर पहुंची। मैंने टीम के लोगों को आपस में बात करते सुना। वे कह रहे थे कि दूसरी बिल्डिंग भी गिरने वाली है। मेरे लिए यह सुनना और डराने वाला था। मैं पहले ही मलबे के नीचे फंसा अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा था। मुझे डर था कि अगर दूसरी बिल्डिंग भी गिर गई तो मैं दोबारा नहीं बच पाऊंगा।” नीरज ने दोस्त को फोन किया- ‘भाई, मैं मर रहा हूं’ इस बीच नीरज ने अपने करीबी दोस्त वीर चतरथ को फोन लगाया। वीर ने दैनिक भास्कर को बताया कि दोपहर 1:45 बजे मुझे नीरज का फोन आया। कहा- ‘भाई, मैं मर रहा हूं।’ वीर ने बताया कि हम दोनों के बीच 5-6 बार फोन पर बात हुई। मैंने नीरज से उसकी लाइव लोकेशन भेजने को कहा। हमारी वॉटसऐप कॉल पर करीब 13 सेकेंड बात हुई। इसके बाद दोपहर 1:55 बजे नीरज ने अपनी लाइव लोकेशन भेजी। दोपहर 2:16 बजे मैंने दोबारा फोन किया, लेकिन इस बार कोई जवाब नहीं मिला। मैंने उसे आखिरी मैसेज भेजा था- ‘भाई, हिम्मत नहीं हारनी है तूझे।’ इसके बाद मैने और उसके दोस्तों ने नीरज को बचाने के लिए टीम बनाई। हम लोग घटनास्थल पर पर पहुंचे। पुलिस और NDRF की टीम भी रेस्क्यू में जुटी थी। करीब 3-4 घंटे बाद नीरज को मलबे से बाहर निकाला जा सका। नीरज को पहले प्राइमस अस्पताल ले जाया गया। वहां करीब 50 मिनट से एक घंटे तक इलाज चला। इसके बाद शाम करीब 6 बजे उसे AIIMS ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। AIIMS में रात करीब साढ़े 10 बजे उसकी सर्जरी शुरू हुई, जो रात करीब 1 बजे तक चली। नीरज की हालत गंभीर, एक सर्जरी हो चुकी; दूसरी की तैयारी नीरज की हालत बेहद गंभीर है। उसकी पीठ में गंभीर चोटें हैं। जांघ के ऊपरी हिस्से में भी गहरी चोट लगी है। पेट में भी गंभीर घाव है। एक सर्जरी हो चुकी है। डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं। शरीर में इंफेक्शन फैल चुका है और त्वचा काली पड़ चुकी है। एक और सर्जरी होगी। हादसे से पहले ‘कनक लता’ हॉस्टल की दीवारें भी दरकने लगी थीं, छात्राओं ने वीडियो बनाया हॉस्टल डेज के बगल वाले ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली दो छात्राएं अर्निका और मानसी ने हादसे से कुछ मिनट पहले अपने कमरे की दीवारों और छत पर आई दरारों का वीडियो बनाया था। वीडियो में कमरे की दीवारों पर लंबी और गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं। वीडियो में 20 साल की अर्निका को कहते सुना जा सकता है- ‘लगता है गिरने वाली है।’ हादसे से पहले ‘कनक लता’ हॉस्टल की दीवारें भी दरकने लगी थीं, छात्राओं ने वीडियो बनाया हॉस्टलडेज के ठीक पहले बगल की ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली दो छात्राएं अर्निका और मानसी ने हादसे से कुछ मिनट पहले अपने कमरे की दीवारों और छत पर आई दरारों का वीडियो बनाया था। वीडियो में कमरे की दीवारों पर लंबी और गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं। वीडियो में 20 साल की अर्निका को कहते सुना जा सकता है- ‘लगता है गिरने वाली है।’ हादसे के बाद की 3 तस्वीरें… —————————————- ये खबर भी पढ़ें… छात्र बोले- 10 मिनट पहले निकले, नहीं तो दबे होते: बिल्डिंग से दरकने की आवाजें आ रही थीं शुक्र है हम बच गए….यह कहना है, दिल्ली के सत्य निकेतन के हॉस्टल से कुछ देर पहले निकले छात्रों का। इनके मुताबिक, इमारत गिरने से कुछ देर पहले दीवारों से दरकने यानी क्रैक की आवाजें भी आ रही थीं। कुछ छात्रों ने बताया कि वे हादसे से महज 10-20 मिनट पहले ही बिल्डिंग से बाहर निकले थे। लौटे तो सबकुछ बिखर गया था। पूरी खबर पढ़ें…
‘भाई, मर रहा हूं’ मलबे में दबे नीरज का कॉल:दिल्ली बिल्डिंग हादसे में बचे 2 छात्रों की आपबीती, 4 घंटे बाद रेस्क्यू हुआ

