कांग्रेस ने ब्रिक्स (BRICS) में भारत के ज़्यादा मज़बूत और रणनीतिक नेतृत्व की मांग की है। पार्टी का कहना है कि भारत को इस मंच का इस्तेमाल ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के हितों को आगे बढ़ाने और एक ज़्यादा न्यायपूर्ण और संतुलित विश्व व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करने के लिए करना चाहिए। कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग ने नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर एक बयान जारी किया। इसमें समूह के लगातार विकास और वैश्विक घटनाक्रमों को आकार देने तथा ‘ग्लोबल साउथ’ की जायज़ आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के मंच के तौर पर इसके बढ़ते महत्व का स्वागत किया गया। बयान में कहा गया, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ब्रिक्स के लगातार विकास और वैश्विक घटनाक्रमों को आकार देने, ‘ग्लोबल साउथ’ की जायज़ आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने और सभी लोगों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करने वाले मंच के तौर पर इसके बढ़ते महत्व का स्वागत करती है।
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कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने एक्स पर यह बयान शेयर किया। बयान में कहा गया है कि भू-राजनीतिक बंटवारे, आर्थिक दबाव, सप्लाई-चेन की कमज़ोरियों, टकराव और जलवायु संकट के बीच, भारत को अपने ब्रिक्स (BRICS) सहयोगियों के साथ मिलकर एक ऐसी निष्पक्ष और संतुलित विश्व व्यवस्था बनानी चाहिए जो सभी लोगों को सुरक्षा, समृद्धि और सम्मान दे सके। इसमें कहा गया है कि भारत को ब्रिक्स को “नैतिक नेतृत्व और रणनीतिक स्पष्टता” देनी चाहिए, साथ ही नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संप्रभु समानता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मानवीय गरिमा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और अपने रणनीतिक व आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान अपनाई गई विदेश नीति का ज़िक्र किया और कहा कि भारत ने हमेशा रणनीतिक हितों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की व्यापक प्रतिबद्धता के साथ जोड़ने की कोशिश की है। पार्टी ने कोरियाई युद्ध, पश्चिम एशिया के मामले, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरोध, उपनिवेशवाद की समाप्ति और वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार के समर्थन में भारत के रुख को देश के नैतिक नेतृत्व के उदाहरण के तौर पर पेश किया। बयान में कहा गया, “जैसा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हमेशा करते थे, भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए ब्रिक्स को नैतिक नेतृत्व और रणनीतिक स्पष्टता देनी चाहिए।
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इसका मतलब है नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संप्रभु समानता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक उत्थान को प्राथमिकता देना।
इस बयान में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार पर भी निशाना साधा गया और कहा गया कि ‘ग्लोबल साउथ’ को मज़बूत आवाज़ देने के दावों के साथ-साथ ठोस कदम भी उठाए जाने चाहिए। इसमें कहा गया कि सरकार को भारत की कूटनीतिक जगह और रुतबे को फिर से हासिल करने के लिए काम करना चाहिए और ब्रिक्स (BRICS) सहयोगियों के बीच ज़्यादा भरोसा और नेतृत्व क्षमता दिखानी चाहिए। बयान में आगे कहा गया, “इसलिए बीजेपी सरकार को ‘ग्लोबल साउथ’ के सहयोगियों के बीच भरोसा फिर से कायम करने के लिए सोच-समझकर कदम उठाने चाहिए और यह दिखाना चाहिए कि संकट के समय में भी भारत एक भरोसेमंद और रचनात्मक सहयोगी बना हुआ है।” कांग्रेस ने आर्थिक चिंताओं का भी ज़िक्र किया और बताया कि ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी ग्लोबल मर्चेंडाइज़ ट्रेड (सामानों के वैश्विक व्यापार) में 19.6 प्रतिशत है, लेकिन इस समूह के साथ भारत का व्यापारिक संबंध काफ़ी असंतुलित है।

