बॉर्डर पर 15 सितंबर को आखिर क्या करने वाला है चीन? ताइवान की बढ़ी चिंता

बॉर्डर पर 15 सितंबर को आखिर क्या करने वाला है चीन? ताइवान की बढ़ी चिंता

China Border New Rules: चीन और ताइवान के बीच लंबे समय से तनाव बरकरार है। दोनों देश कई बार एक-दूसरे के आमने-सामने आ चुके हैं। बीच-बचाव के लिए कई बार अमेरिका आया है। इसी साल चीन दौरे पर आए ट्रंप ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति सी-जिनपिंग से बात की थी। तब मामला थोड़ा नरम दिखा था। लेकिन अब दोनों देशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है।

वजह है चीन के नए बॉर्डर नियम। ये नियम 15 सितंबर से लागू होने वाले हैं। ताइवान को डर है कि इन बदलावों का असर चीन जाने वाले उसके नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसी वजह से ताइवान ने यात्रियों और ट्रैवल एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। एजेंसियों को अब चीन जाने वाले ग्रुप्स की जानकारी और सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाने होंगे।

15 सितंबर से चीन में क्या बदलेगा?

‘द ताइपे टाइम्स’ के मुताबिक, चीन 15 सितंबर को नए बॉर्डर नियम लागू करने की तैयारी में है। इन नियमों का मकसद सीमा पार लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करना है। इसी को लेकर ताइवान की मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल ने चिंता जताई है। काउंसिल का कहना है कि नए बदलावों के बाद चीन जाने वाले कुछ ताइवानी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा का जोखिम बढ़ सकता है।

खास तौर पर कमजोर या संवेदनशील माने जाने वाले लोगों को अपनी यात्रा पर दोबारा विचार करने की सलाह दी गई है। ताइवान ने अपने नागरिकों से यात्रा की जानकारी सरकार के रजिस्ट्रेशन सिस्टम में दर्ज करने की अपील भी की है।

ट्रैवल एजेंसियों पर बढ़ी जिम्मेदारी

ताइवान के टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन ने ट्रैवल एजेंसियों को नए निर्देश दिए हैं। अब चीन जाने वाले हर ग्रुप के लिए एक चेकलिस्ट पूरी करनी होगी। इसमें यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। एजेंसियों को यात्रियों को चीन यात्रा के संभावित खतरों के बारे में साफ-साफ बताना होगा। उन्हें यात्रियों को सरकारी यात्रा पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने में भी मदद करनी होगी। ये नियम स्टडी टूर और एक्सचेंज प्रोग्राम पर भी लागू होंगे। खुद से आयोजित किए गए ग्रुप ट्रिप भी इसके दायरे में आएंगे। एजेंसियों को चीन से जुड़ी यात्रा सेवाओं की सांख्यिकीय जानकारी भी अधिकारियों को देनी होगी।

ताइवान-चीन विवाद की जड़ क्या है?

ताइवान और चीन के बीच विवाद काफी पुराना है। दरअसल चीन, ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। चीन का कहना है कि ताइवान उसका अविभाज्य अंग है। यह रुख चीन की राष्ट्रीय नीति का भी हिस्सा है। चीन अपने कानूनों और आधिकारिक बयानों में भी इस दावे को दोहराता रहा है।

दूसरी तरफ, ताइवान अपनी अलग सरकार चलाता है। वह खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र मानता है। उसके पास अपनी सेना और अर्थव्यवस्था भी है। वह व्यवहारिक रूप से अलग तरीके से काम करता है। इसी वजह से ताइवान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। अब चीन के नए बॉर्डर नियमों ने इस तनाव को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

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