बिहार में बाढ़, 20 लाख आबादी पानी में:मुंगेर-खगड़िया में 2 लाख लोग खा रहे सिर्फ सत्तू-चूड़ा; भागलपुर में शादी का सामान गंगा में बहा

बिहार में बाढ़, 20 लाख आबादी पानी में:मुंगेर-खगड़िया में 2 लाख लोग खा रहे सिर्फ सत्तू-चूड़ा; भागलपुर में शादी का सामान गंगा में बहा

गर्मी, धूप या बरसात, हमारा पूरा परिवार पॉलिथिन के नीचे ही जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। बारिश में शरीर भीग जाता है, फिर खुद के सूखने का इंतजार करते हैं। शाम होते ही ऐसा लगता है कि मच्छर शरीर नोंच खाएगा। खाने में सिर्फ चूड़ा-मिठ्ठा और सत्तू है। प्रशासन एक बार भी देखने नहीं आया। मुखिया कहता है, हमसे कुछ नहीं हो पाएगा, जहां जाना हो जाओ… मुंगेर के कृष्णानगर की रहने वाली संजू देवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपना दर्द बयां किया। दरअसल, बिहार में गंगा, गंडक और कोसी नदी उफान पर हैं। इन तीनों नदियों से बिहार के 20 से ज्यादा जिले बाढ़ की चपेट में है। अभी ये तीनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे वैशाली, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और बेगूसराय में हालत भयावह हो गया है। यहां के 50 से ज्यादा प्रखंडों के करीब 20 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित है और पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। गंगा का पानी सबसे ज्यादा कहां तबाही मचाती है? बाढ़ को लेकर फिलहाल किस जिले में क्या स्थिति हैं? लोगों का क्या कहना है? राहत बचाव के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है? पढ़िए रिपोर्ट… पहले गंगा से मिलने वाली 3 नदियों का कनेक्शन जानिए… अब गंगा से आई बाढ़ को जिलावाइज समझिए.. वैशाली: पानी घटा, लेकिन कटाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी वैशाली में गंगा और गंडक का पानी अब धीरे-धीरे नीचे जा रहा है। प्रशासन का कहना है, जिले में बाढ़ की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और सभी तटबंध सुरक्षित हैं। नदी के जलस्तर और तटबंधों पर लगातार नजर रखी जा रही है। गंडक नदी की हर घंटे मॉनिटरिंग हो रही है और तटबंधों पर अधिकारी-कर्मचारी 24 घंटे तैनात हैं। संवेदनशील जगहों की ड्रोन से निगरानी की जा रही है। राघोपुर, देसरी, सहदेई बुजुर्ग और महनार में 45 सरकारी और निजी नावें चल रही हैं। अब तक 420 जरूरतमंद परिवारों को पॉलिथीन शीट दी गई है। राघोपुर, हाजीपुर, महनार और लालगंज में SDRF की टीमें भी तैनात हैं। प्रभावित इलाकों में मेडिकल और पशु चिकित्सा कैंप लगाए गए हैं। लेकिन, गंगा किनारे रहने वाले लोगों की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है। पानी कम होने के साथ कई जगह कटाव तेज हो गया है। किसान सियाराम राय ने बताया कि इस बार हालात पिछले साल से बिल्कुल अलग हैं। कुछ ही दिनों में करीब दो से तीन किलोमीटर जमीन गंगा में समा चुकी है। खेत-खलिहान खत्म हो गए हैं और अब घर भी खतरे में है। खगड़िया: पानी बढ़ा तो घर में घुस गया, अब एक नाव के सहारे पूरा इलाका खगड़िया में गंगा, कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक नदियों का असर अलग-अलग इलाकों में दिख रहा है। 30 अगस्त की शाम 6 बजे तक बागमती का जलस्तर 36.20 मीटर था, जो पिछले 12 घंटे में 5 सेंटीमीटर बढ़ा। कोसी का जलस्तर 34.62 मीटर रहा और इसमें 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। दूसरी ओर बूढ़ी गंडक 36.90 मीटर और गंगा 34.89 मीटर पर रही। दोनों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। परबत्ता प्रखंड की तमथा करारी पंचायत में पानी घरों तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के करीब 75 घरों में पानी घुस गया है। सड़कें डूब गई हैं और लोगों की आवाजाही के लिए सिर्फ एक नाव का सहारा है। घर के अंदर पानी और बाहर डूबी सड़क के बीच लोगों की जिंदगी खटिया और टांट के सहारे गुजर रही है। तमथा करारी पंचायत के रहने वाले मोहम्मद असलम ने बताया कि घर में पानी घुस गया है। घर की महिलाएं किसी तरह अंदर बैठी हुई हैं। पिछले 4-5 दिनों से घर में पानी है और लगातार जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। सरकार की तरफ से सिर्फ एक नाव मिली है। इतनी बड़ी आबादी के लिए एक नाव से बहुत परेशानी हो रही है। रात में खटिया-टांट के सहारे किसी तरह जिंदगी काट रहे हैं। करीब 75 घरों में पानी घुस चुका है। हम सरकार से यही मांग करते हैं कि बाढ़ प्रभावित लोगों को जरूरी सुविधाएं दी जाएं, ताकि हम लोगों को राहत मिल सके। मुंगेर: घर डूबे तो कोई छत पर है, कोई सड़क किनारे तंबू में मुंगेर में गंगा की बाढ़ ने कई इलाकों की जिंदगी बदल दी है। सदर मुंगेर, बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा, हवेली खड़गपुर और असरगंज प्रखंड बाढ़ प्रभावित हैं। इनमें सदर मुंगेर और बरियारपुर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। दोनों प्रखंडों की 10 से ज्यादा पंचायतों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है और करीब 20 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। हवेली खड़गपुर के कृष्णानगर गांव में 30 से ज्यादा घर पिछले पांच दिनों से पानी में डूबे हैं। कई घरों के ग्राउंड फ्लोर में 4-5 फीट पानी है। किसी ने दूसरी मंजिल पर सामान समेट लिया है तो कोई सड़क किनारे पॉलिथिन और तिरपाल के नीचे परिवार के साथ रहने को मजबूर है। तंबू के नीचे धूप रहने से बहुत गर्मी महसूस होती है कृष्णानगर की रहने वाली पूनम देवी ने बताया कि गंगा का पानी पांच दिन से घर में है। सड़क किनारे तंबू के नीचे बकरी सहित परिवार के साथ रह रही हूं। न तो कोई अधिकारी देखने आया है और न ही कोई उपाय किया गया है। घर में पानी और तंबू के नीचे धूप रहने से बहुत गर्मी महसूस होती है। बारिश के समय तेज हवा चलती है तो पॉलिथिन और तिरपाल भी उड़ जाते हैं। बारिश में भीग जाते हैं। प्रशासन की ओर से न सूखा राशन मिला है, न दवाई और न पॉलिथिन। अपने खर्च से किसी तरह जिंदगी कट रहे है। शौचालय नहीं, चापाकल डूबा; आधा किलोमीटर दूर से ला रहे पानी कृष्णानगर में बाढ़ की सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ घरों में पानी घुसना नहीं है। लोगों के सामने शौचालय और पीने के पानी की भी समस्या खड़ी हो गई है। कई घरों के चापाकल डूब चुके हैं। ग्रामीणों को आधा किलोमीटर दूर से पीने के पानी लाना पड़ रहा है। महिलाओं को शौच के लिए चार फीट पानी में उतरकर खुले में जाना पड़ रहा है। श्मशान घाट में पानी, बांध के पास करना पड़ रहा अंतिम संस्कार गंगा का जलस्तर वार्निंग लेवल से ऊपर रहने के कारण लाल दरवाजा के पास स्थित श्मशान घाट में पानी पहुंच गया है। इससे अंतिम संस्कार करने में परेशानी हो रही है। अब कई लोगों को बांध के समीप ही अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि जरूरत वाले इलाकों में नि:शुल्क नाव उपलब्ध कराई जा रही है। जिला आपदा पदाधिकारी कमल किशोर के अनुसार, बाढ़ और कटाव प्रभावित क्षेत्रों से शिकायत मिलने पर अधिकारियों को मौके पर भेजकर समस्या का समाधान कराया जा रहा है। भागलपुर: पानी से ज्यादा डर अब कटाव का, 12 घंटे में 8 घर गंगा में समाए भागलपुर में गंगा का कटाव इस समय सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। पुलिस जिला नवगछिया के राघोपुर में पिछले पांच दिनों से कटाव जारी है। वहीं, सबौर प्रखंड के इंग्लिश फरक्का में स्थिति और गंभीर है। यहां महज 12 घंटे के भीतर 8 घर गंगा में समा चुके हैं। ग्राउंड पर स्थिति देखने से पता चलता है कि गंगा की तेज धारा के सामने कटावरोधी काम कितना टिक पा रहा है। करीब 25 फीट गहरे पानी में बोरी के पैकेट डाले जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि तेज बहाव में ये भी बह जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते तैयारी होती तो कई घरों को बचाया जा सकता था। शनिवार की आधी रात संजू देवी का घर भी गंगा में समा गया। परिवार को घर का सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। घर के साथ राशन, कपड़े और जरूरी सामान भी नदी में चला गया। पांच कमरों का घर और आटा चक्की दोनों नदी में समाए ग्रामीण अंजना देवी ने कहा कि हम लोगों ने घर को कटते हुए देखा। हमारा भी घर यहां था। पांच कमरे थे, वह भी गंगा की भेंट चढ़ गया। एक आटा चक्की का मिल था, वह भी गंगा में चला गया। हर साल हम लोगों को यही दुख होता है। हर साल घर में कमर भर पानी घुस जाता है। हम लोग छत पर रहने को मजबूर होते हैं। विभाग ने पहले से तैयारी की होती तो आज यह कटाव की समस्या हम लोगों को नहीं झेलनी पड़ती। जो काम जल संसाधन विभाग की तरफ से कराया जा रहा है, वह नाकाफी है। इससे कुछ होने वाला नहीं है। दो महीने पहले बेटी की शादी की, अब घर का सामान गंगा में भागलपुर डीएम बोलीं- टॉप टीम मौके पर, काम में तेजी लाई जा रही DM अलंकृता पांडे ने बताया कि कटाव नियंत्रण को लेकर जल संसाधन विभाग की टॉप-मोस्ट टीम मौके पर मौजूद है। तकनीकी रूप से किन-किन बिंदुओं पर किस तरह के कार्य की आवश्यकता है, इसका आकलन विभाग के अभियंता कर रहे हैं। तटबंध पर जहां भी अतिक्रमण था, उसे हटवा दिया गया है और कार्य में किसी तरह का अवरोध नहीं है। काम को और मजबूत करने के लिए दूसरे जगहों से भी कार्यपालक अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति की गई है। बाहर से अतिरिक्त मजदूर और सामग्री मंगाकर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। राहत बचाव कार्य के तहत कम्युनिटी किचन भी चलाए जा रहे हैं और फिलहाल ऐसी कोई पैनिक स्थिति नहीं है। मैनपावर की कमी के लिए अतिरिक्त मैनपावर की व्यवस्था की जा रही है। बेगूसराय: दियारा इलाके के 20 से ज्यादा गांव पानी में गंगा का जलस्तर घटने से बेगूसराय के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली है। हालांकि, गंगा अभी भी खतरे के निशान 41.76 मीटर से 51 सेंटीमीटर ऊपर 42.27 मीटर पर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, जलस्तर में कमी जारी है, लेकिन इलाहाबाद, बनारस और बक्सर में पानी फिर बढ़ रहा है। ऐसे में संभावना है कि अगले दो दिनों के बाद बेगूसराय में भी गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है। जिले के बछवाड़ा, तेघड़ा, बरौनी, मटिहानी, बलिया और साहेबपुर कमाल के दियारा इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि पूरा शाम्हो प्रखंड बाढ़ की चपेट में है। बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र में भी बाढ़ का आंशिक असर है। अभी करीब 50 हजार लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। बलिया दियारा और शाम्हो को छोड़कर ज्यादातर जगहों पर सड़क से पानी उतर गया है। बलिया के चेचियाही ढाब में अब भी सड़क पर पानी जमा है। दियारा इलाके के 20 से ज्यादा गांवों पानी से घिरे हुए हैं। मटिहानी के छितरौर और सिहमा बबूलबन्ना टोला में भी लोगों की परेशानी बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी पूरी है। बिहार आपदा प्रबंधन के अधिकारी ने कहा कि “कटाव नियंत्रण को लेकर विभाग की टॉप-मोस्ट टीम हर जिले में मौके पर मौजूद है। बाढ़ की स्थिति में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर तैनात किया गया है। इनपुट: वैशाली से प्रेम, मुंगेर से चेतन झा, खगड़िया से गौतम कुमार, भागलपुर से अमरजीत और बेगूसराय से सुरेंद्र गर्मी, धूप या बरसात, हमारा पूरा परिवार पॉलिथिन के नीचे ही जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। बारिश में शरीर भीग जाता है, फिर खुद के सूखने का इंतजार करते हैं। शाम होते ही ऐसा लगता है कि मच्छर शरीर नोंच खाएगा। खाने में सिर्फ चूड़ा-मिठ्ठा और सत्तू है। प्रशासन एक बार भी देखने नहीं आया। मुखिया कहता है, हमसे कुछ नहीं हो पाएगा, जहां जाना हो जाओ… मुंगेर के कृष्णानगर की रहने वाली संजू देवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपना दर्द बयां किया। दरअसल, बिहार में गंगा, गंडक और कोसी नदी उफान पर हैं। इन तीनों नदियों से बिहार के 20 से ज्यादा जिले बाढ़ की चपेट में है। अभी ये तीनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे वैशाली, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और बेगूसराय में हालत भयावह हो गया है। यहां के 50 से ज्यादा प्रखंडों के करीब 20 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित है और पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। गंगा का पानी सबसे ज्यादा कहां तबाही मचाती है? बाढ़ को लेकर फिलहाल किस जिले में क्या स्थिति हैं? लोगों का क्या कहना है? राहत बचाव के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है? पढ़िए रिपोर्ट… पहले गंगा से मिलने वाली 3 नदियों का कनेक्शन जानिए… अब गंगा से आई बाढ़ को जिलावाइज समझिए.. वैशाली: पानी घटा, लेकिन कटाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी वैशाली में गंगा और गंडक का पानी अब धीरे-धीरे नीचे जा रहा है। प्रशासन का कहना है, जिले में बाढ़ की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और सभी तटबंध सुरक्षित हैं। नदी के जलस्तर और तटबंधों पर लगातार नजर रखी जा रही है। गंडक नदी की हर घंटे मॉनिटरिंग हो रही है और तटबंधों पर अधिकारी-कर्मचारी 24 घंटे तैनात हैं। संवेदनशील जगहों की ड्रोन से निगरानी की जा रही है। राघोपुर, देसरी, सहदेई बुजुर्ग और महनार में 45 सरकारी और निजी नावें चल रही हैं। अब तक 420 जरूरतमंद परिवारों को पॉलिथीन शीट दी गई है। राघोपुर, हाजीपुर, महनार और लालगंज में SDRF की टीमें भी तैनात हैं। प्रभावित इलाकों में मेडिकल और पशु चिकित्सा कैंप लगाए गए हैं। लेकिन, गंगा किनारे रहने वाले लोगों की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है। पानी कम होने के साथ कई जगह कटाव तेज हो गया है। किसान सियाराम राय ने बताया कि इस बार हालात पिछले साल से बिल्कुल अलग हैं। कुछ ही दिनों में करीब दो से तीन किलोमीटर जमीन गंगा में समा चुकी है। खेत-खलिहान खत्म हो गए हैं और अब घर भी खतरे में है। खगड़िया: पानी बढ़ा तो घर में घुस गया, अब एक नाव के सहारे पूरा इलाका खगड़िया में गंगा, कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक नदियों का असर अलग-अलग इलाकों में दिख रहा है। 30 अगस्त की शाम 6 बजे तक बागमती का जलस्तर 36.20 मीटर था, जो पिछले 12 घंटे में 5 सेंटीमीटर बढ़ा। कोसी का जलस्तर 34.62 मीटर रहा और इसमें 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। दूसरी ओर बूढ़ी गंडक 36.90 मीटर और गंगा 34.89 मीटर पर रही। दोनों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। परबत्ता प्रखंड की तमथा करारी पंचायत में पानी घरों तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के करीब 75 घरों में पानी घुस गया है। सड़कें डूब गई हैं और लोगों की आवाजाही के लिए सिर्फ एक नाव का सहारा है। घर के अंदर पानी और बाहर डूबी सड़क के बीच लोगों की जिंदगी खटिया और टांट के सहारे गुजर रही है। तमथा करारी पंचायत के रहने वाले मोहम्मद असलम ने बताया कि घर में पानी घुस गया है। घर की महिलाएं किसी तरह अंदर बैठी हुई हैं। पिछले 4-5 दिनों से घर में पानी है और लगातार जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। सरकार की तरफ से सिर्फ एक नाव मिली है। इतनी बड़ी आबादी के लिए एक नाव से बहुत परेशानी हो रही है। रात में खटिया-टांट के सहारे किसी तरह जिंदगी काट रहे हैं। करीब 75 घरों में पानी घुस चुका है। हम सरकार से यही मांग करते हैं कि बाढ़ प्रभावित लोगों को जरूरी सुविधाएं दी जाएं, ताकि हम लोगों को राहत मिल सके। मुंगेर: घर डूबे तो कोई छत पर है, कोई सड़क किनारे तंबू में मुंगेर में गंगा की बाढ़ ने कई इलाकों की जिंदगी बदल दी है। सदर मुंगेर, बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा, हवेली खड़गपुर और असरगंज प्रखंड बाढ़ प्रभावित हैं। इनमें सदर मुंगेर और बरियारपुर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। दोनों प्रखंडों की 10 से ज्यादा पंचायतों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है और करीब 20 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। हवेली खड़गपुर के कृष्णानगर गांव में 30 से ज्यादा घर पिछले पांच दिनों से पानी में डूबे हैं। कई घरों के ग्राउंड फ्लोर में 4-5 फीट पानी है। किसी ने दूसरी मंजिल पर सामान समेट लिया है तो कोई सड़क किनारे पॉलिथिन और तिरपाल के नीचे परिवार के साथ रहने को मजबूर है। तंबू के नीचे धूप रहने से बहुत गर्मी महसूस होती है कृष्णानगर की रहने वाली पूनम देवी ने बताया कि गंगा का पानी पांच दिन से घर में है। सड़क किनारे तंबू के नीचे बकरी सहित परिवार के साथ रह रही हूं। न तो कोई अधिकारी देखने आया है और न ही कोई उपाय किया गया है। घर में पानी और तंबू के नीचे धूप रहने से बहुत गर्मी महसूस होती है। बारिश के समय तेज हवा चलती है तो पॉलिथिन और तिरपाल भी उड़ जाते हैं। बारिश में भीग जाते हैं। प्रशासन की ओर से न सूखा राशन मिला है, न दवाई और न पॉलिथिन। अपने खर्च से किसी तरह जिंदगी कट रहे है। शौचालय नहीं, चापाकल डूबा; आधा किलोमीटर दूर से ला रहे पानी कृष्णानगर में बाढ़ की सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ घरों में पानी घुसना नहीं है। लोगों के सामने शौचालय और पीने के पानी की भी समस्या खड़ी हो गई है। कई घरों के चापाकल डूब चुके हैं। ग्रामीणों को आधा किलोमीटर दूर से पीने के पानी लाना पड़ रहा है। महिलाओं को शौच के लिए चार फीट पानी में उतरकर खुले में जाना पड़ रहा है। श्मशान घाट में पानी, बांध के पास करना पड़ रहा अंतिम संस्कार गंगा का जलस्तर वार्निंग लेवल से ऊपर रहने के कारण लाल दरवाजा के पास स्थित श्मशान घाट में पानी पहुंच गया है। इससे अंतिम संस्कार करने में परेशानी हो रही है। अब कई लोगों को बांध के समीप ही अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि जरूरत वाले इलाकों में नि:शुल्क नाव उपलब्ध कराई जा रही है। जिला आपदा पदाधिकारी कमल किशोर के अनुसार, बाढ़ और कटाव प्रभावित क्षेत्रों से शिकायत मिलने पर अधिकारियों को मौके पर भेजकर समस्या का समाधान कराया जा रहा है। भागलपुर: पानी से ज्यादा डर अब कटाव का, 12 घंटे में 8 घर गंगा में समाए भागलपुर में गंगा का कटाव इस समय सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। पुलिस जिला नवगछिया के राघोपुर में पिछले पांच दिनों से कटाव जारी है। वहीं, सबौर प्रखंड के इंग्लिश फरक्का में स्थिति और गंभीर है। यहां महज 12 घंटे के भीतर 8 घर गंगा में समा चुके हैं। ग्राउंड पर स्थिति देखने से पता चलता है कि गंगा की तेज धारा के सामने कटावरोधी काम कितना टिक पा रहा है। करीब 25 फीट गहरे पानी में बोरी के पैकेट डाले जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि तेज बहाव में ये भी बह जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते तैयारी होती तो कई घरों को बचाया जा सकता था। शनिवार की आधी रात संजू देवी का घर भी गंगा में समा गया। परिवार को घर का सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। घर के साथ राशन, कपड़े और जरूरी सामान भी नदी में चला गया। पांच कमरों का घर और आटा चक्की दोनों नदी में समाए ग्रामीण अंजना देवी ने कहा कि हम लोगों ने घर को कटते हुए देखा। हमारा भी घर यहां था। पांच कमरे थे, वह भी गंगा की भेंट चढ़ गया। एक आटा चक्की का मिल था, वह भी गंगा में चला गया। हर साल हम लोगों को यही दुख होता है। हर साल घर में कमर भर पानी घुस जाता है। हम लोग छत पर रहने को मजबूर होते हैं। विभाग ने पहले से तैयारी की होती तो आज यह कटाव की समस्या हम लोगों को नहीं झेलनी पड़ती। जो काम जल संसाधन विभाग की तरफ से कराया जा रहा है, वह नाकाफी है। इससे कुछ होने वाला नहीं है। दो महीने पहले बेटी की शादी की, अब घर का सामान गंगा में भागलपुर डीएम बोलीं- टॉप टीम मौके पर, काम में तेजी लाई जा रही DM अलंकृता पांडे ने बताया कि कटाव नियंत्रण को लेकर जल संसाधन विभाग की टॉप-मोस्ट टीम मौके पर मौजूद है। तकनीकी रूप से किन-किन बिंदुओं पर किस तरह के कार्य की आवश्यकता है, इसका आकलन विभाग के अभियंता कर रहे हैं। तटबंध पर जहां भी अतिक्रमण था, उसे हटवा दिया गया है और कार्य में किसी तरह का अवरोध नहीं है। काम को और मजबूत करने के लिए दूसरे जगहों से भी कार्यपालक अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति की गई है। बाहर से अतिरिक्त मजदूर और सामग्री मंगाकर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है। राहत बचाव कार्य के तहत कम्युनिटी किचन भी चलाए जा रहे हैं और फिलहाल ऐसी कोई पैनिक स्थिति नहीं है। मैनपावर की कमी के लिए अतिरिक्त मैनपावर की व्यवस्था की जा रही है। बेगूसराय: दियारा इलाके के 20 से ज्यादा गांव पानी में गंगा का जलस्तर घटने से बेगूसराय के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली है। हालांकि, गंगा अभी भी खतरे के निशान 41.76 मीटर से 51 सेंटीमीटर ऊपर 42.27 मीटर पर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, जलस्तर में कमी जारी है, लेकिन इलाहाबाद, बनारस और बक्सर में पानी फिर बढ़ रहा है। ऐसे में संभावना है कि अगले दो दिनों के बाद बेगूसराय में भी गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है। जिले के बछवाड़ा, तेघड़ा, बरौनी, मटिहानी, बलिया और साहेबपुर कमाल के दियारा इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि पूरा शाम्हो प्रखंड बाढ़ की चपेट में है। बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र में भी बाढ़ का आंशिक असर है। अभी करीब 50 हजार लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। बलिया दियारा और शाम्हो को छोड़कर ज्यादातर जगहों पर सड़क से पानी उतर गया है। बलिया के चेचियाही ढाब में अब भी सड़क पर पानी जमा है। दियारा इलाके के 20 से ज्यादा गांवों पानी से घिरे हुए हैं। मटिहानी के छितरौर और सिहमा बबूलबन्ना टोला में भी लोगों की परेशानी बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी पूरी है। बिहार आपदा प्रबंधन के अधिकारी ने कहा कि “कटाव नियंत्रण को लेकर विभाग की टॉप-मोस्ट टीम हर जिले में मौके पर मौजूद है। बाढ़ की स्थिति में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर तैनात किया गया है। इनपुट: वैशाली से प्रेम, मुंगेर से चेतन झा, खगड़िया से गौतम कुमार, भागलपुर से अमरजीत और बेगूसराय से सुरेंद्र  

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