बिहार में छात्र आंदोलन-17 दिन से अनशन, 10KG वजन घटा:प्रोफेसर कुमुद बोले- सरकार तानाशाह, कुछ नहीं सुनती; जानिए प्रदर्शनकारियों की क्या है मांगें

बिहार में छात्र आंदोलन-17 दिन से अनशन, 10KG वजन घटा:प्रोफेसर कुमुद बोले- सरकार तानाशाह, कुछ नहीं सुनती; जानिए प्रदर्शनकारियों की क्या है मांगें

‘मैं रहूं या न रहूं बिहार की शिक्षा व्यवस्था रहनी चाहिए, उच्च शिक्षा रहनी चाहिए। यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि पूरे बिहार के प्रोफेसर्स की लड़ाई है। 17 दिनों से बिना अन्न ग्रहण किए आमरण अनशन पर बैठे हैं। वजन करीब 10 किलो कम हो गया है। BP भी लो है और डॉक्टरों ने बिगड़ती हालत को देखते हुए कहा है कि कभी भी अस्पताल जाने की नौबत आ सकती है। सरकार तानाशाही की तरफ बढ़ रही है। 17 दिनों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन उनकी तरफ से कोई सुध नहीं ली गई।’ ये कहना है गर्दनीबाग में 17 दिनों से अनशन पर बैठे प्रोफेसर कुमुद पटेल का। कुमुद का शरीर अब जवाब देने लगा है। खाना-पानी शरीर में नहीं जाने की वजह से वो ठीक से बोल भी नहीं पा रहे, लेकिन उनके हौसले अब भी उतने ही बुलंद हैं। कुमुद के साथ 100 से ज्यादा छात्र हैं। गर्दनी बाग में किसका किसका धरना चल रहा है, प्रो. कुमुद, पीएचडी होल्डर, रिसर्च स्कॉलर और अतिथि शिक्षकों की मांगें क्या हैं।…इस रिपोर्ट में पढ़िए बीते 17 दिन में क्या-क्या हुआ, कुमुद को किनका साथ मिला और क्या सरकार उनकी मांग स्वीकारेगी… सबसे पहले देखें अनशन की तस्वीरें… कुमुद पटेल की जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनका वजन पहले के मुकाबले करीब 10 किलो घट गया है। किसी भी समय अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है। इसके बावजूद वे अनशन स्थल पर डटे रहेंगे। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से स्पष्ट और लिखित फैसला नहीं आता, तब तक आंदोलन खत्म करने का सवाल नहीं है। सरकार चाहती है, छात्र भविष्य और न्याय के लिए आवाज न उठाए कुमुद पटेल कहते हैं, सरकार गूंगी, बहरी और लंगड़ी हो गई है। 17 दिनों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट लिखित संदेश नहीं दिया गया है। सरकार दोहरी नीति अपना रही है। उनका आरोप है कि सरकार नहीं चाहती कि छात्र अपने भविष्य और न्याय के लिए कोई आवाज उठाएं। इसी वजह से अब आंदोलन को और आगे ले जाने का फैसला किया गया है। 22 अगस्त को वीर कुंवर सिंह पार्क से लोक भवन तक मार्च कुमुद पटेल ने बताया, आंदोलनकारियों ने 22 अगस्त को लोक भवन मार्च करने का निर्णय लिया है। यह मार्च वीर कुंवर सिंह पार्क से शुरू होकर लोक भवन तक जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार तक उनकी सभी मांगें पहुंच चुकी हैं। इसके बावजूद अगर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता है तो वे सड़क पर अपना आंदोलन और तेज करेंगे। रिसर्च स्कॉलर और गेस्ट टीचर की क्या हैं डिमांड मगध विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक डॉ. कुंदन सिंह ने आंदोलन की मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा, सबसे पहली मांग सहायक प्राध्यापक बहाली में UGC Regulation 2018 की Table 3A लागू करने की है। उनकी मांग है कि सहायक प्राध्यापक बनने के लिए लागू की गई 2026 की नियमावली रद्द हो। अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष की जाए। बिहार के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में वर्षों से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों का 65 वर्ष की आयु तक सेवा समायोजन करने की मांग है। विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियमित और स्थायी बहाली कराने की भी मांग आंदोलनकारी कर रहे हैं। छात्र बोले–सत्ता मिली तो पुराने वादे भूल गए सम्राट जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय छपरा के रिसर्च स्कॉलर आशीष कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, जब सम्राट चौधरी विपक्ष में थे, तब छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर लंबी-लंबी बातें करते थे। लेकिन सत्ता और कुर्सी मिलने के बाद उन बातों को भुला दिया गया। चुनाव के समय ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ जैसे नारों के जरिए वोट मांगा जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद छात्रों और युवाओं की समस्याओं को भुला दिया जाता है। अब जानिए प्रो. कुमुद को किस नेता-मंत्री का साथ मिला प्रो.कुमुद, शिक्षक-रिसर्च स्कॉलर्स के इस आंदोलन को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, CPI(ML) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य का साथ मिल चुका है। 18 अगस्त को तेजस्वी यादव गर्दनीबाग पहुंचे थे। वहां पहुंचकर उन्होंने कुमुद पटेल से बातचीत की। कहा कि राजद उनके साथ है और शिक्षकों के इस मुद्दे पर सरकार से जवाब तलब करेगी। तेजस्वी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, सहायक प्राध्यापक बहाली की नई नियमावली में संशोधन एवं अभ्यर्थियों की मांगों और समस्याओं के समाधान, TRE-4 की एकल परीक्षा का विज्ञापन जारी करने के मुद्दे पर गर्दनीबाग धरना स्थल पर भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात कर अपना समर्थन दिया। अहंकारी सरकार को अविलंब छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनकर उन्हें पूर्ण करना चाहिए। 3 अगस्त को गर्दनीबाग में शुरू हुआ आंदोलन पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर 3 अगस्त को आंदोलन शुरू हुआ था। प्रो.कुमुद उस दिन आमरण अनशन पर बैठे थे। उस दिन भी उन्होंने कहा था कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों को लेकर लिखित जवाब नहीं मिल जाता तब तक हमलोग यहां से नहीं हिलेंगे। शांतीपूर्ण तरीके से अनशन चलता रहा। जिसके बाद 18 अगस्त को तेजस्वी और चिराग पासवान का भी साथ मिला। वहीं, 20 अगस्त को सभी ने लोक भवन मार्च करने का फैसला लिया। TRE-4 नोटिफिकेशन के बाद भी गर्दनीबाग में छात्रों का आंदोलन जारी वहीं, बिहार सरकार ने TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद पटना के गर्दनीबाग में छात्रों का आंदोलन जारी है। 18 अगस्त से छात्र दिन-रात गर्दनीबाग में जुटे हैं। उनकी मांग है कि TRE-4 में सिर्फ एक परीक्षा हो और निगेटिव मार्किंग हटाई जाए। दिलीप कुमार रोते हुए बोले- 11 साल से छात्रों के लिए लड़ रहे TRE-4 को लेकर आंदोलन के बीच छात्र नेता दिलीप कुमार भावुक हो गए। उन्होंने रोते हुए अपनी ईमानदारी और निष्पक्षता पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए कहा कि वह 11 वर्षों से छात्रों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। आज तक कोई उन पर एक रुपए का भी आरोप नहीं लगा सकता कि उन्होंने किसी से चंदा लिया हो या किसी नेता अथवा राजनीतिक पार्टी का समर्थन किया हो। उन्होंने कहा, आंदोलन अपने घर के पैसे से चलाते हैं, पुलिस की लाठियां खाते हैं और जरूरत पड़ने पर जेल भी जाते हैं। सरकार चाहे तो उनके बैंक अकाउंट की जांच करा सकती है। सफल अभ्यर्थियों की बेरुखी पर भी दिलीप का दर्द सामने आया। उन्होंने कहा, TRE-1, 2, 3, दरोगा, सिपाही, BSSC और BPSC से नौकरी पा चुके लोग आज इतने स्वार्थी हो गए हैं कि रात-दिन मच्छरों के बीच बैठे आंदोलनकारी छात्रों के लिए ₹10 का बिस्कुट तक भेजने की हिम्मत नहीं दिखा रहे। ‘मैं रहूं या न रहूं बिहार की शिक्षा व्यवस्था रहनी चाहिए, उच्च शिक्षा रहनी चाहिए। यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि पूरे बिहार के प्रोफेसर्स की लड़ाई है। 17 दिनों से बिना अन्न ग्रहण किए आमरण अनशन पर बैठे हैं। वजन करीब 10 किलो कम हो गया है। BP भी लो है और डॉक्टरों ने बिगड़ती हालत को देखते हुए कहा है कि कभी भी अस्पताल जाने की नौबत आ सकती है। सरकार तानाशाही की तरफ बढ़ रही है। 17 दिनों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन उनकी तरफ से कोई सुध नहीं ली गई।’ ये कहना है गर्दनीबाग में 17 दिनों से अनशन पर बैठे प्रोफेसर कुमुद पटेल का। कुमुद का शरीर अब जवाब देने लगा है। खाना-पानी शरीर में नहीं जाने की वजह से वो ठीक से बोल भी नहीं पा रहे, लेकिन उनके हौसले अब भी उतने ही बुलंद हैं। कुमुद के साथ 100 से ज्यादा छात्र हैं। गर्दनी बाग में किसका किसका धरना चल रहा है, प्रो. कुमुद, पीएचडी होल्डर, रिसर्च स्कॉलर और अतिथि शिक्षकों की मांगें क्या हैं।…इस रिपोर्ट में पढ़िए बीते 17 दिन में क्या-क्या हुआ, कुमुद को किनका साथ मिला और क्या सरकार उनकी मांग स्वीकारेगी… सबसे पहले देखें अनशन की तस्वीरें… कुमुद पटेल की जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनका वजन पहले के मुकाबले करीब 10 किलो घट गया है। किसी भी समय अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है। इसके बावजूद वे अनशन स्थल पर डटे रहेंगे। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से स्पष्ट और लिखित फैसला नहीं आता, तब तक आंदोलन खत्म करने का सवाल नहीं है। सरकार चाहती है, छात्र भविष्य और न्याय के लिए आवाज न उठाए कुमुद पटेल कहते हैं, सरकार गूंगी, बहरी और लंगड़ी हो गई है। 17 दिनों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट लिखित संदेश नहीं दिया गया है। सरकार दोहरी नीति अपना रही है। उनका आरोप है कि सरकार नहीं चाहती कि छात्र अपने भविष्य और न्याय के लिए कोई आवाज उठाएं। इसी वजह से अब आंदोलन को और आगे ले जाने का फैसला किया गया है। 22 अगस्त को वीर कुंवर सिंह पार्क से लोक भवन तक मार्च कुमुद पटेल ने बताया, आंदोलनकारियों ने 22 अगस्त को लोक भवन मार्च करने का निर्णय लिया है। यह मार्च वीर कुंवर सिंह पार्क से शुरू होकर लोक भवन तक जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार तक उनकी सभी मांगें पहुंच चुकी हैं। इसके बावजूद अगर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता है तो वे सड़क पर अपना आंदोलन और तेज करेंगे। रिसर्च स्कॉलर और गेस्ट टीचर की क्या हैं डिमांड मगध विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक डॉ. कुंदन सिंह ने आंदोलन की मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा, सबसे पहली मांग सहायक प्राध्यापक बहाली में UGC Regulation 2018 की Table 3A लागू करने की है। उनकी मांग है कि सहायक प्राध्यापक बनने के लिए लागू की गई 2026 की नियमावली रद्द हो। अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष की जाए। बिहार के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में वर्षों से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों का 65 वर्ष की आयु तक सेवा समायोजन करने की मांग है। विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियमित और स्थायी बहाली कराने की भी मांग आंदोलनकारी कर रहे हैं। छात्र बोले–सत्ता मिली तो पुराने वादे भूल गए सम्राट जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय छपरा के रिसर्च स्कॉलर आशीष कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, जब सम्राट चौधरी विपक्ष में थे, तब छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर लंबी-लंबी बातें करते थे। लेकिन सत्ता और कुर्सी मिलने के बाद उन बातों को भुला दिया गया। चुनाव के समय ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ जैसे नारों के जरिए वोट मांगा जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद छात्रों और युवाओं की समस्याओं को भुला दिया जाता है। अब जानिए प्रो. कुमुद को किस नेता-मंत्री का साथ मिला प्रो.कुमुद, शिक्षक-रिसर्च स्कॉलर्स के इस आंदोलन को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, CPI(ML) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य का साथ मिल चुका है। 18 अगस्त को तेजस्वी यादव गर्दनीबाग पहुंचे थे। वहां पहुंचकर उन्होंने कुमुद पटेल से बातचीत की। कहा कि राजद उनके साथ है और शिक्षकों के इस मुद्दे पर सरकार से जवाब तलब करेगी। तेजस्वी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, सहायक प्राध्यापक बहाली की नई नियमावली में संशोधन एवं अभ्यर्थियों की मांगों और समस्याओं के समाधान, TRE-4 की एकल परीक्षा का विज्ञापन जारी करने के मुद्दे पर गर्दनीबाग धरना स्थल पर भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात कर अपना समर्थन दिया। अहंकारी सरकार को अविलंब छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनकर उन्हें पूर्ण करना चाहिए। 3 अगस्त को गर्दनीबाग में शुरू हुआ आंदोलन पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर 3 अगस्त को आंदोलन शुरू हुआ था। प्रो.कुमुद उस दिन आमरण अनशन पर बैठे थे। उस दिन भी उन्होंने कहा था कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों को लेकर लिखित जवाब नहीं मिल जाता तब तक हमलोग यहां से नहीं हिलेंगे। शांतीपूर्ण तरीके से अनशन चलता रहा। जिसके बाद 18 अगस्त को तेजस्वी और चिराग पासवान का भी साथ मिला। वहीं, 20 अगस्त को सभी ने लोक भवन मार्च करने का फैसला लिया। TRE-4 नोटिफिकेशन के बाद भी गर्दनीबाग में छात्रों का आंदोलन जारी वहीं, बिहार सरकार ने TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद पटना के गर्दनीबाग में छात्रों का आंदोलन जारी है। 18 अगस्त से छात्र दिन-रात गर्दनीबाग में जुटे हैं। उनकी मांग है कि TRE-4 में सिर्फ एक परीक्षा हो और निगेटिव मार्किंग हटाई जाए। दिलीप कुमार रोते हुए बोले- 11 साल से छात्रों के लिए लड़ रहे TRE-4 को लेकर आंदोलन के बीच छात्र नेता दिलीप कुमार भावुक हो गए। उन्होंने रोते हुए अपनी ईमानदारी और निष्पक्षता पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए कहा कि वह 11 वर्षों से छात्रों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। आज तक कोई उन पर एक रुपए का भी आरोप नहीं लगा सकता कि उन्होंने किसी से चंदा लिया हो या किसी नेता अथवा राजनीतिक पार्टी का समर्थन किया हो। उन्होंने कहा, आंदोलन अपने घर के पैसे से चलाते हैं, पुलिस की लाठियां खाते हैं और जरूरत पड़ने पर जेल भी जाते हैं। सरकार चाहे तो उनके बैंक अकाउंट की जांच करा सकती है। सफल अभ्यर्थियों की बेरुखी पर भी दिलीप का दर्द सामने आया। उन्होंने कहा, TRE-1, 2, 3, दरोगा, सिपाही, BSSC और BPSC से नौकरी पा चुके लोग आज इतने स्वार्थी हो गए हैं कि रात-दिन मच्छरों के बीच बैठे आंदोलनकारी छात्रों के लिए ₹10 का बिस्कुट तक भेजने की हिम्मत नहीं दिखा रहे।  

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