फर्रुखाबाद में शुक्रवार को रक्षाबंधन के त्योहार पर बाढ़ भी बहनों का हौसला नहीं रोक सकी। गंगा नदी का जलस्तर 137.10 मीटर पर पहुंचकर खतरे के निशान पर है। जिले के 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बावजूद बहनें नाव और स्टीमर से सफर कर अपने मायके पहुंचीं और भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। गंगा का पानी अमृतपुर, सदर और कायमगंज तहसील के कई गांवों तक पहुंच चुका है। इनमें अमृतपुर तहसील के सबसे ज्यादा गांव प्रभावित हैं। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों के आने-जाने के लिए नाव और स्टीमर लगाए गए हैं। 3 किमी स्टीमर से पहुंचीं सविता बिलावलपुर के पास स्टीमर पर बैठी सविता ने बताया कि उनकी ससुराल नगरिया में है। वह तीन भाइयों को राखी बांधने कटरी धर्मपुर स्थित मायके जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले सवारी से शहर तक आईं, फिर कुछ दूरी पैदल चलीं और अब गांव पहुंचने के लिए स्टीमर का सहारा लिया है। उन्हें करीब 3 किलोमीटर का सफर स्टीमर से तय करना है।सविता ने कहा कि राखी का त्योहार साल में एक बार आता है। इस दिन भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधना जरूरी है, इसलिए बाढ़ के बावजूद वह मायके पहुंच रही हैं। मंझा की मड़ैया में नाव ही सहारा अमृतपुर तहसील के मंझा की मड़ैया गांव के चारों ओर बाढ़ का पानी भरा है। यहां आने-जाने के लिए नाव ही एकमात्र साधन बचा है। रक्षाबंधन पर बहनें नाव और स्टीमर के जरिए गांव पहुंचीं और भाइयों को राखी बांधी। प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। प्रभावित गांवों में आवागमन के लिए नाव और स्टीमर की व्यवस्था की गई है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर होने के कारण अधिकारियों की ओर से ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

