Javed Akhtar on Farhan-Zoya Religion: मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर अपनी बेबाक सोच के लिए जाने जाते हैं। वो अक्सर समाज, धर्म और इंसान की पहचान जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। लेकिन जब बात उनके बच्चों फरहान अख्तर और जोया अख्तर की परवरिश की आती है तो उनके विचार और भी दिलचस्प हो जाते हैं। हाल ही में एक बातचीत में जावेद अख्तर ने उस वक्त का किस्सा सुनाया जब उनके छोटे बेटे फरहान ने बचपन में उनसे एक ऐसा सवाल पूछ लिया था, जिसका जवाब शायद किसी भी माता-पिता के लिए आसान नहीं होता।
स्कूल से लौटकर फरहान ने पूछा था एक सवाल
जावेद अख्तर ने ‘लेट्स टॉक विद देवना’ के साथ बातचीत में बताया कि फरहान करीब सात-आठ साल के रहे होंगे। एक दिन वह स्कूल से घर लौटे और सीधे अपने पिता के पास पहुंच गए। उस उम्र में बच्चे आसपास की चीजों को देखकर अपनी पहचान को लेकर सवाल करने लगते हैं। फरहान के मन में भी यही जिज्ञासा थी कि आखिर उनका धर्म क्या है।
फरहान ने अपने पिता से पूछा कि क्या वो मुस्लिम हैं?
जावेद ने बच्चे को किसी धार्मिक पहचान में बांधने के बजाय उसे इंसान की पहचान का एक अलग नजरिया समझाने की कोशिश की। उनके मुताबिक किसी इंसान का जन्म किस शहर या किस समुदाय में हुआ, यह उसके व्यक्तित्व की पूरी पहचान नहीं हो सकती। उनके लिए ज्यादा अहम यह था कि इंसान आगे चलकर कैसा व्यक्ति बनता है और उसके भीतर कौन से मूल्य विकसित होते हैं।
बच्चों पर धर्म थोपना नहीं चाहते थे जावेद
जावेद अख्तर ने बातचीत में बताया कि उन्होंने फरहान और जोया को किसी एक धार्मिक पहचान के साथ बड़ा करने की कोशिश नहीं की। उनका मानना था कि बच्चे जब बड़े होंगे तो खुद अपनी सोच और मान्यताओं को समझने में सक्षम होंगे।
उनका कहना था कि आमतौर पर बचपन से ही बच्चों को किसी न किसी धार्मिक पहचान से जोड़ दिया जाता है, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों के मामले में ऐसा नहीं किया। इसी वजह से वह फरहान और जोया को धार्मिक रूप से किसी तय पहचान में बांधने के बजाय उन्हें अपने मूल्य खुद विकसित करने की आजादी देना चाहते थे।
फरहान-जोया की परवरिश में हनी ईरानी का बड़ा योगदान
जावेद अख्तर ने अपने बच्चों की परवरिश की चर्चा करते हुए अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने माना कि फरहान और जोया के व्यक्तित्व को आकार देने में हनी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
जब दोनों अलग हुए, उस समय जोया करीब 11 साल और फरहान लगभग साढ़े नौ साल के थे। जावेद के मुताबिक यह बच्चों की जिंदगी का बेहद अहम दौर था। हनी ने उन्हें सिर्फ आजादी का मतलब नहीं समझाया, बल्कि उसके साथ आने वाली जिम्मेदारियों और सही-गलत की समझ भी विकसित की।
दोनों ने अपनी मेहनत से बनाई पहचान
जावेद अख्तर को अपने दोनों बच्चों की उपलब्धियों पर गर्व है, लेकिन वह यह मानने को तैयार नहीं हैं कि फरहान और जोया की सफलता सिर्फ परिवार की वजह से मिली। उनका कहना है कि दोनों ने अपनी-अपनी दिशा में मेहनत करके करियर बनाया।
फरहान अख्तर ने अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और लेखक के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई, जबकि जोया अख्तर ने निर्देशन और लेखन के क्षेत्र में खास मुकाम हासिल किया। जावेद के मुताबिक दोनों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया।
शबाना आजमी से शादी, हनी ईरानी से हैं दो बच्चे
जावेद अख्तर ने साल 1984 में अभिनेत्री शबाना आजमी से शादी की थी। इससे पहले उनकी शादी लेखिका और अभिनेत्री हनी ईरानी से हुई थी। फरहान और जोया उन्हीं के बच्चे हैं। दोनों का रिश्ता बाद में खत्म हो गया, लेकिन जावेद आज भी बच्चों की परवरिश में हनी के योगदान को सम्मान के साथ याद करते हैं।
फरहान के बचपन का यह छोटा-सा सवाल और जावेद का जवाब सिर्फ पिता-पुत्र की बातचीत नहीं थी, बल्कि यह बताता है कि उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश में पहचान से ज्यादा सोच, जिम्मेदारी और इंसानी मूल्यों को महत्व देने की कोशिश की।

