बगलामुखी में VIP एंट्री बंद, मैहर में 700 जवान तैनात:MP के 7 देवी मंदिरों की खासियत, दर्शन व्यवस्था और दरबार तक पहुंचने की पूरी गाइड

बगलामुखी में VIP एंट्री बंद, मैहर में 700 जवान तैनात:MP के 7 देवी मंदिरों की खासियत, दर्शन व्यवस्था और दरबार तक पहुंचने की पूरी गाइड

आज से नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। भक्तों ने सुबह से माता के मंदिरों में पहुंचना शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश के देवी मंदिरों जैसे– मैहर में शारदा मंदिर, देवास की टेकरी माता, नलखेड़ा में बगलामुखी, उज्जैन में हरिसिद्धि समेत अन्य मंदिरों में दर्शनों और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई है। बगलामुखी मंदिर में वीआईपी एंट्री बंद रहेगी। वहीं, मैहर के शारदा माता के मंदिर में 700 जवान सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे। अगर आप भी इन शक्तिपीठों के दर्शन करने जा रहे हैं। यह टूरिस्ट गाइड आपके काम आएगी। 7 बड़े मंदिरों की खासियत, वहां की व्यवस्था, सुरक्षा समेत पूरी जानकारी यहां दी जा रही है। पढ़िए रिपोर्ट … आगर–मालवा: बगलामुखी मंदिर में तांत्रिक पूजा आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी किनारे स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ और तांत्रिक स्थली है। यहां मां बगलामुखी की त्रिमुखी त्रिशक्ति स्वरूप की प्रतिमा विराजित हैं। मंदिर में मां लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमानजी, भैरव और सरस्वती माता की प्रतिमाएं भी हैं। बताया जाता है कि प्रतिमा महाभारत कालीन स्वयंभू है। मंदिर तांत्रिक साधना और शत्रु पर विजय प्राप्त करने के हवन-अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है। पर्यटन मंत्रालय के पोर्टल पर इसे देश के प्रमुख बगलामुखी सिद्धपीठों में शामिल बताया गया है। हवन या अनुष्ठान कराने वालों को पुरोहित से सूची पूछनी चाहिए। आधिकारिक वेबसाइट पर हवन बुकिंग, चोला बुकिंग और दान की सुविधा है। समय सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक है। विशेष अनुष्ठान कराने वाले श्रद्धालु रवाना होने से पहले मंदिर समिति से कन्फर्म करें। ये सावधानी बरतें बारिश के दौरान मंदिर मार्ग के नाले/पुलिया को लेकर विशेष सावधानी बरतें। दरअसल, 19 सितंबर 2026 को नाले में कार बहने से 8 लोगों की मौत हुई थी। इसलिए यह सावधानी बरतें… पानी बह रहा हो, तो पुलिया पार नहीं करें। कार, बाइक या पैदल पानी के बहाव में प्रवेश न करें। रात, तेज बारिश और कम दृश्यता में सावधानी रखें। जहां पुलिस/प्रशासन ने रास्ता रोका हो, वहां दूसरे रास्ते से नहीं जाएं। मैहर:शारदा मां के दरबार आते हैं आल्हा–ऊदल मैहर जिले में त्रिकूट पर्वत पर 600 फीट की ऊंचाई पर मां शारदा देवी के दर्शन के लिए देश–विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। 52 शक्तिपीठों में से एक इस पीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का हार गिरा था, जिससे इस नगरी का नाम ‘मैहर’ पड़ा। माना जाता है कि मंदिर में आज भी माता के परम भक्त वीर आल्हा–ऊदल ब्रह्ममुहूर्त में पूजा करने आते हैं। मैहर सड़क और रेल नेटवर्क से जुड़ा है। नेशनल हाईवे NH-30 (जबलपुर-प्रयागराज मार्ग) पर स्थित होने के कारण भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, सतना और प्रयागराज से बसें व निजी वाहन उपलब्ध हैं। उज्जैन के हरिसिद्धि मंदिर में 51 फीट पर होंगे दीप प्रज्वलन उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर देशभर के 51 शक्तिपीठों में शामिल है। महाकाल मंदिर से करीब 500 मीटर दूर स्थित इस मंदिर को भगवान शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती की कोहनी गिरी थी। कवि कालिदास भी हरसिद्धि माता के उपासक माने जाते हैं। मंदिर की सबसे खास पहचान करीब 51 फीट ऊंचे दो प्राचीन दीप स्तंभ हैं, जिनमें कुल 1011 दीपक हैं। इन्हें प्रज्वलित करने में करीब 60 लीटर तेल और चार किलो रुई की बातियां लगती हैं। उज्जैन का जोशी परिवार करीब 100 साल से पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन्हें रोशन करने की परंपरा निभा रहा है। भैंसवा माता, सारंगपुर, राजगढ़: पिता की नजर पड़ते ही धरती में समा गईं मां बीजासन राजगढ़ जिले के सारंगपुर में संतान प्राप्ति के लिए भैंसवा माता (बीजासन माता मंदिर) विख्यात है। मान्यता है कि लाखा बंजारा नाम का देवी मां का भक्त था। उसे संतान नहीं थी। एक बार पहाड़ी से गुजरते समय लाखा बंजारा दंपती ने बच्ची की किलकारी सुनी। वह बालिका को डेरे ले गया। नाम रखा बीजासन। बड़ी होकर वह पशुओं को दूध तलाई नामक स्थान पर पानी पिलाया करती थी। एक दिन बीजासन स्नान कर रही थी, उसकी नजर अपने पिता पर पड़ी, तो बीजासन धरती में समा गई। उस जगह को दूध तलाई कहते हैं। इसी जगह सिद्ध शक्तिपीठ स्थापित हुआ। मंदिर करीब 200 एकड़ में फैली पहाड़ी पर स्थित है। माना जाता है कि मूर्ति 600 साल पुरानी है। मान्यता है कि नि:संतान दंपति यहां उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं, तो मनोकामना पूरी होती है। इसके बाद श्रद्धालु यहां पालना लाकर चढ़ाते हैं। वर्तमान में मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। यहां राजस्थान से 125 लोग काम कर रहे हैं। नीमच: मालवा की माता वैष्णो देवी नीमच जिले में स्थित भादवा माता को मालवा की वैष्णो देवी भी कहते हैं। मंदिर के पास स्थित बावड़ी का जल आरोग्य लाभ के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि बावड़ी के जल से स्नान करने और पीने से लकवाग्रस्त या कुष्ठरोग रोग ठीक होता है। इस कारण मंदिर परिसर में बीमारी से पीड़ित मरीज कई दिन यहां रहते हैं। सुबह–शाम बावड़ी के जल से नहाते हैं। मंदिर में माता के दर्शन करते हैं। यहां मध्यप्रदेश राजस्थान समेत अन्य राज्यों से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर में महामाया भादवा माता की प्रतिमा और उनके चरणों में नौ स्वरूपों की ब्रह्माणी, महेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, नरसिंही, इंद्राणी, शिवदत्ती और चामुंडा की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इसके अलावा, मंदिर में गणेशजी, बालाजी महाराज, भैंरो बाबा और काला गोरा जी की प्रतिमा भी मौजूद हैं। देवास: तीन रूपों में दर्शन देती हैं तुलजा भवानी देवास जिले में मां चामुंडा और तुलजा भवानी 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान हैं। दोनों माता देवास रियासत की कुलदेवी हैं। मुख्य पुजारी मुकेश नाथ ने बताया कि यह रक्तपीठ कहा गया। यहां देवी मां का रक्त गिरा था, इसलिए यहां मां चामुण्डा का प्राकट्य हुआ। टेकरी पर एक किमी लंबा परिक्रमा पथ है। परिक्रमा पथ पर हनुमान मंदिर, अष्टभुजा मंदिर, अन्नपूर्णा माता मंदिर, खो-खो माता के भी दर्शन होते हैं। भक्त रपट मार्ग और सीढ़ी मार्ग के साथ ही रोप–वे से भी टेकरी तक पहुंच सकते हैं। माता तुलजा भवानी तीन रूपों में दर्शन देती हैं। सुबह मां के चेहरे पर बाल रूप, दोपहर में युवा अवस्था और रात में माता रानी का वृद्ध स्वरूप दिखता है। देवास रेल और सड़क मार्ग से जुड़ा है। इंदौर, उज्जैन से सीधे यहां पहुंचा जा सकता है। दतिया: मां बगलामुखी और धूमावती के दर्शन के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु दतिया में स्थित मां पीतांबरा पीठ देश के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में से एक है। यहां मां बगलामुखी और मां धूमावती के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां बगलामुखी की आराधना से शत्रुओं पर विजय और संकटों से मुक्ति मिलती है। पीठ की स्थापना स्वामीजी महाराज ने की थी। यहां मां बगलामुखी और मां धूमावती की स्थापना के साथ परिसर में वनखंडेश्वर महादेव मंदिर भी है। इस शिव मंदिर को महाभारत काल का माना जाता है। पीतांबरा पीठ दतिया रेलवे स्टेशन से करीब 2 किमी दूर है। ग्वालियर हवाई अड्डा यहां से लगभग 75 किमी की दूरी पर है। दतिया रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। कंटेंट -देवास से महेश सोलंकी, मैहर से जयदेव विश्वकर्मा, आगर–मालवा से मनीष कुमार मारू, दतिया से राधावल्लभ मिश्रा, सारंगपुर से नवीन रुंडवाल, नीमच से बबलू किलोरिया।

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