रात का सन्नाटा… पेड़ों से लटकती महिला-पुरुषों की तस्वीरें, कहीं फोटो पर ठुकी कीलें तो कहीं टंगे सैंडल और कपड़ों से बने पुतले। उज्जैन में विक्रांत भैरव मंदिर के पास स्थित सती माता मंदिर में पहुंचने पर ऐसा नजारा दिखाई देता है। मेलडी माता मंदिर के नाम से जाना जाने वाले इस स्थान की मान्यता है कि यहां शत्रु नाश के लिए पूजन कराया जाता है। नवरात्र में तंत्र साधना से जुड़ी चर्चाओं के बीच दैनिक भास्कर ने मौके पर पहुंचकर इन निशानियों के पीछे की मान्यताओं और मंदिर के नाम से जुड़ी कहानी को समझने की कोशिश की। पढ़िए रिपोर्ट… कहां है यह मंदिर? सती माता मंदिर उज्जैन के भैरवगढ़ क्षेत्र में ओखलेश्वर रोड पर काल भैरव मंदिर के पास स्थित है। विक्रांत भैरव मंदिर की नजदीकी के कारण यह इलाका धार्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। स्थानीय स्तर पर मंदिर को मेलडी माता मंदिर के नाम से भी पुकारा जाता है। नवरात्र के दौरान यहां तंत्र साधना से जुड़ी मान्यताओं और चर्चाओं के कारण लोगों की यहां आवाजाही बढ़ गई है। पेड़ों पर तस्वीरें, सैंडल और कपड़ों के पुतले दैनिक भास्कर की टीम मौेके पर पहुंची तो यहां का नजारा आम मदिरों से काफी अलग था। मंदिर परिसर के आसपास आधा दर्जन से ज्यादा पेड़ों पर महिला-पुरुषों की तस्वीरें, कपड़े, सैंडल, नींबू-मिर्च और कपड़ों से बनाए गए पुतले टंगे थे। कुछ तस्वीरों पर कीलें भी ठुकी हुई थीं। यहां आए भक्तों से इसके पीछे की कहानी जानने की कोशिश की। लोगों ने बताया कि मान्यताओं के मुताबिक, इन वस्तुओं को शत्रु नाश से जुड़े कर्मकांडों के रूप में देखा जाता है। कुछ लोगों का दावा है कि यहां विरोधियों को नुकसान पहुंचाने की मंशा से विशेष पूजन कराया जाता है। हालांकि इन निशानियों के पीछे हर व्यक्ति का उद्देश्य क्या एक जैसा है… इस पर कोई स्पष्ट रूप से नहीं बोल पाया। यानी शुत्रनाश के लिए यहां साधना होती है, इसकी कोई भी पुष्टि नहीं कर पाया। कर्मकांडों से किसी को नुकसान पहुंचने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण भी यहां नहीं मिला। किसी शत्रु की फोटो पेड़ पर लटकाने का ट्रेंड सोशल मीडिया पर भी किसी शत्रु की फोटो पेड़ पर लटकाने का ट्रेंड चल पड़ा है, जबकि ऐसा करने से कुछ नहीं होता। सोशल मीडिया पर इस तरह की चीजें देखने के बाद यहां आने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है। हालांकि, पहले से ही देशभर से लोग तंत्र-मंत्र करने के लिए यहां आते रहे हैं। पारिवारिक विवादों में शत्रु नाश के पूजन का दावा टीम ने यहां मौजूद तांत्रिक भय्यू महाराज से बात की। उनके मुताबिक, यहां आने वाले कुछ लोग पारिवारिक और निजी विवादों से परेशान होते हैं। इनमें कथित विवाहेतर संबंधों और सास-बहू के विवाद जैसे मामले शामिल हैं। उनका दावा है कि कुछ लोग विरोधियों से छुटकारा पाने की मंशा से पूजन कराते हैं। हालांकि इन दावों का महाराज कोई प्रमाण नहीं दे पाए। गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी आने का दावा भय्यू महाराज का कहना है कि मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी लोग यहां आते हैं। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में कुछ तांत्रिक कर्मकांडों पर पाबंदियों के बाद वहां से आने वालों की संख्या बढ़ी है। हालांकि, इस दावे को लेकर भी वो कोई कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं करवा पाए। श्मशान और भैरव मंदिरों के नजदीक होने से चर्चा उज्जैन के भैरवगढ़ क्षेत्र में विक्रांत भैरव मंदिर के अलावा काल भैरव मंदिर और ओखलेश्वर रोड के आसपास कई धार्मिक स्थल हैं। चक्रतीर्थ और ओखलेश्वर जैसे श्मशान घाट भी इसी व्यापक क्षेत्र में स्थित हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में भैरव उपासना और श्मशान से जुड़ी मान्यताओं का विशेष स्थान है। नवरात्र के दौरान तंत्र साधना को लेकर होने वाली चर्चाओं के बीच सती माता मंदिर भी लोगों की उत्सुकता का केंद्र बना रहता है। हालांकि, आसपास श्मशान घाट और भैरव मंदिर होने से यहां होने वाले सभी कर्मकांडों को तंत्र साधना से जोड़ने का स्वतंत्र प्रमाण नहीं है। सती माता मंदिर को मेलडी माता क्यों कहते हैं? भय्यू महाराज के मुताबिक, मंदिर का मूल नाम सती माता मंदिर है। यह भैरवगढ़ क्षेत्र में ओखलेश्वर रोड पर काल भैरव मंदिर के पास स्थित है। उनके अनुसार, यहां सती माता की चरण पादुकाएं और मेलडी माता की प्रतिमा भी है। दावा है कि सरकारी रिकॉर्ड में मंदिर का नाम सती माता मंदिर दर्ज है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब दो साल पहले तक इसे मुख्य रूप से सती माता मंदिर के नाम से ही जाना जाता था। बाद में मेलडी माता नाम का प्रचलन बढ़ा। हालांकि, मंदिर के नाम में बदलाव कब और क्यों हुआ, इसकी स्पष्ट वजह की काेई पुष्टि नहीं हो सकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मेलडी माता नाम का प्रचलन किसी विशेष धार्मिक परंपरा, प्रतिमा की स्थापना या स्थानीय मान्यता के कारण बढ़ा। गुजरात की लोककथा में मेलडी माता का उल्लेख गुजरात की लोकमान्यताओं में मेलडी माता को लेकर एक कथा प्रचलित है। इसके अनुसार, देवी पार्वती ने अमुहा नाम के राक्षस का वध करने के लिए मेलडी माता का रूप धारण किया था। कुछ परंपराओं में उन्हें ‘मां मसान मेलडी’ भी कहा जाता है। यहां ‘मसान’ का संबंध श्मशान से जोड़ा जाता है। कुछ स्थानों पर मेलडी माता की पूजा श्मशान और तांत्रिक परंपराओं से भी जुड़ी मानी जाती है। ये लोककथाएं और धार्मिक मान्यताएं हैं, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित घटना नहीं माना जा सकता। उज्जैन के सती माता मंदिर में पेड़ों पर टंगी तस्वीरें, कीलें, सैंडल और कपड़ों के पुतले लोगों की जिज्ञासा बढ़ाते हैं। इनके पीछे शत्रु नाश के पूजन की मान्यता स्थानीय स्तर पर प्रचलित है, लेकिन इन कर्मकांडों के प्रभाव और इनके वास्तविक उद्देश्य की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ये खबर भी पढ़ें… मुहूर्त नहीं मिले तो मां जालपा निकालती हैं लग्नपत्री नेपाल के प्रसिद्ध जालपा देवी मंदिर के बारे में तो आपने सुना होगा, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि मध्य प्रदेश के राजगढ़ में भी मां जालपा का धाम है। शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे-52 के पास घने जंगल के बीच ऊंची टेकरी पर स्थित मां जालपा का यह धाम न केवल श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी सैकड़ों साल पुरानी अनोखी परंपराओं, मन्नत के अनूठे तरीकों और ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए भी पहचाना जाता है।पूरी खबर पढ़ें…

