मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे राज्य के 1 लाख 60 हजार 201 बाढ़ पीड़ित परिवारों को 112 करोड़ 14 लाख रुपए का अनुदान सीधे उनके बैंक खातों में भेजा। हर परिवार को 7000 रुपए दिए गए। अनुदान वितरण कार्यक्रम लाइव दिखाया गया, जिसका प्रसारण राज्य के सभी जिलों में हुआ। पूर्णिया के समाहरणालय स्थित सूचना विज्ञान केंद्र में भी इसका सीधा प्रसारण आयोजित किया गया। इस दौरान पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने बाढ़ राहत कार्यों, सहायता राशि के चरणों और प्रशासन के एहतियाती कदमों की जानकारी दी। पूर्णिया डीएम अंशुल कुमार ने बताया कि 15 सितंबर को आयोजित प्रथम चरण के कार्यक्रम के तहत पूर्णिया में लगभग 23,866 बाढ़ पीड़ित परिवारों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 16 करोड़ 70 लाख 62 हजार रुपये की बड़ी राशि सीधे बैंक खाते में भेजी गई थी। सोमवार को दूसरे चरण के अंतर्गत छूटे हुए 2,896 पीड़ित परिवारों के खातों में 2 करोड़ 2 लाख 72 हजार रुपए की राशि का वितरण किया गया है। 3,200 नए परिवार चिह्नित पूर्णिया डीएम अंशुल कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन ने अपनी जमीनी सर्वे और पहचान प्रक्रिया के तहत लगभग 3,200 और नए परिवारों को चिह्नित किया है। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सत्यापन कार्य पूरा होने के बाद इन शेष परिवारों को भी आगामी समय में जल्द से जल्द अनुग्रह राशि का लाभ मिल सके।
कृषि इनपुट सब्सिडी और फसल क्षति मुआवजा बाढ़ के कारण सिर्फ आवासीय नुकसान ही नहीं, बल्कि किसानों को व्यापक स्तर पर कृषि और फसल की क्षति उठानी पड़ी है। इस विषय पर जानकारी देते हुए डीएम अंशुल कुमार ने बताया कि जिले की विभिन्न पंचायतों से किसानों के लगभग 12,000 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों की जांच प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले 2 से 3 दिनों में मुख्यमंत्री के माध्यम से कृषि इनपुट सब्सिडी की राशि भी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेज दी जाएगी, ताकि वे अपनी आजीविका को पुनर्जीवित कर सकें। 1,000 सूखा राशन के पैकेटों का वितरण जिला पदाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि आपदा की घड़ी में केवल आर्थिक सहायता ही एकमात्र उपाय नहीं है, बल्कि पीड़ितों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करना भी प्रशासन की प्राथमिकता रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं । उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 1,000 सूखा राशन के पैकेटों का वितरण किया गया। आवश्यकतानुसार जरूरतमंदों को पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराई गईं। जल जनित बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए विभिन्न स्थानों पर मेडिकल कैंप का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे राज्य के 1 लाख 60 हजार 201 बाढ़ पीड़ित परिवारों को 112 करोड़ 14 लाख रुपए का अनुदान सीधे उनके बैंक खातों में भेजा। हर परिवार को 7000 रुपए दिए गए। अनुदान वितरण कार्यक्रम लाइव दिखाया गया, जिसका प्रसारण राज्य के सभी जिलों में हुआ। पूर्णिया के समाहरणालय स्थित सूचना विज्ञान केंद्र में भी इसका सीधा प्रसारण आयोजित किया गया। इस दौरान पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने बाढ़ राहत कार्यों, सहायता राशि के चरणों और प्रशासन के एहतियाती कदमों की जानकारी दी। पूर्णिया डीएम अंशुल कुमार ने बताया कि 15 सितंबर को आयोजित प्रथम चरण के कार्यक्रम के तहत पूर्णिया में लगभग 23,866 बाढ़ पीड़ित परिवारों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 16 करोड़ 70 लाख 62 हजार रुपये की बड़ी राशि सीधे बैंक खाते में भेजी गई थी। सोमवार को दूसरे चरण के अंतर्गत छूटे हुए 2,896 पीड़ित परिवारों के खातों में 2 करोड़ 2 लाख 72 हजार रुपए की राशि का वितरण किया गया है। 3,200 नए परिवार चिह्नित पूर्णिया डीएम अंशुल कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन ने अपनी जमीनी सर्वे और पहचान प्रक्रिया के तहत लगभग 3,200 और नए परिवारों को चिह्नित किया है। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सत्यापन कार्य पूरा होने के बाद इन शेष परिवारों को भी आगामी समय में जल्द से जल्द अनुग्रह राशि का लाभ मिल सके।
कृषि इनपुट सब्सिडी और फसल क्षति मुआवजा बाढ़ के कारण सिर्फ आवासीय नुकसान ही नहीं, बल्कि किसानों को व्यापक स्तर पर कृषि और फसल की क्षति उठानी पड़ी है। इस विषय पर जानकारी देते हुए डीएम अंशुल कुमार ने बताया कि जिले की विभिन्न पंचायतों से किसानों के लगभग 12,000 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों की जांच प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले 2 से 3 दिनों में मुख्यमंत्री के माध्यम से कृषि इनपुट सब्सिडी की राशि भी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेज दी जाएगी, ताकि वे अपनी आजीविका को पुनर्जीवित कर सकें। 1,000 सूखा राशन के पैकेटों का वितरण जिला पदाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि आपदा की घड़ी में केवल आर्थिक सहायता ही एकमात्र उपाय नहीं है, बल्कि पीड़ितों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करना भी प्रशासन की प्राथमिकता रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं । उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 1,000 सूखा राशन के पैकेटों का वितरण किया गया। आवश्यकतानुसार जरूरतमंदों को पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराई गईं। जल जनित बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए विभिन्न स्थानों पर मेडिकल कैंप का सफलतापूर्वक संचालन किया गया।

