सुबह का वक्त… नदी किनारे कोई अपने पिता के लिए तर्पण करता दिखा तो कोई मां और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान में जुटा था। नदी के किनारे वैदिक मंत्रोच्चार गूंजते रहे। हाथों में जल और पिंड लिए श्रद्धालु पुरोहितों के निर्देश पर एक के बाद एक धार्मिक अनुष्ठान पूरा करते रहे। यह नजारा है पुनपुन नदी के घाट पर पितृपक्ष के पहले दिन शुक्रवार को देखने को मिला। यहां करीब एक हजार श्रद्धालु पुनपुन घाट पर पिंडदान करने पहुंचे थे। महाराष्ट्र, राजस्थान और नेपाल समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं के लिए पुनपुन केवल एक नदी घाट नहीं, बल्कि पितरों के मोक्ष की यात्रा का पहला पड़ाव है। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाले पितृपक्ष मेले के पहले ही दिन घाट पर उमड़ी भीड़ ने आने वाले दिनों की तस्वीर दिखा दी। ऐसे में प्रशासन की तैयारी कैसी है, पढ़िए यह पूरी रिपोर्ट… पहले देखिए पितृपक्ष मेले के पहले दिन की तस्वीर… पुरोहित के मार्गदर्शन में किया श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान घाट पर बुजुर्गों के साथ युवा और महिलाएं भी पिंडदान के लिए पहुंचीं। कई परिवार अपने साथ वर्षों से जुड़े पुरोहितों को लेकर आए थे, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्थानीय पंडितों के मार्गदर्शन में अनुष्ठान किया। श्रद्धालु पहले पुनपुन नदी में स्नान करते, फिर नदी किनारे बैठकर पितरों को जल अर्पित करते। इसके बाद आटा और अन्य सामग्री से पिंड बनाकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तर्पण और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की गई। घाट पर परिवारों के समूह में पूजा करने का दृश्य भी देखने को मिला। किसी परिवार में बुजुर्ग आगे बैठे थे तो युवा सदस्य पूजा की सामग्री जुटाने में लगे थे। कई लोग अपने पूर्वजों के नाम और गोत्र का उच्चारण कर पुरोहितों से विधि पूरी कराते नजर आए। अब जानें क्यों ‘मोक्ष का प्रथम द्वार’ माना जाता है पुनपुन घाट पिंडदान कराने वाले ब्राह्मण राकेश मिश्रा बताते हैं कि सनातन परंपरा में पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पुनपुन नदी का तट पिंडदान की यात्रा का पहला प्रमुख स्थान माना जाता है। उनके अनुसार, पुनपुन को ‘मोक्ष का प्रथम द्वार’ भी कहा जाता है। यहां पिंडदान और तर्पण करने के बाद श्रद्धालु गया जाते हैं और फल्गु नदी के तट पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता में गया क्षेत्र में 46 वेदियों का उल्लेख मिलता है। इनमें 45 वेदियां गया में और एक प्रमुख वेदी पुनपुन में मानी जाती है। इसी वजह से पितृपक्ष में पुनपुन घाट पर पिंडदान की परंपरा का विशेष महत्व है। महाराष्ट्र से लेकर नेपाल तक के पिंडदानी पहुंचते हैं पुनपुन घाट पुनपुन घाट पर हर वर्ष देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा नेपाल से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। पुरोहितों के अनुसार महाराष्ट्र से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी रहती है। राकेश मिश्रा बताते हैं कि पहले महाराष्ट्र की कई फिल्मी हस्तियां और नेपाल के महाराज भी पुनपुन घाट पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण कर चुके हैं। इस बार भी कई विशिष्ट लोगों के यहां आने की संभावना जताई जा रही है। पहले दिन ही करीब एक हजार श्रद्धालु, आगे बढ़ेगी भीड़ पितृपक्ष के पहले दिन करीब एक हजार पिंडदानियों के पहुंचने से घाट पर चहल-पहल बनी रही। पुरोहितों के अनुसार आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में भीड़ नियंत्रण के साथ घाट पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश, शौचालय और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए अहम होगा। स्थानीय पुरोहितों का कहना है कि हर साल पिंडदानियों की संख्या बढ़ रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुपात में स्थायी सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। पुनपुन घाट में श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था, देखें तस्वीर… मेले का उद्घाटन, प्रशासन ने संभाली व्यवस्था पितृपक्ष मेले के पहले दिन पुनपुन घाट पर कार्यक्रम आयोजित कर मेले का उद्घाटन किया गया। मसौढ़ी विधायक अरुण मांझी ने मेले का उद्घाटन किया। इस दौरान मसौढ़ी अनुमंडल के पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए घाट और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती की गई है। भीड़ को देखते हुए प्रशासनिक निगरानी भी बढ़ाई गई है। डीएम-एसएसपी ने घाट का जायजा लिया शुक्रवार देर शाम पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार और वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा भी पुनपुन घाट पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने घाट और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया। अधिकारियों ने संबंधित पदाधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर आवश्यक निर्देश दिए। भीड़ बढ़ने की स्थिति में यातायात को सुचारू रखने और घाट पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर भी निगरानी की जा रही है। पुरोहित बोले- धर्मशाला और सुविधाओं का विस्तार जरूरी पंडित राकेश मिश्रा का कहना है कि जिला प्रशासन और सरकार की ओर से घाट पर कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए व्यवस्था को और व्यापक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पुनपुन घाट के आसपास बेहतर धर्मशाला का निर्माण होना चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां ठहर सकें। इसके अलावा नियमित साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था को भी मजबूत करने की जरूरत है। प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को सुचारू रखने की चुनौती पहले दिन की भीड़ ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में पुनपुन घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने वाली है। अब प्रशासन के सामने चुनौती धार्मिक आयोजन की गरिमा बनाए रखते हुए भीड़, यातायात, सफाई, पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं को लगातार सुचारू रखने की है। सुबह का वक्त… नदी किनारे कोई अपने पिता के लिए तर्पण करता दिखा तो कोई मां और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान में जुटा था। नदी के किनारे वैदिक मंत्रोच्चार गूंजते रहे। हाथों में जल और पिंड लिए श्रद्धालु पुरोहितों के निर्देश पर एक के बाद एक धार्मिक अनुष्ठान पूरा करते रहे। यह नजारा है पुनपुन नदी के घाट पर पितृपक्ष के पहले दिन शुक्रवार को देखने को मिला। यहां करीब एक हजार श्रद्धालु पुनपुन घाट पर पिंडदान करने पहुंचे थे। महाराष्ट्र, राजस्थान और नेपाल समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं के लिए पुनपुन केवल एक नदी घाट नहीं, बल्कि पितरों के मोक्ष की यात्रा का पहला पड़ाव है। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाले पितृपक्ष मेले के पहले ही दिन घाट पर उमड़ी भीड़ ने आने वाले दिनों की तस्वीर दिखा दी। ऐसे में प्रशासन की तैयारी कैसी है, पढ़िए यह पूरी रिपोर्ट… पहले देखिए पितृपक्ष मेले के पहले दिन की तस्वीर… पुरोहित के मार्गदर्शन में किया श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान घाट पर बुजुर्गों के साथ युवा और महिलाएं भी पिंडदान के लिए पहुंचीं। कई परिवार अपने साथ वर्षों से जुड़े पुरोहितों को लेकर आए थे, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्थानीय पंडितों के मार्गदर्शन में अनुष्ठान किया। श्रद्धालु पहले पुनपुन नदी में स्नान करते, फिर नदी किनारे बैठकर पितरों को जल अर्पित करते। इसके बाद आटा और अन्य सामग्री से पिंड बनाकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तर्पण और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की गई। घाट पर परिवारों के समूह में पूजा करने का दृश्य भी देखने को मिला। किसी परिवार में बुजुर्ग आगे बैठे थे तो युवा सदस्य पूजा की सामग्री जुटाने में लगे थे। कई लोग अपने पूर्वजों के नाम और गोत्र का उच्चारण कर पुरोहितों से विधि पूरी कराते नजर आए। अब जानें क्यों ‘मोक्ष का प्रथम द्वार’ माना जाता है पुनपुन घाट पिंडदान कराने वाले ब्राह्मण राकेश मिश्रा बताते हैं कि सनातन परंपरा में पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पुनपुन नदी का तट पिंडदान की यात्रा का पहला प्रमुख स्थान माना जाता है। उनके अनुसार, पुनपुन को ‘मोक्ष का प्रथम द्वार’ भी कहा जाता है। यहां पिंडदान और तर्पण करने के बाद श्रद्धालु गया जाते हैं और फल्गु नदी के तट पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता में गया क्षेत्र में 46 वेदियों का उल्लेख मिलता है। इनमें 45 वेदियां गया में और एक प्रमुख वेदी पुनपुन में मानी जाती है। इसी वजह से पितृपक्ष में पुनपुन घाट पर पिंडदान की परंपरा का विशेष महत्व है। महाराष्ट्र से लेकर नेपाल तक के पिंडदानी पहुंचते हैं पुनपुन घाट पुनपुन घाट पर हर वर्ष देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा नेपाल से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। पुरोहितों के अनुसार महाराष्ट्र से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी रहती है। राकेश मिश्रा बताते हैं कि पहले महाराष्ट्र की कई फिल्मी हस्तियां और नेपाल के महाराज भी पुनपुन घाट पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण कर चुके हैं। इस बार भी कई विशिष्ट लोगों के यहां आने की संभावना जताई जा रही है। पहले दिन ही करीब एक हजार श्रद्धालु, आगे बढ़ेगी भीड़ पितृपक्ष के पहले दिन करीब एक हजार पिंडदानियों के पहुंचने से घाट पर चहल-पहल बनी रही। पुरोहितों के अनुसार आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में भीड़ नियंत्रण के साथ घाट पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश, शौचालय और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए अहम होगा। स्थानीय पुरोहितों का कहना है कि हर साल पिंडदानियों की संख्या बढ़ रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुपात में स्थायी सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। पुनपुन घाट में श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था, देखें तस्वीर… मेले का उद्घाटन, प्रशासन ने संभाली व्यवस्था पितृपक्ष मेले के पहले दिन पुनपुन घाट पर कार्यक्रम आयोजित कर मेले का उद्घाटन किया गया। मसौढ़ी विधायक अरुण मांझी ने मेले का उद्घाटन किया। इस दौरान मसौढ़ी अनुमंडल के पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए घाट और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती की गई है। भीड़ को देखते हुए प्रशासनिक निगरानी भी बढ़ाई गई है। डीएम-एसएसपी ने घाट का जायजा लिया शुक्रवार देर शाम पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार और वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा भी पुनपुन घाट पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने घाट और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया। अधिकारियों ने संबंधित पदाधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर आवश्यक निर्देश दिए। भीड़ बढ़ने की स्थिति में यातायात को सुचारू रखने और घाट पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर भी निगरानी की जा रही है। पुरोहित बोले- धर्मशाला और सुविधाओं का विस्तार जरूरी पंडित राकेश मिश्रा का कहना है कि जिला प्रशासन और सरकार की ओर से घाट पर कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए व्यवस्था को और व्यापक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पुनपुन घाट के आसपास बेहतर धर्मशाला का निर्माण होना चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां ठहर सकें। इसके अलावा नियमित साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था को भी मजबूत करने की जरूरत है। प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को सुचारू रखने की चुनौती पहले दिन की भीड़ ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में पुनपुन घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने वाली है। अब प्रशासन के सामने चुनौती धार्मिक आयोजन की गरिमा बनाए रखते हुए भीड़, यातायात, सफाई, पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं को लगातार सुचारू रखने की है।

