पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी में करियर बनाने का मौका:नालंदा यूनिवर्सिटी करा रही एग्जीक्यूटिव सर्टिफिकेट कोर्स, 15 नवंबर तक अर्ली-बर्ड डिस्काउंट

पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी में करियर बनाने का मौका:नालंदा यूनिवर्सिटी करा रही एग्जीक्यूटिव सर्टिफिकेट कोर्स, 15 नवंबर तक अर्ली-बर्ड डिस्काउंट

बढ़ते जलवायु संकट और कार्बन उत्सर्जन की वैश्विक चुनौतियों के बीच नालंदा विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक एवं पर्यावरण-अनुकूल ‘नेट-जीरो कैंपस’ में आगामी 25 से 28 दिसंबर 2026 तक चार दिवसीय विशेष ‘एग्जीक्यूटिव सर्टिफिकेट कोर्स इन नेट-जीरो एंबेसडर एंड सस्टेनेबिलिटी लीडरशिप’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कॉरपोरेट जगत के अधिकारियों, सस्टेनेबिलिटी प्रोफेशनल्स, शोधार्थियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को हरित भविष्य और कार्बन मुक्त कार्यप्रणाली की दिशा में नेतृत्व करने के लिए तैयार करना है। यह सर्टिफिकेट कार्यक्रम विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग तथा ‘सेंटर फॉर नेट जीरो एजुकेशन, एक्सचेंज एंड ट्रांसफॉर्मेशन’ और ‘एनवायरनमेंटल डिजाइन सॉल्यूशंस’ के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जाएगा। सैद्धांतिक सत्रों के साथ जमीनी हकीकत दिखाएगा चार दिवसीय प्रशिक्षण चार दिनों के इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी बारीकियों के समन्वय के साथ तैयार किया गया है। पहले दिन प्रतिभागियों को नेट-जीरो की बुनियादी अवधारणाओं, वैश्विक व भारतीय परिप्रेक्ष्य और सतत विकास के सामाजिक-आर्थिक मॉडल से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही प्रतिभागियों को नालंदा विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक परिसर का व्यापक फील्ड विजिट कराया जाएगा, जहां वे हरित भवन निर्माण तकनीक, टिकाऊ सामग्री, ऊर्जा दक्षता तथा जल और अपशिष्ट प्रबंधन की जमीनी व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे। आगामी सत्रों में ऊर्जा दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी, स्वदेशी व पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों और नेट-जीरो वेस्ट.की वैश्विक कार्यप्रणालियों पर विस्तृत चर्चा होगी। कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्थागत बदलाव के लिए आवश्यक व्यवहार परिवर्तन, ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग प्रणाली, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, ईएसजी मानकों तथा कार्बन और एमिशन ट्रेडिंग जैसे आधुनिक वित्तीय व नीतिगत पहलुओं पर गहन मंथन किया जाएगा। कार्यकारियों के लिए हाइब्रिड विकल्प, आवास सुविधा और विशेष छूट का प्रावधान पेशेवरों की व्यस्त दिनचर्या को देखते हुए आयोजकों ने इस पाठ्यक्रम में एक लचीला विकल्प भी जोड़ा है। प्रतिभागी चाहें तो पहले दिन के आधारभूत सत्र के बाद एग्जिट कर सकते हैं, अथवा दूसरे दिन से ऑनलाइन माध्यम से शेष कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं। केवल पहले दिन के एग्जीक्यूटिव सत्र के लिए शुल्क 10,000 रुपये तय किया गया है, जबकि पूरे चार दिवसीय आवासीय पाठ्यक्रम का कुल शुल्क 25,000 रुपये निर्धारित है। परिसर में ठहरने के इच्छुक प्रतिभागियों के लिए एकल आवास 5,000 रुपये और साझा आवास 3,000 रुपये के अतिरिक्त शुल्क पर उपलब्ध कराया गया है, जिसमें नाश्ता और रात्रिभोज शामिल रहेगा, जबकि दोपहर का भोजन सभी प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क रहेगा। इसके अलावा, आगामी 15 नवंबर 2026 तक अर्ली-बर्ड पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों, शोधार्थियों और सरकारी कर्मचारियों को 5,000 रुपये की विशेष छूट दी जा रही है। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना पंजीकरण सुनिश्चित कर सकते हैं। बढ़ते जलवायु संकट और कार्बन उत्सर्जन की वैश्विक चुनौतियों के बीच नालंदा विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक एवं पर्यावरण-अनुकूल ‘नेट-जीरो कैंपस’ में आगामी 25 से 28 दिसंबर 2026 तक चार दिवसीय विशेष ‘एग्जीक्यूटिव सर्टिफिकेट कोर्स इन नेट-जीरो एंबेसडर एंड सस्टेनेबिलिटी लीडरशिप’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कॉरपोरेट जगत के अधिकारियों, सस्टेनेबिलिटी प्रोफेशनल्स, शोधार्थियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को हरित भविष्य और कार्बन मुक्त कार्यप्रणाली की दिशा में नेतृत्व करने के लिए तैयार करना है। यह सर्टिफिकेट कार्यक्रम विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग तथा ‘सेंटर फॉर नेट जीरो एजुकेशन, एक्सचेंज एंड ट्रांसफॉर्मेशन’ और ‘एनवायरनमेंटल डिजाइन सॉल्यूशंस’ के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जाएगा। सैद्धांतिक सत्रों के साथ जमीनी हकीकत दिखाएगा चार दिवसीय प्रशिक्षण चार दिनों के इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी बारीकियों के समन्वय के साथ तैयार किया गया है। पहले दिन प्रतिभागियों को नेट-जीरो की बुनियादी अवधारणाओं, वैश्विक व भारतीय परिप्रेक्ष्य और सतत विकास के सामाजिक-आर्थिक मॉडल से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही प्रतिभागियों को नालंदा विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक परिसर का व्यापक फील्ड विजिट कराया जाएगा, जहां वे हरित भवन निर्माण तकनीक, टिकाऊ सामग्री, ऊर्जा दक्षता तथा जल और अपशिष्ट प्रबंधन की जमीनी व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे। आगामी सत्रों में ऊर्जा दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी, स्वदेशी व पारंपरिक जल संचयन प्रणालियों और नेट-जीरो वेस्ट.की वैश्विक कार्यप्रणालियों पर विस्तृत चर्चा होगी। कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्थागत बदलाव के लिए आवश्यक व्यवहार परिवर्तन, ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग प्रणाली, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, ईएसजी मानकों तथा कार्बन और एमिशन ट्रेडिंग जैसे आधुनिक वित्तीय व नीतिगत पहलुओं पर गहन मंथन किया जाएगा। कार्यकारियों के लिए हाइब्रिड विकल्प, आवास सुविधा और विशेष छूट का प्रावधान पेशेवरों की व्यस्त दिनचर्या को देखते हुए आयोजकों ने इस पाठ्यक्रम में एक लचीला विकल्प भी जोड़ा है। प्रतिभागी चाहें तो पहले दिन के आधारभूत सत्र के बाद एग्जिट कर सकते हैं, अथवा दूसरे दिन से ऑनलाइन माध्यम से शेष कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं। केवल पहले दिन के एग्जीक्यूटिव सत्र के लिए शुल्क 10,000 रुपये तय किया गया है, जबकि पूरे चार दिवसीय आवासीय पाठ्यक्रम का कुल शुल्क 25,000 रुपये निर्धारित है। परिसर में ठहरने के इच्छुक प्रतिभागियों के लिए एकल आवास 5,000 रुपये और साझा आवास 3,000 रुपये के अतिरिक्त शुल्क पर उपलब्ध कराया गया है, जिसमें नाश्ता और रात्रिभोज शामिल रहेगा, जबकि दोपहर का भोजन सभी प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क रहेगा। इसके अलावा, आगामी 15 नवंबर 2026 तक अर्ली-बर्ड पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों, शोधार्थियों और सरकारी कर्मचारियों को 5,000 रुपये की विशेष छूट दी जा रही है। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना पंजीकरण सुनिश्चित कर सकते हैं।  

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