पत्रिका पड़ताल: दिवाली की खरीददारी में 1 चिंगारी से न्यू मार्केट में मच सकती है तबाही, 8 ट्रांसफॉर्मर बने खतरा

पत्रिका पड़ताल: दिवाली की खरीददारी में 1 चिंगारी से न्यू मार्केट में मच सकती है तबाही, 8 ट्रांसफॉर्मर बने खतरा

Bhopal news: मध्यप्रदेश में भोपाल शहर का न्यू मार्केट कागजी सुरक्षा और प्रशासनिक बेरुखी के भरोसे ही सांस ले रहा है। स्थिति ये कि आठ अक्टूबर को छोले-भटूरे की दुकान में उठी चिंगारी की भयावहता भी जिम्मेदारों की नींद नहीं खोल पाई। पूरे बाजार में बिजली की आपूर्ति के आठ ट्रांसफार्मर है जो शॉर्ट सर्किट की स्थितियां बना रहे है। हैरानी ये कि यहां की 1200 दुकान समेत पूरे बाजार में अग्रि सुरक्षा के अब तक कोई इंतजाम नजर नहीं आए। जबकि त्यौहारी सीजन में बाजार में खरीदारों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। नवरात्रि और दशहरा के बाद दिवाली की खरीदारी पूरे बाजार को व्यस्त रखेगी, इसमें सबसे बड़ा सवाल लोगों की सुरक्षा का है, जो कहीं नजर नहीं आ रही।

इन 4 बिंदुओं पर तुरंत ध्यान देना जरूरी

-सुरक्षा कॉरिडोर के तहत संकरी गलियों से तुरंत अतिक्रमण हटाकर एंबुलेंस और दमकल वाहनों के लिए रास्ता क्लियर कराया जाए।
-बिजली और ट्रांसफॉर्मर की शिफ्टिंग हो। ट्रांसफॉर्मर के नीचे से दुकानों को तुरंत हटाया जाए और झूलते तारों को कवर/अंडरग्राउंड किया जाए।
-फायर ऑडिट और नोटिस दें। नगर निगम और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीम हर छोटी-बड़ी दुकान का फायर ऑडिट करे। बिना
-अग्निशमन यंत्रों वाली दुकानों पर सख्त कार्रवाई हो।
-पुलिस बूथ की सक्रिय हो। बूथ में 24/7 बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके।

ऐसे समझें स्थितियां

ट्रांसफॉर्मर के नीचे कपड़ों का ढेर, सिर के ऊपर बिठा मौत का जाल

न्यू मार्केट के निरीक्षण के दौरान आठ भारी-भरकम बिजली के ट्रांसफॉर्मर खुले पाए गए। हैरान करने वाली बात यह है कि बीच बाजार में लगे इन ट्रांसफॉर्मरों के ठीक नीचे कपड़ों की दुकानें सजाई जा रही हैं। हाई-वोल्टेज तारों का जाल दुकानों को छूता हुआ गुजर रहा है। हल्का सा शॉर्ट सर्किट भी सूती और सिंथेटिक कपड़ों के ढेर में आग लगाने के लिए काफी है, लेकिन बिजली कंपनी और नगर निगम के अधिकारियों को यह सरासर लापरवाही दिखाई नहीं दे रही।

रेस्टोरेंट का किचन बाहरबगल में जलने वाला सामान… एनओसी पर सवालबाजार में कम से कम चार प्रसिद्ध रेस्टोरेंट और छोले-भटूरे की दुकानें संचालित हो रही हैं, जिनका कुकिंग एरिया खुले में बाहर की तरफ है। इनके ठीक सटकर कपड़ों और प्लास्टिक के सामान की दुकानें हैं। एलपीजी सिलेंडर, खुला चूल्हा और ज्वलनशील कपड़ों का यह संयोजन कभी भी विकराल रूप ले सकता है। सवाल उठता है कि बिना फायर सेफ्टी गाइडलाइंस और सुरक्षा एनओसी के ये दुकानें भीड़भाड़ वाले इलाके में कैसे चल रही हैं?

ताले में बंब पुलिस बूथ, बनेगा मववगार ?

लाखों की आवाजाही और छेड़छाड़/चोरी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए बाजार के मुहाने पर पुलिस बूथ तो बना दिया गया है, लेकिन सोमवार को उस पर बड़ा सा ताला लटका मिला। जब हजारों लोग रोजाना खरीदारी के लिए आ रहे हैं, तो सुरक्षा कर्मियों का नदारद होना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

दमकल और एंबुलेंस का रास्ता बंद, आपात स्थिति में कैसे बचेगी जान ?

न्यू मार्केट की संकरी गलियों पर दुकानदारों और ठेले-रेहड़ी वालों का इस कदर अतिक्रमण है कि पैदल चलना भी दूभर है। यदि आज फिर कोई हादसा होता है, तो फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस का गलियों के अंदर प्रवेश करना पूरी तरह असंभव है। पूरे बाजार में न तो इमरजेंसी वाटर हाइड्रेट/ टैंक की व्यवस्था है और ना ही दुकानों में अग्निशमन यंत्र टांगे गए हैं। जब पत्रिका टीम ने दुकानदारों से पूछा कि यदि दोबारा आग लगती है तो वे क्या करेंगे? तो उनका सीधा जवाब था, हम तो दमकल को फोन करेंगे, बाकी सब सरकार के भरोसे है।

इनका क्या है कहना…

न्यू मार्केट में जिस तरह की स्थितियां बन रही थी, उसे लेकर मैं निगमायुक्त से मिला था। उन्हें बताया था कि यहां लगा झूला और झांकी दायरे से बाहर है। इसे व्यवस्थित करें, लेकिन नहीं किया। आग लगी तो फायर ब्रिगेड झूले की जगह ही अटकी थी, लेकिन अब तक इसे हटाया नहीं गया। – प्रदीप गुप्ता, अध्यक्ष न्यू मार्केट व्यापारी संघ

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