नालंदा में मजदूरी मांगने की कीमत एक युवक को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। इतना ही नहीं आरोपी ने मौत से पहले ही मजदूर की जान की कीमत लगाई। पंचायत के मुखिया ने पंचायती कर अपनेलेटर पैड पर सुलहनामा तैयार किया। इसमें मृतक के भाई से लिखवाया गया कि इलाज का खर्च 2.65 लाख रुपए दिया जा रहा है। इलाज के दौरान मौत होने पर इसकी जवाबदेही दिलीप कुमार की नहीं होगी। दरअसर, जिले के दरुआरा बेलदारी गांव में मजदूरी मांगने पर कामो चौहान (30) को 4 अक्टूबर को आरोपी ने खौलते तेल की कड़ाही में धकेल दिया। गंभीर रूप से झुलसे कामौ की आठ दिनों तक चले इलाज के बाद मौत हो गई। घटना नूरसराय थाना क्षेत्र की है। सिलसिलेवार तरीके से जानिए कैसे अपने हक के पैसे मांगने पर हत्या हुई और कैसे पंचायत में जान की कीमत तय हुई…. कुछ दिन पहले ही वापस घर लौटा था कामो चौहान दूसरे प्रदेश में रहकर ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करता था। कुछ दिन पहले ही अपने घर लौटा था। इस बीच कोंदी गांव के रहने वाले चाचा-भतीजा दिलीप और राजा उसे हलवाई के काम में हाथ बंटाने के लिए दरुआरा बथानी पर आयोजित एक ब्रह्मभोज में ले गए थे। कामौ के बड़े भाई सूबे चौहान ने बताया कि घटना 4 अक्टूबर की रात की है। रात करीब 8 बजे काम खत्म होने के बाद पैसा मांगने पर वो लोग भड़क गए। दोनों पक्षों में विवाद और गाली-गलौज शुरू हो गया। इस बीच आरोपियों ने पहले भाई के साथ जमकर मारपीट की और फिर उसे खौलते तेल की कड़ाही में धकेल दिया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया। 90 फीसदी तक झुलसा कड़ाही में गिरने से गर्दन के नीचे का पूरा हिस्सा यानी शरीर का करीब 90% हिस्सा बुरी तरह झुलस गया था। वारदात के बाद आरोपी उसे बिहार शरीफ सदर अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे पावापुरी विम्स रेफर कर दिया। सूचना मिलने के बाद परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे, इस बीच आरोप फरार हो गए। इलाज के लिए पटना तक ले गए जानकारी के मुताबिक कामो को बेहतर इलाज के लिए परिवार के लोग पटना ले गए। हालत में सुधार न होने पर रिम्स और फिर प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसने सोमवार की सुबह दम तोड़ दिया। इलाज में करीब 6 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च हो गई। मृतक अपने पीछे दो बेटे और दो बेटियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गया है। पंचायत के लेटरपैड पर हुआ था ‘सुलहनामा’ इस पूरे मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ग्राम पंचायत राज दरुआरा के मुखिया (मणिशंकर गुप्ता) के आधिकारिक लेटरपैड पर लिखा एक कथित समझौता पत्र सामने आया है। 6 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले इस पत्र (पत्रांक 306/26) में यह लिखा गया है कि कामो चौहान काम के दौरान ‘किसी कारणवश’ तेल में गिर गया था। ग्रामीणों के दबाव और इलाज के खर्च को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच 2,65,000 रुपए में आपसी समझौता कराया गया था। समझौते के तहत 65,000 रुपए कैश दिए गए और बाकी 2,00,000 रुपए 8 अक्टूबर तक देने की बात तय हुई थी। मौत की जिम्मेदारी नहीं होगी समझौते में यह शर्त भी लिखवाई गई थी कि अगर इलाज के दौरान कामो चौहान की मृत्यु होती है, तो इसकी जवाबदेही दिलीप कुमार की नहीं होगी। इस पत्र पर मुखिया के हस्ताक्षर-मुहर के साथ-साथ दोनों पक्षों, कई ग्रामीणों और गवाहों के अंगूठे के निशान दर्ज हैं। मुखिया को आपराधिक जिम्मेदारी से कानूनी छूट देने का अधिकार नहीं
मुखिया द्वारा ऐसा समझौता पत्र तैयार करना कानून की नजर में उचित नहीं है। खासकर तब, जब मजदूर की मौत की स्थिति में एक पक्ष को पहले से जिम्मेदारी से मुक्त करने की शर्त लिखी गई हो। मुखिया आपसी विवाद में सुलह कराने का प्रयासकर सकते हैं। उन्हें किसी व्यक्ति को आपराधिक जिम्मेदारी से कानूनी छूट देने का अधिकार नहीं है। इलाज के दौरान मजदूर की मौत होने पर दिलीप कुमार जिम्मेदार नहीं होगा। ऐसी शर्त भविष्य में संभावित आपराधिक जवाबदेही खत्म नहीं कर सकती। समझौते का इस्तेमाल पुलिस जांच को प्रभावित करने, घटना छिपाने, शिकायत से रोकने के लिए किया गया हो, तो दस्तावेज तैयार करने की परिस्थितियों की भी जांच की जा सकती है। लिखित आवेदन पर होगी कार्रवाई वहीं, इस संबंध में नूरसराय थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया गया है। लिखित आवेदन मिलते ही उचित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वारदात के बाद से फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। नालंदा में मजदूरी मांगने की कीमत एक युवक को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। इतना ही नहीं आरोपी ने मौत से पहले ही मजदूर की जान की कीमत लगाई। पंचायत के मुखिया ने पंचायती कर अपनेलेटर पैड पर सुलहनामा तैयार किया। इसमें मृतक के भाई से लिखवाया गया कि इलाज का खर्च 2.65 लाख रुपए दिया जा रहा है। इलाज के दौरान मौत होने पर इसकी जवाबदेही दिलीप कुमार की नहीं होगी। दरअसर, जिले के दरुआरा बेलदारी गांव में मजदूरी मांगने पर कामो चौहान (30) को 4 अक्टूबर को आरोपी ने खौलते तेल की कड़ाही में धकेल दिया। गंभीर रूप से झुलसे कामौ की आठ दिनों तक चले इलाज के बाद मौत हो गई। घटना नूरसराय थाना क्षेत्र की है। सिलसिलेवार तरीके से जानिए कैसे अपने हक के पैसे मांगने पर हत्या हुई और कैसे पंचायत में जान की कीमत तय हुई…. कुछ दिन पहले ही वापस घर लौटा था कामो चौहान दूसरे प्रदेश में रहकर ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करता था। कुछ दिन पहले ही अपने घर लौटा था। इस बीच कोंदी गांव के रहने वाले चाचा-भतीजा दिलीप और राजा उसे हलवाई के काम में हाथ बंटाने के लिए दरुआरा बथानी पर आयोजित एक ब्रह्मभोज में ले गए थे। कामौ के बड़े भाई सूबे चौहान ने बताया कि घटना 4 अक्टूबर की रात की है। रात करीब 8 बजे काम खत्म होने के बाद पैसा मांगने पर वो लोग भड़क गए। दोनों पक्षों में विवाद और गाली-गलौज शुरू हो गया। इस बीच आरोपियों ने पहले भाई के साथ जमकर मारपीट की और फिर उसे खौलते तेल की कड़ाही में धकेल दिया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया। 90 फीसदी तक झुलसा कड़ाही में गिरने से गर्दन के नीचे का पूरा हिस्सा यानी शरीर का करीब 90% हिस्सा बुरी तरह झुलस गया था। वारदात के बाद आरोपी उसे बिहार शरीफ सदर अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे पावापुरी विम्स रेफर कर दिया। सूचना मिलने के बाद परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे, इस बीच आरोप फरार हो गए। इलाज के लिए पटना तक ले गए जानकारी के मुताबिक कामो को बेहतर इलाज के लिए परिवार के लोग पटना ले गए। हालत में सुधार न होने पर रिम्स और फिर प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसने सोमवार की सुबह दम तोड़ दिया। इलाज में करीब 6 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च हो गई। मृतक अपने पीछे दो बेटे और दो बेटियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गया है। पंचायत के लेटरपैड पर हुआ था ‘सुलहनामा’ इस पूरे मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ग्राम पंचायत राज दरुआरा के मुखिया (मणिशंकर गुप्ता) के आधिकारिक लेटरपैड पर लिखा एक कथित समझौता पत्र सामने आया है। 6 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले इस पत्र (पत्रांक 306/26) में यह लिखा गया है कि कामो चौहान काम के दौरान ‘किसी कारणवश’ तेल में गिर गया था। ग्रामीणों के दबाव और इलाज के खर्च को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच 2,65,000 रुपए में आपसी समझौता कराया गया था। समझौते के तहत 65,000 रुपए कैश दिए गए और बाकी 2,00,000 रुपए 8 अक्टूबर तक देने की बात तय हुई थी। मौत की जिम्मेदारी नहीं होगी समझौते में यह शर्त भी लिखवाई गई थी कि अगर इलाज के दौरान कामो चौहान की मृत्यु होती है, तो इसकी जवाबदेही दिलीप कुमार की नहीं होगी। इस पत्र पर मुखिया के हस्ताक्षर-मुहर के साथ-साथ दोनों पक्षों, कई ग्रामीणों और गवाहों के अंगूठे के निशान दर्ज हैं। मुखिया को आपराधिक जिम्मेदारी से कानूनी छूट देने का अधिकार नहीं
मुखिया द्वारा ऐसा समझौता पत्र तैयार करना कानून की नजर में उचित नहीं है। खासकर तब, जब मजदूर की मौत की स्थिति में एक पक्ष को पहले से जिम्मेदारी से मुक्त करने की शर्त लिखी गई हो। मुखिया आपसी विवाद में सुलह कराने का प्रयासकर सकते हैं। उन्हें किसी व्यक्ति को आपराधिक जिम्मेदारी से कानूनी छूट देने का अधिकार नहीं है। इलाज के दौरान मजदूर की मौत होने पर दिलीप कुमार जिम्मेदार नहीं होगा। ऐसी शर्त भविष्य में संभावित आपराधिक जवाबदेही खत्म नहीं कर सकती। समझौते का इस्तेमाल पुलिस जांच को प्रभावित करने, घटना छिपाने, शिकायत से रोकने के लिए किया गया हो, तो दस्तावेज तैयार करने की परिस्थितियों की भी जांच की जा सकती है। लिखित आवेदन पर होगी कार्रवाई वहीं, इस संबंध में नूरसराय थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया गया है। लिखित आवेदन मिलते ही उचित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वारदात के बाद से फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

