नालंदा में खाद का लाइसेंस मिला पर पीओएस मशीन नहीं:50 से अधिक दुकानों में लटका ताला, बिना मशीन बिक्री पर रोक से कारोबारी बेहाल

नालंदा में खाद का लाइसेंस मिला पर पीओएस मशीन नहीं:50 से अधिक दुकानों में लटका ताला, बिना मशीन बिक्री पर रोक से कारोबारी बेहाल

नालंदा जिला कृषि विभाग की ओर से खुदरा खाद बिक्री का लाइसेंस तो जारी कर दिया गया, लेकिन इसके संचालन के लिए सबसे अनिवार्य पीओएस (पॉश) मशीन उपलब्ध कराने में विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। पिछले तीन महीनों से पीओएस मशीन वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह अटकी हुई है, जिसके चलते नालंदा जिले के 50 से अधिक नए लाइसेंसधारी अपनी दुकानें नहीं खोल पा रहे हैं। सरकारी नियमानुसार बिना पीओएस मशीन के खाद की एक भी बोरी बेचना सख्त मना है। ऐसे में कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और प्रतिदिन जिला कृषि कार्यालय के चक्कर काटने को विवश हैं। किराया भर रहे दुकानदार, धंधा पूरी तरह चौपट दुकानदारों का दर्द है कि उन्होंने खाद कारोबार के लिए पहले से ही बाजार में दुकानें किराए पर ले रखी हैं। विभाग से लाइसेंस मिलने के बाद उम्मीद जगी थी कि बिक्री शुरू होगी, लेकिन मशीन के अभाव में शटर तक नहीं उठ पा रहा है। अब स्थिति यह है कि बिना किसी आय के दुकानदारों को हर महीने सिर्फ दुकान का किराया और बिजली बिल भरना पड़ रहा है, जिससे उन्हें लगातार बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विभागीय लापरवाही के कारण व्यापारियों की जमा पूंजी डूबने की कगार पर पहुंच गई है। पैक्सों का भी बुरा हाल, खराब मशीनें बदलने वाला कोई नहीं इस अव्यवस्था की मार केवल निजी खुदरा विक्रेताओं पर ही नहीं, बल्कि पैक्सों पर भी पड़ी है। चंडी प्रखंड की गंगौरा, हिलसा की अरपा तथा नूरसराय प्रखंड की मेयार और बरारा पैक्स को खाद बिक्री का लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन मशीन के अभाव में वहां भी वितरण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। इसके अलावा जिले में पूर्व से संचालित कई दुकानों की पीओएस मशीनें खराब पड़ी हैं। इन खराब मशीनों को ठीक करने या उनकी जगह नई मशीन उपलब्ध कराने के लिए जिले में कोई तकनीकी व्यवस्था मौजूद नहीं है। एजेंसी नदारद, विभागीय कर्मियों की हो रही फजीहत विभागीय सूत्रों के अनुसार, जून माह में मुख्यालय द्वारा चयनित एजेंसी ने जिले में 1050 मशीनें बांटी थीं, लेकिन उसके बाद से एजेंसी का कोई अता-पता नहीं है। सटीक जानकारी के अभाव में प्रतिदिन कार्यालय पहुंचने वाले लाइसेंसधारियों के गुस्से का शिकार स्थानीय विभागीय कर्मियों को होना पड़ रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 1200 मशीनें वितरित हैं, जिनमें से केवल 654 ही सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। कई पुराने धारक बिक्री बंद किए बैठे हैं, जबकि नए लाइसेंसधारी एक-एक मशीन के लिए भटक रहे हैं। पीओएस मशीन की अनिवार्यता और लाइसेंस की शर्तें पारदर्शिता के लिए जिले में खाद की बिक्री केवल पीओएस मशीन के जरिए ही अनिवार्य की गई है। इंटरनेट से जुड़ी इस मशीन में किसान का आधार नंबर दर्ज कर बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही निर्धारित मात्रा में खाद और पक्की रसीद दी जाती है। खुदरा बिक्री लाइसेंस के लिए 1250 रुपये का सरकारी चालान लगता है और यह तीन साल के लिए मान्य होता है। इसके लिए आवेदक का रसायन विज्ञान से स्नातक होना अथवा कृषि विभाग से 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। जल्द मशीनें उपलब्ध कराने के प्रयास जारी: डीएओ मामले को लेकर नालंदा के जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने बताया कि मशीन वितरण और रखरखाव का जिम्मा मुख्यालय स्तर से चयनित एजेंसी का है। संबंधित एजेंसी को जल्द से जल्द मशीनें उपलब्ध कराने के लिए कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है और वरीय अधिकारियों को भी पूरी स्थिति से अवगत कराया गया है। विभाग का प्रयास है कि सभी लाइसेंसधारियों को शीघ्र मशीन दिलाकर खाद की नियमित बिक्री शुरू कराई जाए। नालंदा जिला कृषि विभाग की ओर से खुदरा खाद बिक्री का लाइसेंस तो जारी कर दिया गया, लेकिन इसके संचालन के लिए सबसे अनिवार्य पीओएस (पॉश) मशीन उपलब्ध कराने में विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। पिछले तीन महीनों से पीओएस मशीन वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह अटकी हुई है, जिसके चलते नालंदा जिले के 50 से अधिक नए लाइसेंसधारी अपनी दुकानें नहीं खोल पा रहे हैं। सरकारी नियमानुसार बिना पीओएस मशीन के खाद की एक भी बोरी बेचना सख्त मना है। ऐसे में कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और प्रतिदिन जिला कृषि कार्यालय के चक्कर काटने को विवश हैं। किराया भर रहे दुकानदार, धंधा पूरी तरह चौपट दुकानदारों का दर्द है कि उन्होंने खाद कारोबार के लिए पहले से ही बाजार में दुकानें किराए पर ले रखी हैं। विभाग से लाइसेंस मिलने के बाद उम्मीद जगी थी कि बिक्री शुरू होगी, लेकिन मशीन के अभाव में शटर तक नहीं उठ पा रहा है। अब स्थिति यह है कि बिना किसी आय के दुकानदारों को हर महीने सिर्फ दुकान का किराया और बिजली बिल भरना पड़ रहा है, जिससे उन्हें लगातार बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विभागीय लापरवाही के कारण व्यापारियों की जमा पूंजी डूबने की कगार पर पहुंच गई है। पैक्सों का भी बुरा हाल, खराब मशीनें बदलने वाला कोई नहीं इस अव्यवस्था की मार केवल निजी खुदरा विक्रेताओं पर ही नहीं, बल्कि पैक्सों पर भी पड़ी है। चंडी प्रखंड की गंगौरा, हिलसा की अरपा तथा नूरसराय प्रखंड की मेयार और बरारा पैक्स को खाद बिक्री का लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन मशीन के अभाव में वहां भी वितरण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। इसके अलावा जिले में पूर्व से संचालित कई दुकानों की पीओएस मशीनें खराब पड़ी हैं। इन खराब मशीनों को ठीक करने या उनकी जगह नई मशीन उपलब्ध कराने के लिए जिले में कोई तकनीकी व्यवस्था मौजूद नहीं है। एजेंसी नदारद, विभागीय कर्मियों की हो रही फजीहत विभागीय सूत्रों के अनुसार, जून माह में मुख्यालय द्वारा चयनित एजेंसी ने जिले में 1050 मशीनें बांटी थीं, लेकिन उसके बाद से एजेंसी का कोई अता-पता नहीं है। सटीक जानकारी के अभाव में प्रतिदिन कार्यालय पहुंचने वाले लाइसेंसधारियों के गुस्से का शिकार स्थानीय विभागीय कर्मियों को होना पड़ रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 1200 मशीनें वितरित हैं, जिनमें से केवल 654 ही सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। कई पुराने धारक बिक्री बंद किए बैठे हैं, जबकि नए लाइसेंसधारी एक-एक मशीन के लिए भटक रहे हैं। पीओएस मशीन की अनिवार्यता और लाइसेंस की शर्तें पारदर्शिता के लिए जिले में खाद की बिक्री केवल पीओएस मशीन के जरिए ही अनिवार्य की गई है। इंटरनेट से जुड़ी इस मशीन में किसान का आधार नंबर दर्ज कर बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही निर्धारित मात्रा में खाद और पक्की रसीद दी जाती है। खुदरा बिक्री लाइसेंस के लिए 1250 रुपये का सरकारी चालान लगता है और यह तीन साल के लिए मान्य होता है। इसके लिए आवेदक का रसायन विज्ञान से स्नातक होना अथवा कृषि विभाग से 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। जल्द मशीनें उपलब्ध कराने के प्रयास जारी: डीएओ मामले को लेकर नालंदा के जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने बताया कि मशीन वितरण और रखरखाव का जिम्मा मुख्यालय स्तर से चयनित एजेंसी का है। संबंधित एजेंसी को जल्द से जल्द मशीनें उपलब्ध कराने के लिए कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है और वरीय अधिकारियों को भी पूरी स्थिति से अवगत कराया गया है। विभाग का प्रयास है कि सभी लाइसेंसधारियों को शीघ्र मशीन दिलाकर खाद की नियमित बिक्री शुरू कराई जाए।  

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