पटना के अगमकुआं स्थित शीतला माता मंदिर में नवरात्र पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। सप्तमी और अष्टमी को यहां लंबी कतारें लगती हैं। करीब ढाई हजार साल पुराने इस मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। मान्यता है कि माता शीतला की पूजा से कष्ट दूर होते हैं। मंदिर परिसर में प्राचीन अगम कुआं भी है, जिससे सम्राट अशोक के समय की कई कहानियां जुड़ी हैं। इसकी गहराई और पानी को लेकर आज भी उत्सुकता बनी हुई है। मंदिर के पुजारी आकाश सैनी ने बताया कि नवरात्र में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। सप्तमी और अष्टमी पर दूर-दराज से श्रद्धालु माता के दर्शन को आते हैं। वे परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। आकाश सैनी के मुताबिक, माता शीतला को शीतलता और आरोग्य की देवी माना जाता है। भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्ट दूर होते हैं। चेचक और चिकन पॉक्स से जुड़ी है धार्मिक मान्यता माता शीतला की पूजा भारतीय लोक परंपरा में चेचक और चिकन पॉक्स जैसी बीमारियों से जुड़ी रही है। अगमकुआं स्थित शीतला माता मंदिर में भी ऐसी मान्यता प्रचलित है कि माता की आराधना करने से चेचक, चिकन पॉक्स और अंगार माता जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है। भक्त माता के चरणों में माथा टेककर अपने और अपने परिवार के लिये स्वस्थ रहने की प्रार्थना करते हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह विश्वास लंबे समय से चला आ रहा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए माता की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आस्था का भी माध्यम है। कुएं के जल को लेकर महिलाओं में विशेष आस्था शीतला माता मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन कुआं भी श्रद्धालुओं की आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां आने वाले भक्त माता के दर्शन से पहले कुएं की पूजा करते हैं। कुएं के जल को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है और मंदिर की साफ-सफाई सहित विभिन्न कार्यों में इसका उपयोग किए जाने की बात कही जाती है। मंदिर के पुजारियों के मुताबिक, इस कुएं के जल को लेकर महिलाओं में भी विशेष आस्था है। ऐसी मान्यता प्रचलित है कि जिन महिलाओं की गोद सूनी है, वे कुएं के जल को ग्रहण कर माता से संतान प्राप्ति की प्रार्थना करती हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता उनकी पुकार सुनती हैं और उनकी मनोकामना पूरी करती हैं। यह मान्यता पीढ़ियों से लोगों के बीच प्रचलित बताई जाती है। अगम कुएं का इतिहास सम्राट अशोक से जुड़ा शीतला माता मंदिर के ठीक सामने स्थित अगमकुआं पटना के प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। इस कुएं को लेकर कई ऐतिहासिक विवरण और लोककथाएं प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, इसका संबंध मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल से है। कहा जाता है कि कुएं का निर्माण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में कराया गया था। कुएं के निर्माण को लेकर प्रचलित एक कथा के अनुसार, सम्राट अशोक ने इसका इस्तेमाल कैदियों को यातना देने और उनकी हत्या के बाद शवों को फेंकने के लिए कराया था। इसी वजह से कुछ लोककथाओं में इसे यातना गृह और नरक से भी जोड़कर देखा जाता है। एक अन्य प्रचलित कहानी में कहा जाता है कि सम्राट अशोक ने सत्ता संघर्ष के दौरान अपने 99 भाइयों की हत्या कर उनके शव इसी कुएं में डलवा दिए थे। इसके बावजूद अगम कुआं अपने प्राचीन स्वरूप और इससे जुड़ी कहानियों के कारण लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कुएं की गहराई और पानी को लेकर रहस्य की चर्चा अगम कुएं को लेकर सबसे अधिक चर्चा इसकी गहराई को लेकर होती है। स्थानीय मान्यताओं में कहा जाता है कि आज तक इसकी वास्तविक गहराई का पता नहीं चल पाया है। यह भी दावा किया जाता है कि बाढ़ के समय भी कुएं के पानी पर विशेष असर नहीं पड़ता है और इसका पानी कभी नहीं सूखता है। कुछ लोककथाएं इसकी गहराई को पाताल लोक से जोड़ती हैं। पटना के अगमकुआं स्थित शीतला माता मंदिर में नवरात्र पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। सप्तमी और अष्टमी को यहां लंबी कतारें लगती हैं। करीब ढाई हजार साल पुराने इस मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। मान्यता है कि माता शीतला की पूजा से कष्ट दूर होते हैं। मंदिर परिसर में प्राचीन अगम कुआं भी है, जिससे सम्राट अशोक के समय की कई कहानियां जुड़ी हैं। इसकी गहराई और पानी को लेकर आज भी उत्सुकता बनी हुई है। मंदिर के पुजारी आकाश सैनी ने बताया कि नवरात्र में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। सप्तमी और अष्टमी पर दूर-दराज से श्रद्धालु माता के दर्शन को आते हैं। वे परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। आकाश सैनी के मुताबिक, माता शीतला को शीतलता और आरोग्य की देवी माना जाता है। भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्ट दूर होते हैं। चेचक और चिकन पॉक्स से जुड़ी है धार्मिक मान्यता माता शीतला की पूजा भारतीय लोक परंपरा में चेचक और चिकन पॉक्स जैसी बीमारियों से जुड़ी रही है। अगमकुआं स्थित शीतला माता मंदिर में भी ऐसी मान्यता प्रचलित है कि माता की आराधना करने से चेचक, चिकन पॉक्स और अंगार माता जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है। भक्त माता के चरणों में माथा टेककर अपने और अपने परिवार के लिये स्वस्थ रहने की प्रार्थना करते हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह विश्वास लंबे समय से चला आ रहा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए माता की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आस्था का भी माध्यम है। कुएं के जल को लेकर महिलाओं में विशेष आस्था शीतला माता मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन कुआं भी श्रद्धालुओं की आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां आने वाले भक्त माता के दर्शन से पहले कुएं की पूजा करते हैं। कुएं के जल को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है और मंदिर की साफ-सफाई सहित विभिन्न कार्यों में इसका उपयोग किए जाने की बात कही जाती है। मंदिर के पुजारियों के मुताबिक, इस कुएं के जल को लेकर महिलाओं में भी विशेष आस्था है। ऐसी मान्यता प्रचलित है कि जिन महिलाओं की गोद सूनी है, वे कुएं के जल को ग्रहण कर माता से संतान प्राप्ति की प्रार्थना करती हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता उनकी पुकार सुनती हैं और उनकी मनोकामना पूरी करती हैं। यह मान्यता पीढ़ियों से लोगों के बीच प्रचलित बताई जाती है। अगम कुएं का इतिहास सम्राट अशोक से जुड़ा शीतला माता मंदिर के ठीक सामने स्थित अगमकुआं पटना के प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। इस कुएं को लेकर कई ऐतिहासिक विवरण और लोककथाएं प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, इसका संबंध मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल से है। कहा जाता है कि कुएं का निर्माण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में कराया गया था। कुएं के निर्माण को लेकर प्रचलित एक कथा के अनुसार, सम्राट अशोक ने इसका इस्तेमाल कैदियों को यातना देने और उनकी हत्या के बाद शवों को फेंकने के लिए कराया था। इसी वजह से कुछ लोककथाओं में इसे यातना गृह और नरक से भी जोड़कर देखा जाता है। एक अन्य प्रचलित कहानी में कहा जाता है कि सम्राट अशोक ने सत्ता संघर्ष के दौरान अपने 99 भाइयों की हत्या कर उनके शव इसी कुएं में डलवा दिए थे। इसके बावजूद अगम कुआं अपने प्राचीन स्वरूप और इससे जुड़ी कहानियों के कारण लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कुएं की गहराई और पानी को लेकर रहस्य की चर्चा अगम कुएं को लेकर सबसे अधिक चर्चा इसकी गहराई को लेकर होती है। स्थानीय मान्यताओं में कहा जाता है कि आज तक इसकी वास्तविक गहराई का पता नहीं चल पाया है। यह भी दावा किया जाता है कि बाढ़ के समय भी कुएं के पानी पर विशेष असर नहीं पड़ता है और इसका पानी कभी नहीं सूखता है। कुछ लोककथाएं इसकी गहराई को पाताल लोक से जोड़ती हैं।

