बेमेतरा के धनगांव में दो दिवसीय राज्य स्तरीय रामधुनी प्रतियोगिता और नक्सलवाद में शहीद जवानों की श्रद्धांजलि सभा बुधवार को खत्म हुई। इसमें मुख्यमंत्री की पत्नी कौशल्या देवी साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से पहुंची रामधुनी मंडलियों ने भगवान श्रीराम के भजन और धार्मिक प्रस्तुतियां दीं। कबीरधाम की पेंड्रीतराई मंडली पहले स्थान पर रही। मुंगेली के कन्हारपुर को दूसरा, बेमेतरा के कटई को तीसरा, धमतरी के पोड़ी को चौथा और मुंगेली के पीड़ा को पांचवां स्थान मिला। उत्कृष्ट मंडलियों को सम्मानित किया गया। नक्सलवाद के खिलाफ शहीद हुए जवानों के लिए तर्पण-अर्पण और श्रद्धांजलि सभा भी हुई। आयोजकों ने बताया कि यह शहीदों के लिए पहला पितृ पक्ष था। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि शहीदों को याद करना सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए वीर जवानों के लिए तर्पण-अर्पण करना है। वर्ष 2000 से लेकर नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में अनेक लोगों और जवानों ने अपना बलिदान दिया है। उनके बलिदान को स्मरण करते हुए तर्पण-अर्पण करना महत्वपूर्ण है।
पितृ पक्ष पर शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि विजय शर्मा ने कहा कि यह पहला पितृ पक्ष है, इसलिए इस अवसर पर शहीद जवानों के लिए तर्पण करना, उनकी सद्गति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करना और उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करना आयोजन का विशेष उद्देश्य रहा। उन्होंने आयोजन में सहयोग के लिए आयोजकों, समाजसेवियों और ग्रामीणों का आभार जताया। धनगांव में विकास कार्यों के लिए 20 लाख की घोषणा कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने धनगांव में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपए देने की घोषणा भी की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद विजय बघेल, विधायक दीपेश साहू और विधायक ईश्वर साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष संत राजीव लोचन दास ने आयोजन की सफलता के लिए समाजसेवियों, श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के सहयोग की सराहना की। दो दिनों तक धनगांव में रामधुनी के भजनों से धार्मिक और भक्तिमय माहौल बना रहा। आयोजन में एक ओर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रामधुनी और सांस्कृतिक विरासत देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर शहीद जवानों को तर्पण-अर्पण कर उनके बलिदान को याद किया गया। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और शहीद जवानों के सम्मान से जुड़ा यह आयोजन क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा।

