तेंदुआ शिकार मामला: Wildlife SOS प्रमुख की याचिका पर सुनवाई को Supreme Court तैयार

तेंदुआ शिकार मामला: Wildlife SOS प्रमुख की याचिका पर सुनवाई को Supreme Court तैयार

(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 15 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी, जिसमें तेंदुए के कथित शिकार के मामले में वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस लेने के मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। सत्यनारायण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ से याचिका पर तुरंत सुनवाई करने की अपील की। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इसे सूचीबद्ध किया जायेगा।’’
यह मामला तेंदुओं के कथित शिकार की मध्यप्रदेश राज्य बाघ कार्यबल (एसटीएसएफ) द्वारा जांच से जुड़ा है।

इन तेंदुओं की खालें उत्तर प्रदेश के आगरा में बरामद हुई थीं। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने हाल में वन्यजीव (सुरक्षा) अधिनियम, 1972 के तहत दायर की गयी दो याचिकाओं को खारिज कर दिया था और सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को वापस ले लिया था। उच्च न्यायालय ने उन्हें 21 सितंबर को एसटीएसएफ के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया था।

एक खबर के मुताबिक, मध्यप्रदेश वन विभाग ने आरोप लगाया था कि सत्यनारायण ने अपने खिलाफ जारी तीसरा समन और गिरफ्तारी वारंट छिपाया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने उन्हें दी गई सुरक्षा वापस ले ली। विभाग ने आरोप लगाया था कि वह श्योपुर और मुरैना ज़िलों में 10 तेंदुओं के अवैध शिकार की जांच में शामिल नहीं हुए।

वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रमुख ने राज्य के इस दावे को खारिज कर दिया कि वह ‘फरार’ हैं। संगठन का कहना है कि अवैध शिकार के खिलाफ उसकी इकाई ने कथित गिरोह का पता लगाने में अधिकारियों की मदद की थी और कानूनी सुरक्षा मांगने का मतलब जांच में सहयोग करने से इनकार करना नहीं है। दवे ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ को बताया कि सत्यनारायण के संगठन ने अधिकारियों को तेंदुए की खालें बरामद करने में मदद की थी, लेकिन बाद में उन्हें ही इस मामले में फंसा दिया गया।

दवे ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम के तहत दायर की गयी दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हमारा संबंध एक गैर सरकारी संगठन से है और हमने ही तेंदुए की खालें बरामद करवाई थीं। अब राज्य सरकार ने हमें ही इस मामले में फंसा दिया है।’’
खंडपीठ ने पूछा, ‘‘आप घर पर तेंदुए रखते थे?’’
दवे ने अपने मुवक्किल की ओेर से कहा,“नहीं।

हमने ही आगरा में खालें बरामद करवाई थीं। बरामदगी उत्तर प्रदेश में हुई थी और इसके बाद मामला मध्यप्रदेश में हाथ में लिया गया।”
उन्होंने कहा कि सत्यनारायण अधिकारियों के साथ सहयोग करने और जांच एजेंसी के सामने पेश होने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा चाहिए।

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