पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा है कि शराबबंदी की सोच अच्छी थी और महात्मा गांधी से प्रेरणा लेकर नीतीश कुमार ने बिहार में इसे लागू किया, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर यह पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि बिहार के एक तरफ उत्तर प्रदेश और दूसरी तरफ झारखंड जैसे राज्यों में शराब की बिक्री जारी है, जबकि नेपाल भी बिहार की सीमा से लगा हुआ है। ऐसे में केवल बिहार में शराबबंदी लागू करके इसे पूरी तरह सफल बनाना चुनौतीपूर्ण है। आनंद मोहन ने कहा कि यदि शराबबंदी को सफल बनाना है तो इसके लिए व्यापक स्तर पर एक समान नीति की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि जब आसपास के राज्यों में शराब उपलब्ध है तो बिहार में इसकी तस्करी और अवैध कारोबार को पूरी तरह रोकना मुश्किल हो जाता है। ‘राजनीति का मतलब सेवा है, सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं’ आनंद मोहन ने कहा कि राजनीति का मूल उद्देश्य जनता की सेवा है। सत्ता पक्ष को अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए। जब सत्ता पक्ष अपने दायित्व से विमुख होता है तो जनता चुनाव के माध्यम से उसका जवाब देती है। उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष का काम सरकार की नीतियों की आलोचना करना और जनता की समस्याओं को उठाना है। इसी कारण उसे प्रतिपक्ष या विरोधी दल कहा जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारी है और दोनों को उसका ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। युवाओं के असंतोष पर सरकार को चेताया देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं के प्रदर्शन और लाठीचार्ज के सवाल पर आनंद मोहन ने कहा कि युवाओं में कई कारणों से असंतोष पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को समय रहते इस असंतोष को समझना होगा और ठंडे दिमाग से विचार करना होगा। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में कदाचार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि यूपीएससी और बीपीएससी जैसी परीक्षाओं को लेकर युवाओं के बीच अगर असंतोष पैदा हो रहा है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों पैदा हो रही हैं और युवाओं को बार-बार आंदोलन की राह क्यों पकड़नी पड़ रही है। आनंद मोहन ने कहा कि सरकार को युवाओं की समस्याओं को सिर्फ आंदोलन या विरोध के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसके मूल कारणों तक पहुंचना चाहिए। रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। ‘गरीब-किसान पर बोझ बढ़ रहा है तो शराबबंदी पर पुनर्विचार हो’ आनंद मोहन ने शराबबंदी के आर्थिक प्रभाव का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के कारण राज्य के राजस्व पर असर पड़ा है और सरकार को अन्य माध्यमों से राजस्व जुटाना पड़ता है। इसका बोझ अंततः आम जनता, गरीब और किसान पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अगर शराबबंदी की वजह से गरीब और किसान पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है तो सरकार को इस नीति की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि किसी बड़े सामाजिक या आर्थिक असंतोष के पैदा होने से पहले ही इस मुद्दे पर निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “कल कोई बगावत पर उतरे, उससे पहले शराबबंदी को खत्म कर देना चाहिए।” आनंद मोहन के इस बयान ने बिहार की शराबबंदी नीति को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। बांकीपुर उपचुनाव में हार पर बोले- तुझको तेरा गुरूर मारेगा बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार को लेकर पूछे गए सवाल पर आनंद मोहन ने सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “किसी शायर ने बहुत अच्छी बात कही है- किसी और से हारेगी ना, तुझको तेरा गुरूर मारेगा।” आनंद मोहन ने आगे कहा कि सत्ता अपने अहंकार के कारण हारती रही है और इतिहास इसका गवाह है। उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम पर गंभीरता से विचार-मंथन करने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, किसी भी चुनाव में हार की एक वजह नहीं होती, बल्कि उसके पीछे कई कारण होते हैं। आनंद मोहन ने कहा कि उनका संदेश सिर्फ हारने वालों के लिए नहीं, बल्कि जीतने वालों के लिए भी है। उन्होंने कहा कि पराजय से पहले अहंकार नहीं होना चाहिए और विजय के बाद भी अहंकार नहीं आना चाहिए। उन्होंने शराबबंदी पर भी सरकार को घेरा और कहा कि यह एक अच्छी सोच थी, लेकिन सफल नहीं हुई। पूर्व सांसद ने जातीय समीकरणों के आधार पर राजनीति करने पर भी सवाल उठाया। आनंद मोहन ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र और प्रदेश का नवनिर्माण केवल जातीय आंकड़े गिनकर सत्ता हासिल करने से नहीं होगा। तीन दिनों के दौरे पर गयाजी पहुंचे हैं पूर्व सांसद पूर्व सांसद आनंद मोहन तीन दिवसीय बिहार दौरे के क्रम में गुरुवार को गया पहुंचे। गया एयरपोर्ट पर फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ताओं, नेताओं और समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्वागत के बाद आनंद मोहन सड़क मार्ग से आमस प्रखंड गए, जहां पिंटू सिंह के आवास पर स्वागत समारोह और कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यकर्ता सम्मेलन में बड़ी संख्या में फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय नेता मौजूद रहे। आनंद मोहन ने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजनीति का असली उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा करना होना चाहिए। गया पहुंचने पर आनंद मोहन के स्वागत से लेकर आमस में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन तक समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। सम्मेलन में आनंद मोहन ने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने की अपील की। तीन दिवसीय बिहार दौरे के दौरान आनंद मोहन के बयानों ने जहां बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम, सत्ता के अहंकार और विपक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक संदेश दिया, वहीं शराबबंदी और युवाओं के असंतोष जैसे मुद्दों पर सरकार को सीधे घेरा। पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा है कि शराबबंदी की सोच अच्छी थी और महात्मा गांधी से प्रेरणा लेकर नीतीश कुमार ने बिहार में इसे लागू किया, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर यह पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि बिहार के एक तरफ उत्तर प्रदेश और दूसरी तरफ झारखंड जैसे राज्यों में शराब की बिक्री जारी है, जबकि नेपाल भी बिहार की सीमा से लगा हुआ है। ऐसे में केवल बिहार में शराबबंदी लागू करके इसे पूरी तरह सफल बनाना चुनौतीपूर्ण है। आनंद मोहन ने कहा कि यदि शराबबंदी को सफल बनाना है तो इसके लिए व्यापक स्तर पर एक समान नीति की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि जब आसपास के राज्यों में शराब उपलब्ध है तो बिहार में इसकी तस्करी और अवैध कारोबार को पूरी तरह रोकना मुश्किल हो जाता है। ‘राजनीति का मतलब सेवा है, सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं’ आनंद मोहन ने कहा कि राजनीति का मूल उद्देश्य जनता की सेवा है। सत्ता पक्ष को अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए। जब सत्ता पक्ष अपने दायित्व से विमुख होता है तो जनता चुनाव के माध्यम से उसका जवाब देती है। उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष का काम सरकार की नीतियों की आलोचना करना और जनता की समस्याओं को उठाना है। इसी कारण उसे प्रतिपक्ष या विरोधी दल कहा जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारी है और दोनों को उसका ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। युवाओं के असंतोष पर सरकार को चेताया देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं के प्रदर्शन और लाठीचार्ज के सवाल पर आनंद मोहन ने कहा कि युवाओं में कई कारणों से असंतोष पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को समय रहते इस असंतोष को समझना होगा और ठंडे दिमाग से विचार करना होगा। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में कदाचार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि यूपीएससी और बीपीएससी जैसी परीक्षाओं को लेकर युवाओं के बीच अगर असंतोष पैदा हो रहा है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों पैदा हो रही हैं और युवाओं को बार-बार आंदोलन की राह क्यों पकड़नी पड़ रही है। आनंद मोहन ने कहा कि सरकार को युवाओं की समस्याओं को सिर्फ आंदोलन या विरोध के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसके मूल कारणों तक पहुंचना चाहिए। रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। ‘गरीब-किसान पर बोझ बढ़ रहा है तो शराबबंदी पर पुनर्विचार हो’ आनंद मोहन ने शराबबंदी के आर्थिक प्रभाव का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के कारण राज्य के राजस्व पर असर पड़ा है और सरकार को अन्य माध्यमों से राजस्व जुटाना पड़ता है। इसका बोझ अंततः आम जनता, गरीब और किसान पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अगर शराबबंदी की वजह से गरीब और किसान पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है तो सरकार को इस नीति की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि किसी बड़े सामाजिक या आर्थिक असंतोष के पैदा होने से पहले ही इस मुद्दे पर निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “कल कोई बगावत पर उतरे, उससे पहले शराबबंदी को खत्म कर देना चाहिए।” आनंद मोहन के इस बयान ने बिहार की शराबबंदी नीति को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। बांकीपुर उपचुनाव में हार पर बोले- तुझको तेरा गुरूर मारेगा बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार को लेकर पूछे गए सवाल पर आनंद मोहन ने सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “किसी शायर ने बहुत अच्छी बात कही है- किसी और से हारेगी ना, तुझको तेरा गुरूर मारेगा।” आनंद मोहन ने आगे कहा कि सत्ता अपने अहंकार के कारण हारती रही है और इतिहास इसका गवाह है। उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम पर गंभीरता से विचार-मंथन करने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, किसी भी चुनाव में हार की एक वजह नहीं होती, बल्कि उसके पीछे कई कारण होते हैं। आनंद मोहन ने कहा कि उनका संदेश सिर्फ हारने वालों के लिए नहीं, बल्कि जीतने वालों के लिए भी है। उन्होंने कहा कि पराजय से पहले अहंकार नहीं होना चाहिए और विजय के बाद भी अहंकार नहीं आना चाहिए। उन्होंने शराबबंदी पर भी सरकार को घेरा और कहा कि यह एक अच्छी सोच थी, लेकिन सफल नहीं हुई। पूर्व सांसद ने जातीय समीकरणों के आधार पर राजनीति करने पर भी सवाल उठाया। आनंद मोहन ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र और प्रदेश का नवनिर्माण केवल जातीय आंकड़े गिनकर सत्ता हासिल करने से नहीं होगा। तीन दिनों के दौरे पर गयाजी पहुंचे हैं पूर्व सांसद पूर्व सांसद आनंद मोहन तीन दिवसीय बिहार दौरे के क्रम में गुरुवार को गया पहुंचे। गया एयरपोर्ट पर फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ताओं, नेताओं और समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्वागत के बाद आनंद मोहन सड़क मार्ग से आमस प्रखंड गए, जहां पिंटू सिंह के आवास पर स्वागत समारोह और कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यकर्ता सम्मेलन में बड़ी संख्या में फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय नेता मौजूद रहे। आनंद मोहन ने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजनीति का असली उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा करना होना चाहिए। गया पहुंचने पर आनंद मोहन के स्वागत से लेकर आमस में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन तक समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। सम्मेलन में आनंद मोहन ने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने की अपील की। तीन दिवसीय बिहार दौरे के दौरान आनंद मोहन के बयानों ने जहां बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम, सत्ता के अहंकार और विपक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक संदेश दिया, वहीं शराबबंदी और युवाओं के असंतोष जैसे मुद्दों पर सरकार को सीधे घेरा।


