झारखंड हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी:रात के समय महिला के घर में घुसकर उसे पकड़ना-कपड़े उठाना गंभीर अपराध, पर दुष्कर्म का प्रयास नहीं मान सकते

झारखंड हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी:रात के समय महिला के घर में घुसकर उसे पकड़ना-कपड़े उठाना गंभीर अपराध, पर दुष्कर्म का प्रयास नहीं मान सकते

झारखंड हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने घाटशिला से जुड़े कमलेंदु महतो उर्फ खोका की आपराधिक अपील सुनवाई के बाद कहा है कि रात के समय में महिला के घर में घुसकर उसे पकड़ना, उसके कपड़े उठाना या उसके साथ अशोभनीय हरकत करना गंभीर अपराध है, लेकिन इसे अपने आप दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना जा सकता। दुष्कर्म के प्रयास के लिए अभियुक्त की ओर से ऐसा प्रत्यक्ष और निर्णायक कृत्य होना जरूरी है, जो सीधे तौर पर दुष्कर्म को अंजाम देने की दिशा में बढ़ रहा हो। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है अ‌ाधी रात को घर में घुसा था आरोपी, महिला के शोर मचाने पर भागा: यह मामला 27 दिसंबर 1999 की रात की है। पीड़िता अपने घर में सो रही थी। उसकी मां बगल के कमरे में थी और घर में कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था। रात करीब 12 बजे जबरन दरवाजा खोलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद आरोपी कमलेंदु महतो उर्फ खोका कमरे में घुसा और पीड़िता के साथ छेड़छाड़ करने लगा। पीड़िता के अनुसार, आरोपी उसके शरीर पर चढ़ गया और उसकी साड़ी उठाकर उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। उसने शोर मचाकर आरोपी को अपने शरीर से हटाया। शोर सुनकर उसकी मां कमरे में आई। इसके बाद आरोपी वहां से भाग गया। आवाज सुनकर पड़ोसी भी मौके पर पहुंचे। पीड़िता ने उन्हें घटना की जानकारी दी। बाद में उसके भाई के लौटने के बाद 31 दिसंबर 1999 को पुलिस को लिखित शिकायत दी गई। इसके आधार पर चाकुलिया थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई। ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी चार साल की सजा: यह मामला सत्र न्यायालय पहुंचा, जहां मामले की सुनवाई हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, घाटशिला ने 25 जुलाई 2006 को आरोपी को धारा 376/511 के तहत दोषी ठहराया और 28 जुलाई 2006 को चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की। सभी गवाहों ने आरोपी को भागते देखा, घटना किसी ने नहीं देखी अदालत ने गवाहों के बयान का भी विश्लेषण किया। जिसमें पीड़िता के भाई ने कहा कि उसे घटना की जानकारी उसकी बहन से मिली थी। वह घटना का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। पड़ोसी प्रफुल्लो कुमार सिंह, परी सिंह, बुधी सिंह, अनंतो सिंह और अन्य गवाहों ने पीड़िता का शोर सुनने तथा आरोपी को उसके घर से भागते देखने की बात कही। इस आधार पर अदालत ने पाया कि घटना को प्रत्यक्ष रूप से किसी अन्य गवाह ने नहीं देखा था। इसी आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी ने पीड़िता पर उसकी लज्जा भंग करने के इरादे से हमला किया। इसलिए उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 354 का अपराध बनता है।

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