‘जो अपनी पार्टी का रिजीम चेंज नहीं रोक पाया, वह और क्या बदलेगा’, उद्धव पर CM फडणवीस ने कसा तंज

‘जो अपनी पार्टी का रिजीम चेंज नहीं रोक पाया, वह और क्या बदलेगा’, उद्धव पर CM फडणवीस ने कसा तंज

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) वाले बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रिजीम चेंज की वकालत करते हुए भाजपा पर कटाक्ष किया, जिस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया है। फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे अपनी ही पार्टी में रिजीम चेंज को नहीं रोक पाए और अब वे किस सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं, यह समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का फैसला सड़क पर नहीं, बल्कि चुनाव के जरिए होता है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) समेत अन्य संगठनों के विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों के बीच ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की बहस भी तेज हो गई है।

उद्धव ठाकरे पर फडणवीस का करारा पलटवार

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे अपनी ही शिवसेना में सत्ता परिवर्तन को नहीं रोक पाए। उन्होंने कहा, “पहली बात तो यह है कि उद्धव ठाकरे अपनी शिवसेना में रिजीम चेंज नहीं रोक पाए। वे अब किस दूसरे रिजीम चेंज की बात कर रहे हैं, मुझे नहीं पता।”

फडणवीस ने शिवसेना में 2022 में हुए बगावत का जिक्र करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने जब हिंदुत्व और शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के विचारों को छोड़ दिया, तब बालासाहेब के विचारों पर चलने की इच्छा रखने वाले लोगों ने असली शिवसेना बनाई।

‘सड़क पर नहीं, चुनाव के जरिए होगा फैसला’

मुख्यमंत्री फडणवीस ने दो टूक शब्दों में कहा कि संविधान को चुनौती देना बंद किया जाना चाहिए। देश में फैसले संसद और संविधान के दायरे में होंगे, सड़कों पर नहीं। लोकतंत्र में चुनाव के जरिए निर्णय होता है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि कोई नेपाल और बांग्लादेश की तरह भारत के संविधान को नकारने का सपना देख रहा है, तो वे भूल जाएं। भारत में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिया गया ऐसा मजबूत संविधान है, जो ऐसे सभी मंसूबों को खत्म कर देगा।” उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा, अभी नरेंद्र मोदी की सरकार है और वह फिर से चुनी जाएगी।

उद्धव ठाकरे ने किया था ‘रिजीम चेंज’ का समर्थन

इससे पहले शनिवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार लोगों से मतदान के जरिए अपनी राय व्यक्त करने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार छीन रही है, तो ऐसी सरकार को बदलने की जरूरत है।

ठाकरे ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के ‘रिजीम चेंज’ संबंधी बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन के लिए आवाज उठा रहा है।

अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए ठाकरे ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा था, “जो लोग राम को लाने का दावा करते हैं, वे आज कॉकरोच से डरते हैं।”

प्रशांत भूषण के बयान पर गरमाई सियासत

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में सत्ता परिवर्तन को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में किसी सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त करना अपराध नहीं है।

भूषण ने यह भी कहा था कि फिलहाल संघर्ष का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है, लेकिन यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बर्बरता जारी रहती है, तो सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा हो सकती है।

इन बयानों के बाद भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जहां विपक्ष मतदान और विरोध प्रदर्शन के अधिकारों का मुद्दा उठा रहा है, वहीं फडणवीस ने चुनाव और संविधान को सरकार बदलने का लोकतांत्रिक माध्यम बताया है।

मोहन भागवत से मिले CM फडणवीस

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय का दौरा किया और संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। हालांकि इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

फडणवीस का नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के समर्थन में विभिन्न सभाओं को संबोधित करने का कार्यक्रम भी है। इससे पहले वे नागपुर के महाल क्षेत्र स्थित संघ मुख्यालय पहुंचे थे।

23 अक्टूबर को पांच MLC सीटों पर चुनाव

महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की पांच सीटों के लिए 23 अक्टूबर को द्विवार्षिक चुनाव होना है। इनमें तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। महाराष्ट्र विधान परिषद में कुल 78 सीटें हैं। इन चुनावों के मद्देनजर राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।

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