3 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों पर हुए कथित हमले का मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वकील इंदिरा जयसिंह से कहा कि टेक्नोलॉजी के इस दौर में, जिसके पास भी मोबाइल है, वह पत्रकार हो सकता है। मेहता ने कहा कि कई लोग अपने साथ माइक्रोफोन रखते हैं और दावा करते हैं कि वे रिकॉर्डिंग कर रहे हैं, लेकिन बाद में वे वीडियो को ‘रील्स’ के रूप में अपलोड कर देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि एक “रील बनाने वाले” और एक स्वतंत्र पत्रकार के बीच फर्क करना मुश्किल है।
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जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया गया है, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहों की सूची से हटा दिया गया था। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि जंतर-मंतर को इस सूची से हटाने का फैसला क्या कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों के आधार पर लिया गया था, या फिर सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में इस जगह की उपयोगिता के स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर?
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर आधारित नहीं था। उन्होंने कहा कि पहले गठित एक समिति ने इस मामले की जांच की थी और एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से महिला पत्रकार को गिरफ्तार न करने को कहा
एसीपी विवेक भगत द्वारा एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे उसे गिरफ्तार न करें। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि अगर वह जांच में शामिल होती है, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

