Ram Mandir Trust New CEO: चंदा चोरी विवाद के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए शुरू किया गया ऑपरेशन पूरा हो गया है। इस ट्रस्ट की कमान अब सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के हाथों में है। बतौर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिश्रा सैन्य अनुशासन से ट्रस्ट को संचालित करेंगे। इस ट्रस्ट में पहली महिला सदस्य के रूप में निर्मला यादव को भी जगह मिली है। इसके अलावा, मदन मोहन पांडे और महेश भागचंदका को ट्रस्टी के रूप में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। जबकि पहले कोषाध्यक्ष रहे स्वामी गोविंद देव गिरि को महासचिव नियुक्त किया है। स्वामी गोविंद देव गिरि ट्रस्ट के गठन के समय से ही इससे जुड़े रहे हैं। महासचिव के रूप में अब वह ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक मामलों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आसान नहीं था चयन
ट्रस्ट के सीईओ की नियुक्ति कठिन और पेचीदा काम रहा। क्योंकि यह मजह पद भरना नहीं था, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति का चुनाव था, जिस पर देश भरोसा कर सके। चंदा चोरी विवाद से जिन भक्तों के विश्वास और आस्था को चोट पहुंची थी, उनका विश्वास बहाल किया जा सके। इसलिए इस प्रक्रिया सख्त बनाया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि सभी मानदंडों का बारीकी से पालन हो। सीईओ के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इसमें सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सुरेश हावरे और विष्णु कांत चतुर्वेदी शामिल थे। इस पद के लिए 5,500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इसके बाद आवेदकों को एक गूगल फॉर्म भेजा गया, जिसमें कुल 600 अंकों वाले प्रश्न थे। 3,500 से अधिक उम्मीदवारों ने यह फॉर्म जमा किया, जिसके आधार पर उनका मूल्यांकन किया गया।
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 108 उम्मीदवारों ने 600 में से 470 से अधिक अंक हासिल किए। इसके बाद उनका वर्चुअल इंटरव्यू हुआ और अगले चरण के लिए 17 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया। सीईओ पद के लिए अंतिम सूची में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज – तीन उम्मीदवारों का नाम शामिल थे। शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को फाइनल इंटरव्यू के लिए अयोध्या बुलाया गया। यहां उन्हें कई मानकों पर परखा गया – नेतृत्व क्षमता, आस्था और धार्मिक मामलों की समझ, चुनौतियों से निपटने की क्षमता और मंदिर प्रशासन का ज्ञान।
IAS, IPS से ज्यादा इन्हें मिली तवज्जो
अंग्रेजी वेबसाइट द प्रिंट ने सूत्रों के जरिए बतायै है कि इस पद के लिए कई पूर्व आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने भी आवेदन किया, लेकिन सेना और वायुसेना सहित सशस्त्र बलों के ऐसे उम्मीदवारों को वरीयता दी गई, जिनका अयोध्या से कोई खास जुड़ाव रहा है या फिर उनकी यहां तैनाती नहीं रही है। चयन के दौरान राष्ट्रवादी पहलू को भी ध्यान में रखा गया।

आखिरी में जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी। मिश्रा, राम मंदिर ट्रस्ट के मैनेजमेंट में भारतीय वायुसेना के करीब चार दशकों के अनुभव के साथ-साथ सैन्य अनुशासन भी लेकर आएंगे। मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को लड़ाकू पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने थे। करीब 39 वर्षों की सेवा में उन्होंने 3,000 से अधिक घंटे उड़ान भरी है। उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू-परिवहन विमानों के साथ -साथ हेलीकॉप्टर भी उड़ाए हैं।
पहली महिला सदस्य – निर्मला यादव
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विस्तार के साथ निर्मला यादव को ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यूपी के शिकोहाबाद की रहने वालीं यादव ने इससे पहले राम मंदिर के लिए विश्व हिंदू परिषद के निधि समर्पण अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके पास हिंदी और संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय स्तर पर अध्यापन एवं शैक्षणिक क्षेत्र में करीब 15 वर्षों का अनुभव है। ट्रस्ट के एक अन्य नए सदस्य महेश भागचंदका, विश्व हिन्दू परिषद के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं और वर्तमान में अशोक सिंघल फाउंडेशन का संचालन करते हैं।

उन्हें मंदिर के नए कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह, तीसरे नए सदस्य मदन मोहन पांडे अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़ी लंबी कानूनी लड़ाई में शामिल रहे हैं। पांडे ने लंबे समय तक चली कानूनी कार्यवाही में रामलला का पक्ष रखा था। उनकी कानूनी सेवाओं को देखते हुए, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने के बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का अपर महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था।

