पंजाब में आज नशे के विरुद्ध चल रही रैली का समापन अमित शाह के नेतृत्व में जालंधर में किया गया है। इसी रैली में पहुंचे बीजेपी के नेता हरभजन सिंह ने आप सरकार को जमकर घेरा। हरभजन ने राज्य में भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) और फाइलों में फेरबदल की आशंकाओं को लेकर विपक्ष को जमकर कर घेरा। इसी बीच, वरिष्ठ नेता और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह के बयानों ने पंजाब की शासन व्यवस्था पर एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी फाइलों और कार्यालयों पर उठे सवाल राज्य में फाइलों की अदला-बदली और दफ्तरों के संचालन को लेकर कई तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष और गहराई से जांच की जाए, तो कई बड़े नामों का पर्दाफाश हो सकता है। प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता की कमी और भूमि से जुड़े मामलों में गड़बड़ी की आशंकाओं ने जनता और विपक्ष का ध्यान आकर्षित किया है। ‘दिल्ली से चल रहा है पंजाब का तंत्र’ पंजाब राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के समीकरणों पर सीधे सवाल उठाए। हरभजन सिंह ने पूछा कि आखिर मुख्यमंत्री की ऐसी कौन सी मजबूरियां हैं जो वे केजरीवाल के आगे अपनी बात खुलकर नहीं रख पाते? उन्होंने आरोप लगाया कि इस समय पूरा दिल्ली का प्रशासनिक तंत्र पंजाब पर हावी होकर बैठा है। सरकारी कोठियों के इस्तेमाल पर विवाद पंजाब के शासन-प्रशासन में दिल्ली से आए अधिकारियों की तैनाती पर भी सवाल उठाए गए हैं। आलोचकों का कहना है कि क्या पंजाबियों को अपने राज्य के दफ्तर और सरकार चलाना नहीं आता जो बाहरी अधिकारियों की मदद ली जा रही है? इतना ही नहीं, हरभजन सिंह ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि दिल्ली स्थित उनकी 32 नंबर कोठी और अशोक मित्तल की कोठी का इस्तेमाल अरविंद केजरीवाल द्वारा किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि केजरीवाल वहां बैठकर पंजाब की राजनीति और सरकार चलाने वाले कौन होते हैं? उनका साफ कहना है कि पंजाब का शासन चलाने का अधिकार केवल और केवल पंजाबियों के पास ही होना चाहिए।

