चेहरा देखकर बताएगा AI कितनी है जिंदगी की डोर: आंखों के आसपास छिपे हैं सेहत के राज

चेहरा देखकर बताएगा AI कितनी है जिंदगी की डोर: आंखों के आसपास छिपे हैं सेहत के राज

Face Survival AI: एक एआइ टूल डॉक्टरों को मरीज के चेहरे की एक ही तस्वीर का उपयोग करके यह आंकने में मदद कर सकता है कि मरीज कितना बीमार है। अमरीकी शोधकर्ताओं के अनुसार, ‘फेस सर्वाइवल’ नामक एआइ मॉडल को लाखों स्वस्थ चेहरों और कैंसर रोगियों की 35,000 तस्वीरों पर प्रशिक्षित किया गया है। यह आंखों के पास की विशेषताओं को बारीकी से देखकर जीवित रहने की संभावना का अनुमान लगा सकता है। ये मापदंड कई अलग-अलग प्रकार के कैंसरों पर लागू होते हैं, जिनकी गंभीरता अलग-अलग होती है। रिपोर्ट के निष्कर्ष लेंसेट नामक पत्रिका में प्रकाशित किए है।

50 से 90 साल के प्रतिभागियों पर परखा

शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका लक्ष्य डॉक्टरों को अपने मरीजों के लिए सही उपचार की सिफारिश करने में मदद करना है। यह प्रयोग अमरीका और नीदरलैंड के अधिकांश कैंसर रोगियों पर किया गया, जिनकी उम्र 50 या 60 वर्ष के बीच थी। इसमें अध्ययन में बच्चों सहित 90 वर्ष से अधिक उम्र के प्रतिभागियों को शामिल किया गया था।

फेसएज टूल पर भी हो रहा है काम

अमरीका के स्वास्थ्य संगठन मास जनरल ब्रिगहम के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. रेमंड मैक और उनके सहयोगी जैविक आयु का अनुमान लगाने के लिए एक एआइ टूल ‘फेसएज’ का भी मूल्यांकन कर रहे हैं। जिससे यह पता लगाया जा सके कि कोई व्यक्ति जन्म के समय की आयु के विपरीत कितना बूढ़ा दिखता है। कैंसर के इलाज के समय डॉक्टर मरीज उम्र के साथ-साथ उसकी शारीरिक क्षमता, पहले से मौजूद बीमारियों, कैंसर के प्रकार और स्टेज, जांच रिपोर्ट और इलाज सहन करने की क्षमता जैसे कई पहलुओं पर विचार करते हैं।

इलाज से पहले कई पहलुओं पर होता है विचार

कैंसर के इलाज के दौरान डॉक्टर केवल मरीज की उम्र को ही आधार नहीं बनाते। वे उसकी शारीरिक क्षमता, पहले से मौजूद बीमारियों, कैंसर के प्रकार और स्टेज, जांच रिपोर्ट तथा इलाज को सहन करने की क्षमता जैसे कई पहलुओं पर गहनता से विचार करते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ‘फेस सर्वाइवल’ और ‘फेसएज’ जैसे एआइ टूल इन सभी पहलुओं के साथ मिलकर डॉक्टरों के निर्णय को और बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा क्षेत्र में एआइ का बढ़ता उपयोग मरीजों के इलाज को अधिक सटीक और व्यक्तिगत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। एक साधारण तस्वीर से मिलने वाली यह जानकारी डॉक्टरों को सही समय पर सही फैसला लेने में मदद कर सकती है।

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