ग्लोबल साउथ के साथ AI साझेदारी पर UNGA में जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- 4F संकट से जूझ रही दुनिया

ग्लोबल साउथ के साथ AI साझेदारी पर UNGA में जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- 4F संकट से जूझ रही दुनिया

Jaishankar UNGA Speech: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि हर देश को अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के अनुसार अपने मॉडल और उन्हें लागू करने की रणनीतियों को विकसित करके अपना AI इकोसिस्टम बनाने का अधिकार है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए, जयशंकर ने कहा कि भारत AI को ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ अपनी साझेदारी के एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।

AI बना क्रांतिकारी बदलाव का माध्यम

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानों के सशक्तिकरण, आर्थिक समृद्धि और आबादी से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला माध्यम है। उन्होंने कहा, “मौजूदा वैश्विक बातचीत में AI एक अहम मुद्दा है। भारत ने इस साल फरवरी में AI इम्पैक्ट समिट की मेज़बानी की थी, जिसमें इस विषय के बेहतरीन विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया था।” जयशंकर ने आगे कहा कि हर देश को अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप अपना इकोसिस्टम बनाने का अधिकार है, और AI ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ भारत की साझेदारी के एजेंडे का एक बड़ा हिस्सा होगा।

टेक्नोलॉजी से ज्यादा आपसी सम्मान जरूरी

जयशंकर ने टेक्नोलॉजी के ज्यादा सुलभ होने के साथ आपसी सम्मान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दूसरों के हितों और नजरिए का ध्यान रखने से शांति की संभावनाएं मजबूत होती हैं। साथ ही, उन्होंने वैश्वीकृत दुनिया में अंतरराष्ट्रीय समझ को बढ़ावा देने में संस्कृति और विरासत की भूमिका पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि, आर्थिक संतुलन को फिर से बनाने की प्रक्रिया अच्छी तरह से चल रही है; राजनीतिक संतुलन भी दिखाई दे रहा है, और अब तीसरे पहलू सांस्कृतिक संतुलन को आगे बढ़ाना जरूरी है।

‘ग्लोबल साउथ’ के सामने 4F संकट

जयशंकर ने ‘ग्लोबल साउथ’ के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ग्लोबल साउथ की स्थिति बहुत गंभीर है। इसे ‘4F’ संकट का सामना करना पड़ रहा है, यानी भोजन, ईंधन, खाद और फाइनेंस की सुरक्षा का संकट। सुपर अल-नीनो का असर, खाद की बढ़ती कमी और अनाज की आवाजाही में रुकावटें- ये सभी चिंता की बात हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि AI का गलत इस्तेमाल भेदभाव को बढ़ा रहा है और आपसी सम्मान को कम कर रहा है, जो संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों और उद्देश्यों के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

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