Raveena Tandon recall Kailash Mansarovar story: बॉलीवुड की मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री रवीना टंडन (Raveena Tandon) अक्सर अपनी धार्मिक यात्राओं को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में डांस रियलिटी शो के मंच पर रवीना ने अपनी जिंदगी का एक ऐसा चौंकाने वाला और भावुक किस्सा सुनाया, जिसने महादेव (भगवान शिव) में उनकी आस्था को कई गुना बढ़ा दिया। रवीना ने खुलासा करते हुए बताया कि कैसे कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने से ठीक पहले उनका वीजा रद्द होना उनके और उनकी बेटी राशा टंडन (Rasha Thadani) के लिए काल बनने से बच गया। इस दौरान रवीना ने कंटेस्टेंट से भी भगवान के प्रति आस्था को लेकर बात की।
रवीना टंडन ने सुनाया महादेव की इच्छा को लेकर किस्सा
रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ (India’s Best Dancer Season 5) के सेमीफाइनल एपिसोड के दौरान रवीना टंडन ने अपने इस व्यक्तिगत अनुभव को याद किया। उन्होंने बताया कि साल 2022 में जब उनके पिता रवि टंडन का निधन हुआ, तो उन्होंने शांति और आस्था की तलाश में देश भर के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का संकल्प लिया था।
12 ज्योतिर्लिंगों की तीर्थयात्रा पूरी करने के बाद रवीना टंडन और उनकी बेटी राशा टंडन ने कैलाश मानसरोवर जाने का प्लान बनाया था। सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन आखिरी मौके पर उनका वीजा कैंसिल कर दिया गया, जिससे वह दोनों काफी निराश हो गई थीं।
“महादेव का कोई कारण होगा”- रवीना टंडन
यात्रा रद्द होने से लगे झटके को याद करते हुए रवीना टंडन ने कहा, “हम बहुत दुखी और निराश थे कि हमारी इतनी बड़ी यात्रा अचानक कैंसिल हो गई। लेकिन मैंने खुद को समझाया और कहा कि महादेव का जरूर कोई न कोई कारण होगा कि हम नहीं जा पा रहे हैं। जब वो हमें सच्चे दिल से बुलाएंगे, तो हम अपने आप चले जाएंगे।”
तबाही की खबर सुनकर कांप गई थीं रवीना टंडन
रवीना ने बताया कि जो निराशा उन्हें शुरुआत में महसूस हो रही थी, उसका असली कारण दो दिन बाद समझ आया। नेपाल और नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के लांगटांग इलाके में अचानक चट्टानें और बर्फ खिसकने से भीषण बाढ़ और तबाही मच गई। इस भयानक मानवीय आपदा में ग्यिरोंग पोर्ट (जो भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर का मुख्य प्रवेश द्वार है) पूरी तरह तबाह हो गया था।
रवीना ने भावुक होते हुए कहा, “दो दिन बाद जब हमें पता चला कि वहां ग्लेशियर टूट गया है और भारी तबाही हुई है, तो हमारे रोंगटे खड़े हो गए। यह महादेव का ही तरीका था कि उन्होंने मुझे और मेरी बेटी को इस जानलेवा संकट से बचा लिया। कभी-कभी योजनाओं में रुकावट भी भगवान का सुरक्षा कवच बन जाती है।”

