गर्भावस्था के 9 महीने अब होंगे और आसान:इंदौर में लॉन्च हुए ‘गर्भ सहेली’ और ‘गीता सखी’, महिलाओं के लिए AI आधारित डिजिटल साथी

गर्भावस्था के 9 महीने अब होंगे और आसान:इंदौर में लॉन्च हुए ‘गर्भ सहेली’ और ‘गीता सखी’, महिलाओं के लिए AI आधारित डिजिटल साथी

गर्भावस्था के दौरान मन में उठने वाले छोटे-बड़े सवालों और भावनात्मक उलझनों के लिए अब महिलाओं को डिजिटल सहारा मिलेगा। इंदौर में मनोविज्ञान विशेषज्ञ शैला राव ने ‘गर्भ सहेली’ और ‘गीता सखी’ नाम से दो वेब ऐप लॉन्च किए हैं। इनका उद्देश्य गर्भावस्था के नौ महीनों को सहज, सकारात्मक और तनावमुक्त बनाने के साथ ही रोजमर्रा की जिंदगी में गीता की सीख को सरल तरीके से लोगों तक पहुंचाना है। करीब पांच दशक से गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग कर रहीं शैला राव के अनुभव पर आधारित ‘गर्भ सहेली’ को खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए तैयार किया गया है। वहीं ‘गीता सखी’ आम लोगों के लिए भगवद्गीता आधारित वॉइस AI असिस्टेंट है। ‘गर्भ सहेली’ में क्या खास? यह एक निःशुल्क वेब ऐप है, जिसे गर्भ संस्कार की परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर तैयार किया गया है। इसमें गर्भावस्था के नौ महीनों की सप्ताह-दर-सप्ताह ‘यात्रा’ दी गई है। हर दिन महिला के लिए तीन छोटे और आसान अभ्यास सुझाए जाते हैं। इन्हें अनिवार्य नहीं रखा गया है, बल्कि महिला अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें अपना सकती है। AI से हिंदी, हिंग्लिश या अंग्रेजी में बात ऐप में ‘सहेली’ नाम का AI आधारित डिजिटल असिस्टेंट है। महिला इससे हिंदी, हिंग्लिश या अंग्रेजी में बातचीत कर सकती है। मसलन, बेचैनी हो, नींद को लेकर चिंता हो, मन में कोई सवाल हो या सिर्फ किसी से बात करने का मन हो तो ‘सहेली’ से बातचीत की जा सकती है। 24 अभ्यासों का डिजिटल संग्रह ‘गर्भ सहेली’ के ‘संग्रह’ में गर्भ संस्कार से जुड़े 24 चुने हुए अभ्यास उपलब्ध हैं। इनका उद्देश्य गर्भवती महिला को मानसिक रूप से शांत, सकारात्मक और आत्मविश्वासी बनाए रखने में मदद करना है। डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं ऐप में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। ‘गर्भ सहेली’ डॉक्टर की सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है। इसमें न दवा बताई जाती है, न बीमारी की पहचान और न ही इलाज की सलाह दी जाती है। – खून आने, तेज दर्द, बुखार या शिशु की हलचल कम महसूस होने जैसी स्थिति में ऐप डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह देता है। – गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित माने जाने वाले ही श्वास अभ्यास इसमें शामिल किए गए हैं। कपालभाति, भस्त्रिका और लंबे समय तक सांस रोकने वाले अभ्यास इसमें नहीं रखे गए हैं। 16वें सप्ताह के बाद पीठ के बल लेटने से बचने की सलाह भी दी जाती है। ‘गीता सखी’ बताएगी गीता की सीख ‘गर्भ सहेली’ के साथ ‘गीता सखी’ भी लॉन्च की गई है। यह भगवद्गीता पर आधारित वॉइस-बेस्ड AI असिस्टेंट है। इसमें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सवालों और उलझनों पर गीता के श्लोकों के जरिए सरल भाषा में मार्गदर्शन देने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ श्लोक सुनाना नहीं, बल्कि उनके अर्थ और सीख को आज की जिंदगी से जोड़ना है। तनाव, निर्णय को लेकर असमंजस या जीवन से जुड़े किसी सवाल के समय ‘गीता सखी’ बातचीत के जरिए गीता की सीख को समझने में मदद करेगी। बातचीत रिकॉर्ड नहीं होगी दोनों वेब ऐप तैयार करते समय यूजर्स की निजता का भी ध्यान रखा गया है। दावा है कि ऐप पर होने वाली बातचीत रिकॉर्ड नहीं की जाती। इनका इस्तेमाल करने के लिए किसी ऐप को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है। स्मार्टफोन, टैबलेट या कंप्यूटर के ब्राउजर से इन्हें सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे कर सकते हैं इस्तेमाल – गर्भ सहेली: garbhsaheli.com
– गीता सखी: geetasakhi.com
– दोनों वेब ऐप निःशुल्क उपलब्ध हैं।
– किसी ऐप को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं।
– शैला राव ने कहा- गर्भावस्था में सिर्फ सलाह नहीं, सुनने वाला भी चाहिए शैला राव के मुताबिक गर्भावस्था केवल मां बनने की तैयारी नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण दौर है। महिलाओं को सलाह देने वाले लोग तो बहुत मिल जाते हैं, लेकिन उनकी बात धैर्य से सुनने और बिना डर पैदा किए सही दिशा दिखाने वाला साथ कम मिलता है। इसी अनुभव को तकनीक से जोड़कर ‘गर्भ सहेली’ तैयार की गई है, ताकि महिलाएं घर बैठे इसका लाभ ले सकें।

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