गया- 70 साल पुरानी दुर्गा पूजा पर गंदगी का ग्रहण:पंडाल के रास्ते पर बह रहा नाली का पानी, नगर आयुक्त के कार्यालय के पास बदहाली ने खोली व्यवस्था की पोल

गया- 70 साल पुरानी दुर्गा पूजा पर गंदगी का ग्रहण:पंडाल के रास्ते पर बह रहा नाली का पानी, नगर आयुक्त के कार्यालय के पास बदहाली ने खोली व्यवस्था की पोल

एक तरफ मां दुर्गा के भव्य स्वागत की तैयारी, दूसरी तरफ पंडाल तक पहुंचने के रास्ते पर बहता नाली का गंदा पानी! गया के केदारनाथ मार्केट में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच यह तस्वीर नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। करीब 70 साल पुरानी दुर्गा पूजा की परंपरा से जुड़े इस आयोजन में हर साल हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार पंडाल की भव्यता के बीच गंदगी मुख्य रास्ते मे पैर पसारे है। रास्ता रोक रखा है। हालात ऐसे हैं कि श्रद्धालुओं को मां के दर्शन के लिए गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम कार्यालय के पास ही गंदगी का यह हाल है, तो शहर की सफाई व्यवस्था का दावा कितना दमदार होगा। इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। हैरानी की बात है कि केदारनाथ मार्केट के पास ही नगर निगम का कार्यालय है, जहां नगर आयुक्त और नगर सरकार बैठती है। इसके बावजूद पंडाल तक जाने वाले रास्ते पर बजबजाते नाली का पानी का बहना निगम के तमाम दावे को पलीता लगा रहा है। पंडाल भव्य, लेकिन रास्ते पर गंदगी का पहरा केदारनाथ मार्केट में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा करीब 7 दशक पुरानी है। हर साल यहां अलग-अलग थीम पर आकर्षक पंडाल बनाया जाता है जिसकी चर्चा दूर दूर तक होती है। इसकी सजावट और भव्यता देखने के लिए शहर ही नहीं, आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं। इस बार भी पंडाल सोने की लंका की थीम पर बनाया गया है। 25 लाख से अधिक का बजट है। फिलहाल यह जिले भर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है, लेकिन रास्ते पर बहता गंदा पानी पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहा है। पंडाल की सजावट लोगों को लुभा सकती है लेकिन वहां तक पहुंचने के रास्ते की गंदगी श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा सकती है। नाली के पानी के ऊपर से होकर गंदे पांव भक्त मां के पवित्र दरबार मे पहुंचेंगे। दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ बढ़ने पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को खास तौर पर दिक्कत हो सकती है। गंदे पानी से होकर गुजरना, दुर्गंध और चिप चिपे पैर जैसी परेशानियां श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। निगम कार्यालय के पास ही व्यवस्था की परीक्षा शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। त्योहारों के दौरान सफाई और जल निकासी के लिए विशेष इंतजाम की जरूरत होती है। खासकर उन रास्तों पर, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। लेकिन केदारनाथ मार्केट की स्थिति सवाल पूछ रही है कि जब निगम कार्यालय के नजदीक ही नाली के पानी की समस्या बनी हुई है, तो बाकी जगह स्थिति क्या होगी। इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। श्रद्धालु दर्शन करने आएंगे या गंदगी से जूझेंगे? दुर्गा पूजा आस्था, स्वच्छता और सामूहिक उत्सव का अवसर है। ऐसे में पंडाल तक पहुंचने वाले रास्ते पर गंदे पानी का बहना श्रद्धालुओं के अनुभव को प्रभावित कर सकता है। यदि समय रहते समस्या दूर नहीं हुई, तो भीड़ बढ़ने के साथ परेशानी भी बढ़ सकती है। वहीं इस मसले पर नगर आयुक्त गगन कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो उसने सम्पर्क नहीं हो सका। एक तरफ मां दुर्गा के भव्य स्वागत की तैयारी, दूसरी तरफ पंडाल तक पहुंचने के रास्ते पर बहता नाली का गंदा पानी! गया के केदारनाथ मार्केट में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच यह तस्वीर नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। करीब 70 साल पुरानी दुर्गा पूजा की परंपरा से जुड़े इस आयोजन में हर साल हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार पंडाल की भव्यता के बीच गंदगी मुख्य रास्ते मे पैर पसारे है। रास्ता रोक रखा है। हालात ऐसे हैं कि श्रद्धालुओं को मां के दर्शन के लिए गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम कार्यालय के पास ही गंदगी का यह हाल है, तो शहर की सफाई व्यवस्था का दावा कितना दमदार होगा। इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। हैरानी की बात है कि केदारनाथ मार्केट के पास ही नगर निगम का कार्यालय है, जहां नगर आयुक्त और नगर सरकार बैठती है। इसके बावजूद पंडाल तक जाने वाले रास्ते पर बजबजाते नाली का पानी का बहना निगम के तमाम दावे को पलीता लगा रहा है। पंडाल भव्य, लेकिन रास्ते पर गंदगी का पहरा केदारनाथ मार्केट में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा करीब 7 दशक पुरानी है। हर साल यहां अलग-अलग थीम पर आकर्षक पंडाल बनाया जाता है जिसकी चर्चा दूर दूर तक होती है। इसकी सजावट और भव्यता देखने के लिए शहर ही नहीं, आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं। इस बार भी पंडाल सोने की लंका की थीम पर बनाया गया है। 25 लाख से अधिक का बजट है। फिलहाल यह जिले भर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है, लेकिन रास्ते पर बहता गंदा पानी पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहा है। पंडाल की सजावट लोगों को लुभा सकती है लेकिन वहां तक पहुंचने के रास्ते की गंदगी श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा सकती है। नाली के पानी के ऊपर से होकर गंदे पांव भक्त मां के पवित्र दरबार मे पहुंचेंगे। दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ बढ़ने पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को खास तौर पर दिक्कत हो सकती है। गंदे पानी से होकर गुजरना, दुर्गंध और चिप चिपे पैर जैसी परेशानियां श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। निगम कार्यालय के पास ही व्यवस्था की परीक्षा शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। त्योहारों के दौरान सफाई और जल निकासी के लिए विशेष इंतजाम की जरूरत होती है। खासकर उन रास्तों पर, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। लेकिन केदारनाथ मार्केट की स्थिति सवाल पूछ रही है कि जब निगम कार्यालय के नजदीक ही नाली के पानी की समस्या बनी हुई है, तो बाकी जगह स्थिति क्या होगी। इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। श्रद्धालु दर्शन करने आएंगे या गंदगी से जूझेंगे? दुर्गा पूजा आस्था, स्वच्छता और सामूहिक उत्सव का अवसर है। ऐसे में पंडाल तक पहुंचने वाले रास्ते पर गंदे पानी का बहना श्रद्धालुओं के अनुभव को प्रभावित कर सकता है। यदि समय रहते समस्या दूर नहीं हुई, तो भीड़ बढ़ने के साथ परेशानी भी बढ़ सकती है। वहीं इस मसले पर नगर आयुक्त गगन कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो उसने सम्पर्क नहीं हो सका।  

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