खैरथल में विश्व आदिवासी दिवस पर विधिक शिविर:अधिकारों की जानकारी दी; भूमि, वन और सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण का दिया संदेश

खैरथल में विश्व आदिवासी दिवस पर विधिक शिविर:अधिकारों की जानकारी दी; भूमि, वन और सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण का दिया संदेश

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समुदाय को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ग्राम रायपुर मेवान, टहटड़ा एवं खेड़ला में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खैरथल के पैरा लीगल वालंटियर सूरजभान कछवाहा, किरण कुमारी आर्य एवं मनीष कुमार ने ग्रामीणों को विभिन्न विधिक प्रावधानों की जानकारी दी। पीएलवी ने बताया कि आदिवासी एवं अन्य वंचित वर्गों को अपने अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। जागरूकता के अभाव में कई बार लोग अपने कानूनी अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने भूमि एवं संपत्ति से जुड़े अधिकार, वन संसाधनों का संरक्षण, पारंपरिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा सहित सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। जरूरतमंदों को मिलेगी निःशुल्क कानूनी सहायता शिविर में लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में भी विस्तार से बताया गया।आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से बिना शुल्क के कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके तहत पात्र व्यक्तियों को कानूनी सलाह,अधिवक्ता की सहायता और न्यायालयीन प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। पीएलवी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का हनन होने अथवा कानूनी विवाद उत्पन्न होने पर चुप रहने के बजाय विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करना चाहिए।उन्होंने ग्रामीणों से स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी उनके कानूनी अधिकारों एवं निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में जानकारी देने की अपील की। कमजोर वर्गों तक न्याय पहुंचाना उद्देश्य कार्यक्रम राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खैरथल-तिजारा के अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र व्यास के आदेशानुसार और सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजीत कुड़ी के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि विधिक जागरूकता का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।आदिवासी समुदाय सहित सभी पात्र नागरिकों को कानून के समक्ष समान अधिकार प्राप्त हैं और आवश्यकता पड़ने पर वे विधिक सेवा संस्थाओं की सहायता ले सकते हैं।

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