बरेली के करेली गांव की ज्योति ठाकुर आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाईं। लेकिन उन्होंने इस परेशानी को अपनी ताकत बनाया और गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ाने का फैसला किया। वर्ष 2018 में उन्होंने सिर्फ 2 बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था। आज वह 120 बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रही हैं। ज्योति ने वर्ष 2017 में कॉलेज में दाखिला लिया था, लेकिन फीस ज्यादा होने के कारण छह महीने बाद ही उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने तय किया कि पैसों की कमी के कारण किसी दूसरे बच्चे की पढ़ाई नहीं छूटनी चाहिए। उन्होंने अपने गांव में ऐसे बच्चों को तलाशना शुरू किया, जो गरीबी के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे थे या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके थे। ज्योति ने भीमसेन मंदिर परिसर में एक पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई। अब वह 120 बच्चों को पढ़ा रही हैं। इनमें से कई बच्चों का स्कूलों में दाखिला भी करा चुकी हैं। नौकरी से चलाती हैं घर, बच्चों की पढ़ाई में भी करती हैं मदद ज्योति बच्चों को पढ़ाने के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। वह सीएस इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करती हैं। इसी नौकरी से वह घर का खर्च चलाती हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए कॉपी, किताब और पेंसिल जैसी चीजों का इंतजाम भी करती हैं। ज्योति के काम के बारे में जब सोशल मीडिया, अखबार और टीवी के जरिए लोगों को पता चला तो कई समाजसेवी मदद के लिए आगे आए। लोग बच्चों को पढ़ाई का सामान, कपड़े और राशन भी देते हैं। बच्चों को डॉक्टर और अफसर बनते देखना चाहती हैं ज्योति चाहती हैं कि उनके यहां पढ़ने वाले बच्चे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, आईपीएस अधिकारी, पुलिसकर्मी और शिक्षक बनें। उनका मानना है कि शिक्षा से बच्चे अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं। ज्योति आगे भी गरीब और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त पढ़ाना चाहती हैं, ताकि पैसों की कमी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न छूटे।

