खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम में संशोधन संसद के अगले सत्र में पेश किए जाएंगे। इन संशोधनों के तहत खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी और आपूर्ति करने वालों के लिए पांच साल तक की जेल की सजा का प्रावधान होगा। मांडविया ने यहां खेल में डोपिंग के खिलाफ यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तहत आयोजित दो बैठकों की अध्यक्षता करने के बाद यह बात कही।संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत का दृढ़ विश्वास है कि खेलों में उत्कृष्टता के साथ हमेशा ईमानदारी भी होनी चाहिए। प्रत्येक खिलाड़ी को प्रतिस्पर्धा का उचित अवसर मिलना चाहिए जिसमें प्रतिभा, तैयारी और कड़ी मेहनत से सफलता तय हो, ना कि प्रतिबंधित पदार्थों या तरीकों से।’’
मांडविया ने कहा, ‘‘भारत ने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम 2022 और इसके 2025 के संशोधन के जरिए अपने कानूनी और संस्थागत ढांचे को मजबूत किया है।ये दोनों जुलाई 2026 में लागू हुए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम संसद के अगले सत्र में एक और संशोधन पेश करेंगे, जिसका उद्देश्य उल्लंघनों से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आपराधिक प्रावधान लागू करना है। इसमें कोच और आपूर्ति शृंखला से जुड़े लोगों द्वारा किए जाने वाले उल्लंघन भी शामिल हैं।’’
फिलहाल भारत में खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति से निपटने के लिए दंडात्मक प्रावधान नहीं हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में प्रतिबंध लगाया जा सकता है जो अपराध की गंभीरता के आधार पर आजीवन भी हो सकता है।प्रस्तावित संशोधनों के तहत खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी और वितरण को अपराध घोषित किया जाएगा। आपूर्तिकर्ताओं को पांच साल तक की जेल की सजा देने का प्रावधान होगा। इसमें उन चिकित्सा पेशेवरों को भी दायरे में लाने का लक्ष्य है जो जानबूझकर प्रतिबंधित दवाएं लिखते हैं।प्रस्तावित संशोधन में कहा गया है, ‘‘जो कोई भी खेलों में डोपिंग के उद्देश्य से या उससे संबंधित किसी खिलाड़ी को कोई पदार्थ देता है या उसका इस्तेमाल करता है, उसे पांच साल तक की कैद या दो लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।’’
मंत्री ने डोपिंग पर अंकुश लगाने और खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों के बारे में जागरूक करने के लिए भारत की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। मांडविया ने कहा, ‘‘वर्ष 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने 7,000 से अधिक जांच कीं और जागरूकता एवं शिक्षा से जुड़े 350 से अधिक सत्र आयोजित किए। इन सत्रों के जरिए 27,000 लोगों तक पहुंच बनाई गई।इस दौरान जोखिम आधारित जांच और खुफिया जानकारी पर आधारित जांच पर ध्यान दिया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मोबाइल ऐप ‘नो योर मेडिसिन’ पर पांच लाख से अधिक बार खोज की गई है जिससे दवाओं के बारे में जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में मदद मिल रही है।’’
यहां आयोजित बैठक का उद्देश्य डोपिंग के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ाना और यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के कार्यान्वयन को मजबूत करना था। बैठक के एजेंडे में संसाधन जुटाना, 2026-2031 के लिए कोष की संचालन रणनीति, नियमों का अनुपालन और क्षमता निर्माण जैसे मुद्दे भी शामिल थे जिससे कि एक स्थायी वैश्विक डोपिंग रोधी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। भारत पिछले तीन वर्षों से विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के प्रमुख देशों के बीच डोपिंग उल्लंघन करने वालों की सूची में शीर्ष पर रहा है।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम में संशोधन संसद के अगले सत्र में पेश किए जाएंगे। इन संशोधनों के तहत खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी और आपूर्ति करने वालों के लिए पांच साल तक की जेल की सजा का प्रावधान होगा। मांडविया ने यहां खेल में डोपिंग के खिलाफ यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तहत आयोजित दो बैठकों की अध्यक्षता करने के बाद यह बात कही।
संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत का दृढ़ विश्वास है कि खेलों में उत्कृष्टता के साथ हमेशा ईमानदारी भी होनी चाहिए। प्रत्येक खिलाड़ी को प्रतिस्पर्धा का उचित अवसर मिलना चाहिए जिसमें प्रतिभा, तैयारी और कड़ी मेहनत से सफलता तय हो, ना कि प्रतिबंधित पदार्थों या तरीकों से।’’
मांडविया ने कहा, ‘‘भारत ने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम 2022 और इसके 2025 के संशोधन के जरिए अपने कानूनी और संस्थागत ढांचे को मजबूत किया है।
ये दोनों जुलाई 2026 में लागू हुए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम संसद के अगले सत्र में एक और संशोधन पेश करेंगे, जिसका उद्देश्य उल्लंघनों से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आपराधिक प्रावधान लागू करना है। इसमें कोच और आपूर्ति शृंखला से जुड़े लोगों द्वारा किए जाने वाले उल्लंघन भी शामिल हैं।’’
फिलहाल भारत में खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति से निपटने के लिए दंडात्मक प्रावधान नहीं हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में प्रतिबंध लगाया जा सकता है जो अपराध की गंभीरता के आधार पर आजीवन भी हो सकता है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी और वितरण को अपराध घोषित किया जाएगा। आपूर्तिकर्ताओं को पांच साल तक की जेल की सजा देने का प्रावधान होगा। इसमें उन चिकित्सा पेशेवरों को भी दायरे में लाने का लक्ष्य है जो जानबूझकर प्रतिबंधित दवाएं लिखते हैं।
प्रस्तावित संशोधन में कहा गया है, ‘‘जो कोई भी खेलों में डोपिंग के उद्देश्य से या उससे संबंधित किसी खिलाड़ी को कोई पदार्थ देता है या उसका इस्तेमाल करता है, उसे पांच साल तक की कैद या दो लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।’’
मंत्री ने डोपिंग पर अंकुश लगाने और खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों के बारे में जागरूक करने के लिए भारत की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। मांडविया ने कहा, ‘‘वर्ष 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने 7,000 से अधिक जांच कीं और जागरूकता एवं शिक्षा से जुड़े 350 से अधिक सत्र आयोजित किए। इन सत्रों के जरिए 27,000 लोगों तक पहुंच बनाई गई।
इस दौरान जोखिम आधारित जांच और खुफिया जानकारी पर आधारित जांच पर ध्यान दिया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मोबाइल ऐप ‘नो योर मेडिसिन’ पर पांच लाख से अधिक बार खोज की गई है जिससे दवाओं के बारे में जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में मदद मिल रही है।’’
यहां आयोजित बैठक का उद्देश्य डोपिंग के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ाना और यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के कार्यान्वयन को मजबूत करना था। बैठक के एजेंडे में संसाधन जुटाना, 2026-2031 के लिए कोष की संचालन रणनीति, नियमों का अनुपालन और क्षमता निर्माण जैसे मुद्दे भी शामिल थे जिससे कि एक स्थायी वैश्विक डोपिंग रोधी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। भारत पिछले तीन वर्षों से विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के प्रमुख देशों के बीच डोपिंग उल्लंघन करने वालों की सूची में शीर्ष पर रहा है।
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