खराब खाद्य पदार्थ बेचने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऑर्कला इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और रिलायंस जियो स्मार्ट पॉइंट को उपभोक्ता को राहत देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने दोनों विपक्षी पक्षों को उत्पादों की कीमत 250 रुपए 9% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने, 5 हजार रुपए क्षतिपूर्ति और 5 हजार रुपए वाद खर्च देने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन 45 दिन में करना होगा।
मामले में दुबे का पड़ाव निवासी डॉ. कृतिका मोहन ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जियो स्मार्ट पॉइंट से खरीदे गए उपमा और ढोकला के पैकेट खाने योग्य नहीं थे। इनका सेवन करने के बाद उन्हें कब्ज और दस्त की शिकायत हुई, जिसके लिए चिकित्सीय उपचार कराना पड़ा। उन्होंने उत्पाद की कीमत के अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 50 हजार रुपए, कानूनी नोटिस के खर्च के रूप में 2,100 रुपए और वाद खर्च के रूप में 21 हजार रुपए दिलाने की मांग की थी।
कंपनी ने आरोपों को नकारा, स्टोर ने बताई बेस्ट बिफोर अवधि
शिकायत के अनुसार, युवती ने 17 अप्रैल 2024 को 55 रुपए प्रति पैकेट की दर से उपमा के दो पैकेट खरीदे थे। शिकायत में ढोकला के दो पैकेट खरीदने का भी उल्लेख है, जिनकी कीमत 70 रुपए प्रति पैकेट बताई गई। निर्माता कंपनी ने खाद्य पदार्थों के खराब और अस्वच्छ होने तथा युवती के बीमार पड़ने के आरोपों को गलत बताया। वहीं, जियो स्मार्ट पॉइंट की ओर से कहा गया कि उत्पाद एक्सपायर नहीं हुए थे और निर्धारित ‘बेस्ट बिफोर’ अवधि के भीतर थे। स्टोर ने यह भी कहा कि उत्पादों के अस्वास्थ्यकर होने के समर्थन में साक्ष्य नहीं दिए गए।
आयोग ने शिकायत को माना सही
आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का परीक्षण करने के बाद शिकायतकर्ता को राहत का पात्र माना। आयोग ने कहा कि खरीद का बिल प्रस्तुत किया गया और निर्माता कंपनी ने उत्पादों के निर्माण से इनकार नहीं किया। शिकायतकर्ता के कथन पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है। आयोग ने खराब खाद्य पदार्थ बेचे जाने के आधार पर शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। 9 अक्टूबर को सुनाए गए आदेश में आयोग ने निर्देश दिया कि तय अवधि में भुगतान नहीं करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत गैर-अनुपालन के लिए कार्रवाई की जा सकती है।

