कैबिनेट के बड़े फैसले:झारखंड में भूमि अधिग्रहण का बनेगा डिजिटल पोर्टल, इससे पूरा रिकॉर्ड एक ही जगह मिलेगा

कैबिनेट के बड़े फैसले:झारखंड में भूमि अधिग्रहण का बनेगा डिजिटल पोर्टल, इससे पूरा रिकॉर्ड एक ही जगह मिलेगा

झारखंड कैबिनेट ने सड़क, रेल, सिंचाई और खनन परियोजनाओं के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी बनाने और उसका पूरा रिकॉर्ड एक डिजिटल पोर्टल पर रखने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी। विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल ने बताया कि इस पोर्टल पर सभी रिकॉर्ड एक ही जगह उपलब्ध होंगे। पूर्व से अधिग्रहित जमीनों का डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा। इससे नई परियोजनाओं में पहले से अधिग्रहित खाली व उपयोग में न लाई गई भूमि का दूसरी परियोजनाओं में आसानी से उपयोग किया जा सकेगा। प्रस्तावित पोर्टल में भूमि अधिग्रहण से संबंधित अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के अंतर्गत अर्जित जमीन का रिकॉर्ड शामिल करने की योजना है। इनमें मुख्य रूप से भू-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 तथा पुराने अधिग्रहण के लिए लागू संबंधित कानूनी प्रावधान शामिल होंगे। इसके साथ राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत सड़क परियोजनाओं, रेल अधिनियम, 1989 के तहत रेल परियोजनाओं और कोयला धारक क्षेत्र अधिग्रहण एवं विकास अधिनियम, 1957 के तहत खनन परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीन का विवरण भी दर्ज किया जा सकेगा। जिलों और संबंधित विभागों से पुराने तथा नए अधिग्रहण के दस्तावेज जुटाकर पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इससे राज्य स्तर पर भूमि अधिग्रहण का ऐतिहासिक रिकॉर्ड तैयार होगा। पुराने अधिग्रहण से जुड़े विवादों तथा अतिक्रमण के मामलों को सुलझाने में सहूलियत होगी। राजस्व बढ़ाने के लिए खनिज धारित भूमि उपकर अधिनियम में संशोधन, बॉक्साइट पर बढ़ा सेस झारखंड मंत्रिपरिषद ने खनिज राजस्व को मजबूत करने के लिए ‘खनिज धारित भूमि उपकर अधिनियम, 2024’ की अनुसूची में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत कैप्टिव खनन पट्टों के खनिजों का निर्धारित सीमा से अधिक गैर-कैप्टिव उपयोग होने पर अतिरिक्त उपकर (सेस) वसूला जाएगा। साथ ही, बॉक्साइट पर उपकर की दर को लंदन मेटल एक्सचेंज (एल्युमिनियम) मूल्य के 2% से बढ़ाकर 4% कर दिया गया है, जिसकी गणना अयस्क में मौजूद धातु की मात्रा के आधार पर होगी। इसके अतिरिक्त, राज्य में खनिज ब्लॉकों के प्रभावी संचालन के लिए ‘झारखंड मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड ब्लॉक डेवलपमेंट पॉलिसी 2026’ को भी स्वीकृति दी गई है, जिससे परियोजनाओं के विलंब को कम किया जा सके। पॉलिटेक्निक के छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण : राजकीय पॉलिटेक्निक और राजकीय महिला पॉलिटेक्निक संस्थानों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को अब बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए रांची, दुमका और रामगढ़ में स्थित ‘झारखंड गवर्नमेंट टूल रूम’ का चयन किया गया है। छात्रों को समर या सेमेस्टर इंटर्नशिप कराई जाएगी। सप्ताह में 60 घंटे तक काम, पर देना होगा अतिरिक्त मेहनताना श्रम कानूनों से जुड़े प्रावधानों में बदलाव करते हुए कैबिनेट ने निर्णय लिया कि अब प्रतिदिन अधिकतम 10 घंटे और सप्ताह में 60 घंटे तक काम लिया जा सकता है। पर, पूर्व के निर्धारित सप्ताह में 48 घंटे का बैरियर रहेगा। इसके अतिरिक्त काम करने पर अतिरिक्त मेहनताना देना होगा। चापाकल के लिए 96 करोड़ : ग्रामीण इलाकों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चापाकल लगाने की योजना पर करीब 96 करोड़ रु. खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इससे पेयजल संकट वाले गांवों में लोगों को राहत मिलेगी। मंत्रिपरिषद के अन्य निर्णय

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