केआरएच की ओपीडी में हर रोज पहुंच रहे 20 से 25 नए मरीज…वायरल मायोसाइटिस का प्रकोप, बच्चों के पैरों में उठ रहा तेज दर्द

केआरएच की ओपीडी में हर रोज पहुंच रहे 20 से 25 नए मरीज…वायरल मायोसाइटिस का प्रकोप, बच्चों के पैरों में उठ रहा तेज दर्द

ग्वालियर . मौसम के बदलते मिजाज के बीच शहर में बच्चों पर एक नए किस्म के वायरल इन्फेक्शन का हमला हुआ है। जेएएच के केआरएच स्थित पीडियाट्रिक वार्ड में इन दिनों बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं, जो सामान्य बुखार के साथ-साथ पैरों में तेज दर्द की शिकायत से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि कई मासूम खड़े होने और चलने-फिरने में भी असमर्थ हो रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह समस्या वायरल मायोसाइटिस के कारण हो रही है, जिसमें वायरस सीधे बच्चों के पैरों की मांसपेशियों (मसल्स) को प्रभावित करता है। इसके लक्षण सर्दी, खांसी, सामान्य वायरल बुखार और डेंगू से काफी मिलते-जुलते हैं।

ओपीडी में बढ़ी बच्चों की संख्या
केआरएच में बच्चों के वार्ड में इन दिनों मरीजों की भीड़ देखने को मिल रही है। स्थिति यह है कि हर रोज लगभग 20 से 25 बच्चे इस नई समस्या के साथ डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। अधिकांश मामलों में यह परेशानी 12 साल तक के बच्चों में सबसे ज्यादा देखी जा रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे इस अजीब दर्द के कारण ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही इस सीजन में बच्चों में सर्दी, खांसी व अन्य समस्याएं भी आने लगी हैं।
क्या है वायरल मायोसाइटिस ? सीधे मांसपेशियों पर हमला
विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार बच्चों को परेशान करने वाली इस नई बीमारी को वायरल मायोसाइटिस कहा जाता है। इस स्थिति में वायरल संक्रमण का वायरस सीधे बच्चे के पैरों की मांसपेशियों पर असर डालता है। इससे मांसपेशियों में सूजन और तीव्र दर्द पैदा होता है। कई बच्चों को तो जोड़ों और पिंडलियों में इतना तेज दर्द होता है कि वे अपने पैरों पर वजन तक नहीं डाल पाते हैं।

डेंगू और वायरल से मिलते-जुलते लक्षण
इस वायरल संक्रमण के लक्षण काफी हद तक सामान्य वायरल, सर्दी-जुकाम और डेंगू से मिलते-जुलते हैं। बच्चों को तेज बुखार आने के बाद यह नया दर्द शुरू होता है। यही वजह है कि शुरुआत में परिजन इसे सामान्य कमजोरी या जोड़ों का दर्द समझ लेते हैं, लेकिन जब बच्चा चल नहीं पाता तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते इसकी पहचान करना बहुत जरूरी है।

बचाव व जरूरी सावधानियां
डिहाइड्रेशन का ध्यान रखें :
बच्चों को पर्याप्त पानी और ओआरएस का घोल पिलाएं।
पूर्ण आराम दें : पीड़ित बच्चे को अधिक से अधिक बेड रेस्ट कराएं।
गर्म पानी की सिकाई : पैरों के दर्द में राहत के लिए हल्की सिकाई करें।
पेन किलर से बचें : बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवा न दें, विशेषज्ञ को दिखाएं।

मौसम में बदलाव के चलते इन दिनों कुछ बच्चों में पैरों में गंभीर दर्द देखर जा रहा है। यह एक वायरस का ही रूप है। इसे ठीक होने में लगभग आठ से दस दिन लग रहे हैं। इसमें बच्चों के पैरों में दर्द के साथ चलने-फिरने में काफी परेशानी आ रही है।
डॉ. अजय गौड़, पीडियाट्रिक विभागाध्यक्ष, जीआरएमसी

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